C.M. Adityanath ने Asaduddin Owaisi को देश का बड़ा नेता क्यों बताया, - Ideal India News

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C.M. Adityanath ने Asaduddin Owaisi को देश का बड़ा नेता क्यों बताया,

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C.M. Adityanath ने Asaduddin Owaisi को देश का बड़ा नेता क्यों बताया,

 Adarsh pandey


नई दिल्ली:- बीजेपी के कार्यकर्ता उनकी चुनौती स्वीकार करते हैं. दरअसल AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी का एक वीडियो सामने आया था जिसमें वो कह रहे थे कि इस बार यूपी में योगी को सीएम नहीं बनने देंगे. ओवैसी की इसी चुनौती को स्वीकार करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बीजेपी 300 से ज्यादा सीटें यूपी में जीतेगी.

ओवैसी सपा का कर सकते हैं नुकसान

सपा यह दावा कर रही है कि 2022 में बीजेपी का मुकाबला सिर्फ समाजवादी पार्टी ही कर रही है. लेकिन ओवैसी यूपी में अपनी सियासी जमीन तलाश रहे हैं. अगर ओवैसी 100 सीटों पर चुनाव लड़ते हैं तो सपा के वोट बैंक को नुकसान हो सकता है और इसका सीधे तौर पर फायदा बीजेपी को ही मिलेगा.

BJP चाहती है कि ओवैसी UP में चर्चा का विषय बनें

योगी के इस बयान से ओवैसी की स्वीकार्यता मुस्लिमों में बढ़ सकती है और शायद इसीलिए योगी ने ओवैसी के चैलेंज को भी स्वीकार किया. अगर यूपी में ओवैसी पूरे दमखम के साथ चुनाव लड़ते हैं तो सपा के मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लग सकती है. इसी का फायदा उठाने की तैयारी में बीजेपी भी दिख रही है. इसीलिए बीजेपी के तमाम छोटे-बड़े नेता इन दिनों ओवैसी पर हमला बोलते नजर आ रहे हैं, ताकि ओवैसी यूपी में चर्चा का विषय बने रहें.

ओवैसी की दाल बंगाल में नहीं गल पाई

पश्चिम बंगाल के मुसलमान वोटर एकतरफा ममता बनर्जी के साथ गए. मुस्लिम मतों के एकतरफा ध्रुवीकरण की वजह से ही ममता बनर्जी की बंगाल में पूर्ण बहुमत की सरकार बनी.

BSP और कांग्रेस इस बार लड़ाई से बाहर? 

पश्चिम बंगाल के बाद अगर यूपी का मुस्लिम एक साथ समाजवादी पार्टी के साथ जाता है तो कई सीटों पर सपा की जीत आसान हो जाएगी, खासतौर पर पूर्वांचल के इलाके में. क्योंकि बंगाल के बाद यह माना जा रहा है कि मुस्लिम मतदाता उसी पार्टी को वोट करेगा जो बीजेपी को हराता हुआ दिखेगा. फिलहाल यूपी में समाजवादी पार्टी ही हर सीट पर बीजेपी से लड़ती हुई नजर आ रही है. बीएसपी और कांग्रेस इस बार लड़ाई से बाहर नजर आ रहे हैं. ऐसे में अगर ओवैसी 100 सीटों पर चुनाव लड़ते हैं तो वो यूपी की मुस्लिम बाहुल्य सीटों पर ही चुनाव लड़ेंगे और ओवैसी के अधिकतर प्रत्याशी भी मुस्लिम हो सकते हैं. ऐसी स्थिति में सपा के मुस्लिम वोट बैंक को क्या ओवैसी नुकसान पहुंचाने में सफल हो पाएंगे? यह बड़ा सवाल है. वहीं सपा को यह लगता है कि बीजेपी विरोध का सारा वोट उसे ही मिलेगा, क्योंकि वो बंगाल की तर्ज पर मुख्य तौर पर बीजेपी के विपक्ष में है.

2017 में भी AIMIM कई सीटों पर चुनाव लड़ी 

 2022 का चुनाव पहला मौका नहीं होगा जब औवेसी यूपी में अपनी पार्टी को लड़ाने आ रहे हैं. इससे पहले कई चुनावों में ओवैसी यूपी में अपनी पार्टी को लड़ा चुके हैं. 2017 के विधान सभा चुनाव में भी AIMIM कई सीटों पर चुनाव लड़ी थी. लेकिन किसी भी सीट पर जीत हासिल नहीं हुई थी, ये जरूर है कि एक-दो सीटों पर सपा के वोट जरूर काटते हुए नजर आई.

2017 में सपा को पहुंचाया नुकसान 

AIMIM पश्चिमी यूपी के मुरादाबाद, संभल, अमरोहा, बिजनौर, कैराना, सहारनपुर जैसे मुस्लिमों बाहुल्य इलाकों से विधान सभा चुनाव लड़ी थी. मुरादाबाद की कांठ विधान सभा सीट पर सपा हार गई और बीजेपी जीत गई. इसके पीछे AIMIM को मिले वोट सबसे बड़ा कारण हैं. 2017 के विधान सभा चुनाव में मुरादाबाद की कांठ विधान सभा से AIMIM को 22908 वोट मिले थे और यह सीट सपा सिर्फ 3000 वोटों से ही हारी थी, यानि अगर AIMIM के प्रत्याशी को इतने वोट नहीं मिलते तो यहां बीजेपी का जीतना मुश्किल था. वहीं संभल में AIMIM को सबसे ज्यादा 59,336 वोट मिले थे लेकिन इस सीट पर सपा के इकबाल महमूद ही जीत गए थे.



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