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NEET में OBC आरक्षण खत्म करना 60% ओबीसी के साथ अन्याय-लौटन राम निषाद*

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 सन्तोष कुमार नागर सोनभद्र

NEET में OBC आरक्षण खत्म करना 60% ओबीसी के साथ अन्याय-लौटन राम निषाद*

*एससी,एसटी को समानुपातिक आरक्षण कोटा तो ओबीसी को क्यों नहीं?



लखनऊ।नीट (NEET) एग्जाम के जरिये मेडिकल संस्थानों में होने वाले एडमिशन में ओबीसी छात्रों को आरक्षण की सुविधा नहीं मिल पा रही है।वीआईपी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष चौ.लौटनराम निषाद ने पिछड़ा विरोधी कदम बताया।उन्होंने कहा कि ओबीसी के केंद्रीय मंत्रिमंडल में 27 ओबीसी मंत्री शामिल किए गए,पर ओबीसी के साथ संवैधानिक अन्याय किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि हमे मंत्री नहीं ओबीसी के वफादार नेता चाहिए।कहने को पीएम मोदी ओबीसी हैं,पर जब से पीएम बने हैं,हर स्तर पर ओबीसी की उपेक्षा ही हो रही है।भाजपा ओबीसी को बस वोटर ,सपोर्टर व मोहरा बनाकर ओबीसी को सामाजिक अन्याय का शिकार बना रही है।
   कहा कि सरकार लगातार छात्रों के अधिकार का हनन कर रही है। अब नीट परीक्षा में ओबीसी आरक्षण को खत्म कर दिया गया, जो सरासर गलत है। इस बार केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार में भी काफी संख्या में ऐसे मंत्री हैं, जो ओबीसी से आते हैं,लेकिन इसके बावजूद भी ओबीसी के अधिकारों का हनन किया जा रहा है। नीट परीक्षा से धीरे-धीरे आरक्षण की कटौती करके आज आरक्षण पूरी तरीके से खत्म कर दिया गया है। 2014 के बाद से तमाम शैक्षणिक संस्थान को बर्बाद किया जा रहा है।जितने भी समावेसी चीजें है, उन सभी को भाजपा सरकार खत्म कर रही है।
     निषाद  ने मेडिकल परीक्षा के लिए राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) कोटा खत्म करने के लिए केंद्र की आलोचना की है।निषाद ने ट्वीट कर लिखा है कि मोदी सरकार ने मेडिकल एंट्रेंस NEET के अखिल भारतीय कोटा में पिछड़ों का आरक्षण लागू किए बिना ही प्रवेश परीक्षा की घोषणा कर हजारों पिछड़े/अतिपिछड़े वर्गों की पीठ में खंजर घोंपने का काम किया है । आरएसएस व बीजेपीऔर केंद्र सरकार, पिछड़े वर्गों के सभी हकों को छिन उन्हें हलाल कर रही है।एक और ट्वीट में निषाद ने लिखा है कि  मोदी सरकार क्यों नहीं चाहती कि पिछड़े वर्गों के छात्र डॉक्टर बने? आखिर भाजपा को देश के 60% फीसदी से अधिक आबादी वाले पिछड़े/अतिपिछड़ों से नफरत क्यों है?आंकड़ों के अनुसार, पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल छात्रों के लिए 27,062 सीटें आवंटित की गईं। जिसमें सामान्य वर्ग को 21,092, एससी को 4,017 और एसटी उम्मीदवारों के लिए 1,953 सीटें दी गईं।पहले के मानदंडों के अनुसार, ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत सीटें आरक्षित थीं, जो इस खंड में 7,307 सीटें आती हैं, जिसे अब हटा दिया गया है।इसी तरह, पीजी डेंटल में अखिल भारतीय स्तर पर 970 सीटें हैं, जिसमें सामान्य के लिए 756, एससी के लिए 141 और एसटी के लिए 73 शामिल हैं। ओबीसी की सीटें शून्य हैं। सामान्य कोटे में 9,208 सहित अंडर ग्रेजुएट मेडिकल उम्मीदवारों के लिए कुल 11,879 सीटों में से 1,787 सीटें एससी के लिए और 884 एसटी के लिए आरक्षित हैं। ओबीसी कोटा फिर से शून्य है।डेंटल छात्रों के लिए स्नातक की कुल 931 सीटों में से 724 सीटें सामान्य वर्ग के लिए, 140 एससी और 67 एसटी के लिए हैं, लेकिन ओबीसी फिर से शून्य है।
     केंद्र सरकार के नियमावली के अनुसात एससी को 15%,एसटी को 7.5% आरक्षण की संवैधानिक व्यवस्था है।मण्डल कमीशन के तहत ओबीसी को 27% आरक्षण कोटा निर्धारित है।परंतु बर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में कथनी करनी में काफी अंतर है।
      निषाद ने मांग की है कि एससी/एसटी की ही तरह ओबीसी को नीट में समानुपातिक कोटा की व्यवस्था हो।कहा,जब एससी व एसटी को जनसँख्या अनुपाती कोटा है तो ओबीसी को क्यों नहीं?कहा कि केन्द्र सरकार ओबीसी की जाति आधारित व वर्गीय जनगणना कराने से आखिर कन्नी क्यों काटती है?
          *चौ.लौटनराम निषाद*
प्रदेश अध्यक्ष-वीआईपी उत्तर प्रदेश
9415761409/8182822805

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