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आलोक विश्व मित्र की कविता"चुनावी मौसम " का आनंद लें

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चुनावी मौसम

चुनावी मौसम आया प्यारे,
निकले दल जैसे फव्वारे,
यह दल वह दल सारे दल-दल,
लेकर आए नये नये नारे।

खुद के लगवाते हैं जयकारे।
चुनावी काल में नेता प्यारे।

कुछ नेता जाने पहचाने,
कुछ नये नये हुए दीवाने,
आते कई दल बदल के,
दलबदलु ये बड़े स्याने।

बहाने रखते न्यारे न्यारे।
चुनावी काल में नेता प्यारे।

आते नेता जनता के द्वारें,
लेकर वादे प्यारे न्यारे,
मांगे एक बार मौका दे दो,
चमका देंगे किस्मत के तारे।

जीते चुनाव और चम्पत सारे।
चुनावी काल में नेता प्यारे।

कहते निकम्मी पुर्व सरकारें,
करते थे अपने ही वारे-न्यारे,
एक बार फिर से चुन लो,
नहीं चूकेंगे अबकी बारे।

जादुई छड़ी पास हमारे।
चुनावी काल में नेता प्यारे।

कोई कहता मुफ्त बिजली देगा,
कोई गरीबों के दुःख हर लेगा,
ये चुनावी जुमले है प्यारे,
जनता फिरती मारे मारे।

वहीं के वहीं रह जाते बेचारे।
चुनावी काल में नेता प्यारे।

काला धन होगा सफेद।
गरीब अमीर में मिटेगा भेद।
जाति धर्म का भेद न होगा।
उनकी नियत में न होगी छेद।

विकास का पुरजोर देते नारे।
चुनावी काल में नेता प्यारे।


आलोक विश्व मित्र
वाराणसी उत्तरप्रदेश

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