विभिन्न मांगों को लेकर विकासशील इंसान पार्टी के कार्यकर्ताओं ने मंगल व बुद्धवार को कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया - Ideal India News

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विभिन्न मांगों को लेकर विकासशील इंसान पार्टी के कार्यकर्ताओं ने मंगल व बुद्धवार को कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया

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विभिन्न मांगों को लेकर विकासशील इंसान पार्टी के कार्यकर्ताओं ने मंगल व बुद्धवार को कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया

स़ोनभद्र ।आइडियल इंडिया न्यूज़ (३१-०८-२०२१),संतोष कुमार नागर


 विभिन्न मांगों को लेकर विकासशील इंसान पार्टी के कार्यकर्ताओं ने मंगल व बुद्धवार को कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया।इस दौरान कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी भी की।सभा को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष हिमांचल साहनी ने कहा कि निषाद अथवा मछुआ समुदाय का परम्परागत पेशा मत्स्य पालन, नौका फेरी, बालू मौरंग खनन आदि है परन्तु वर्तमान समय में मछुवा समुदाय अपने परम्परागत पेशों से वंचित होकर बेकारी व भुखमरी की कगार पर पहुंच गया है।सरकार की गलत नीतियों के कारण ही मछुआ समुदाय को अपने परम्परागत पेशे से वंचित होना पड़ा है।इतना ही नहीं सरकार के ढुलमुल रवैया अपनाने तथा मछुआ समुदाय के प्रति सौतेले व्यवहार के कारण ही पिछड़े वर्ग के लिए सर्वप्रथम 1978 में आरक्षण की व्यवस्था होने पर मछुआ समुदाय की जाति मझयार की पर्यायवाची माझी, मल्लाह, केवट, राजगोड़ आदि, गोड़ की पर्यायवाची गोड़िया, धुरिया, कहार, रायकवार, बाथम, धीमर, राजगौड़ आदि तुरेहा की समनामी धीवर, धीमर, तुरहा, तुराहा आदि, पासी तडमाली की पर्यायवाची भर, राजभर आदि जातियों को पिछड़ा वर्ग में अंकित कर दिए जाने के कारण इन जातियों को अनुसूचित जाति का लाभ मिलने से वंचित होना पड़ा।मछुआ समुदाय की इन जातियों को अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र मिलने में दिक्फत उत्पन्न हो गयी।बताते चलें कि चूंकि अनुसूचित जाति की सूची में किसी भी प्रकार के संसोधन का अधिकार राज्य सरकार को नहीं है।जब सेन्सस 1961 में मांझी, मल्लाह, केवट को मझवार का पर्यायवाची व वंशानुगत जाति मान लिया गया था तो 1978 में इन्हें अन्य पिछड़े वर्ग की सूची में शामिल किया जाना असंवैधानिक कदम था।हमारी मांग जायज व संबैधानिक है इसलिए वर्तमान सरकार केंद्र की सरकार को प्रस्ताव देकर संविधान संशोधन के माध्यम से मछुआ समुदाय की सभी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने के बाबत शासना ज्ञापन सौंपा गया।*

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