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दो लहरों से मुक्ति दिला, तीसरी का मुकाबला करने में सक्षम बनाकर जा रहे,

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दो लहरों से मुक्ति दिला, तीसरी का मुकाबला करने में सक्षम बनाकर जा रहे,डॉ राकेश कुमार संयुक्त निदेशक, स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय लखनऊ के पद पर हुए पदोन्नत जनपद की नई सीएमओ डॉ जीएसवी लक्ष्मी ने संभाली जिम्मेदारी

Adarsh pandey



जौनपुर, 17 जुलाई 2021। 
जौनपुर की नई मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ जीएसवी लक्ष्मी ने शनिवार को अपनी जिम्मेदारी संभाल ली। वहीं निवर्तमान सीएमओ डॉ राकेश कुमार पदोन्नत होकर संयुक्त निदेशक, स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय लखनऊ के पद पर 20 जुलाई को ज्वाइन करेंगे। 15 जून 2020 को बतौर सीएमओ जौनपुर उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के मुखिया  का पद संभाला था। तब जनपद कोविड-19 की प्रथम लहर के प्रभाव में था। उनके कार्यकाल में ही दूसरी लहर आई जबकि तीसरी लहर आने की आशंका है। दोनों लहरों पर उन्होंने भरपूर विजय पा ली है और तीसरी लहर से लड़ने के लिए भरपूर संसाधन तैयार कर चुके हैं।  
   कोविड की तीसरी लहर में बच्चों के प्रभावित होने की आशंका है जिसका सामना करने के लिए जिले के सभी प्रख्यात बाल रोग विशेषज्ञों के साथ बैठक कर तैयारी की जा रही है। सीएमओ डॉ राकेश कुमार का कहना है कि इसके लिए बाल रोग विशेषज्ञ के चिकित्सालयों को चिह्नित कर लिया गया है। वहां व्यवस्था सुदृढ़ की जा रही है। ज्यादा से ज्यादा लोगों का टीकाकरण कराने की तैयारी हो रही है जिससे संक्रमण फैलने की आशंका कम से कम रहे। सरकारी चिकित्सालयों को बच्चों के दृष्टिकोण से भी तैयार किया जा रहा है। इसके लिए सरकारी तथा निजी चिकित्सालयों में पीडियाट्रिक आईसीयू तैयार किया जा रहा है।  

तीसरी लहर का सामना करने के लिए पांच अस्पतालों में पीडियाट्रिक इंटेसिव केयर यूनिट (पीकू), एक सिक न्यू बार्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) और न्यू नेटल इंटेसिव केयर यूनिट (नीको) तैयार किया जा रहा है। निजी अस्पतालों में 14 नीको और दो पीकू तैयार किए गए हैं। नीको में कुल 50 बेड की सुविधा है जबकि पीको में 112 बेड की सुविधा है। जिला अस्पताल में पीकू के 40 बेड हैं, सतहरिया, बदलापुर, शाहगंज और केराकत में 12-12 बेड सहित सरकारी में कुल 88 बेड हैं जबकि निजी अस्पतालों में 24 बेड हैं। इस तरह से पीकू के तहत इलाज के लिए जिले में 112 बेड की व्यवस्था है। वहीं नीको के तहत इलाज के लिए जिले में 50 बेड की व्यवस्था है जिसमें से 40 बेड निजी और 10 बेड सरकारी अस्पताल में हैं। जिला महिला चिकित्सालय में एसएनसीयू के लिए 10 बेड की व्यवस्था है। 

   उल्लेखनीय है कि कोरोना की पहली लहर में पहला केस 23 मार्च 2020 को मिला था। उसके दो माह बाद ही उन्होंने 15 जून को डॉ राकेश कुमार ने जौनपुर ज्वाइन किया। उस समय जिले के स्वास्थ्य विभाग के पास इतनी मूलभूत सुविधाएं नहीं थीं। उसी समय चार लाख के करीब प्रवासी मजदूर महाराष्ट्र, गुजरात आदि स्थानों से विभिन्न तहसीलों के ग्रामीण क्षेत्रों में लौटे। संक्रमण फैलने से रोकने के लिए इनके लिए कोरेंटाइन सेंटरों की व्यवस्था की गई। स्कूलों-कालेजों में कोरेंटाइन सेंटर बनाकर इन्हें ठहराया गया। पूर्वांचल विश्वविद्यालय में एल-1 कोरोना केयर सेंटर बना कर लक्षण वाले मरीजों को भर्ती कराया गया। मरीजों की संख्या बढ़ी तो पं. दीन दयाल उपाध्याय आश्रम पद्धति स्कूल मटियारी में 285 बेड के एल-1 हास्पिटल की व्यवस्था की गई। ट्रामा सेंटर हौजखास में 30 बेड तथा रेहटी जलालपुर में 50 बेड का एल-2 हास्पिटल विकसित किया गया। सक्षम मरीजोंं के लिए उत्सव पैलेस होटल में एल-1 अस्पताल की व्यवस्था उपलब्ध कराई गई। एमसीएच विंग में 20 बेड का आईसीयू तथा 80 आइसोलेशन बेड तैयार कर एल-2 अस्पताल चालू कराया गया। सतत निगरानी और जांच से कोविड मरीजों की संख्या बढ़ने नहीं दी गई। उस समय मरीजों की संख्या 6,846 तक पहुंच चुकी थी लेकिन समुचित इलाज की व्यवस्था होने से मात्र 100 की ही मौत हुई। 

   दूसरी लहर में आई जिसपर नियंत्रण करने में अनुभव काम आया। दूसरी लहर 28 मार्च 2021 से शुरू हुई। 31 मार्च को एकाएक 40 कोविड मरीजों का पता चला। 16 अप्रैल को एकाएक 724 मरीज मिल गए। 23 अप्रैल को 1124 मरीज एक दिन में मिल गए। इन मरीजों के लिए एमसीएच विंग में 100 बेड के एल-2 अस्पताल की व्यवस्था कराई गई। मटियारी में 285 बेड का एल-1 हॉस्पिटल तैयार कराया गया। कोविड मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ ही आक्सीजन की भी मांग बढ़ने लगी। उस समय कम आक्सीजन लेवल (70, 80, 90) के मामले ज्यादा आने लगे। जौनपुर में द्रव (लिक्विड) आक्सीजन का कोई प्लांट नहीं था लेकिन 200 से 250 आक्सीजन के बड़े सिलेंडर की आवश्यकता थी। जिसे जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा के सहयोग से चंदौली, मिर्जापुर, आजमगढ़, बनारस, अम्बेडकर नगर में स्थापित आक्सीजन प्लांट से आपूर्ति सुनिश्चित कराई गई। जिले के पांच सरकारी एल-2 अस्पताल तथा 10 निजी एल-2 अस्पताल में जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा के सहयोग से आक्सीजन के निर्बाध आपूर्ति की व्यवस्था कराई गई।  दूसरी लहर के दौरान कई ऐसे मामले सामने आए जिसमें मरीज पैथोलॉजी की जांच में निगेटिव निकले लेकिन सिटी स्कैन में कोविड-19 के लक्षण मिले। इनके लिए जिला पुरुष चिकित्सालय में अलग से 84 बेड का आरक्षित कोविड अस्पताल बनाकर इलाज कराया गया। दूसरी लहर में अब तक जिले के 15,708 रोगियों का पता चला जिसमें से 133 की मौत हुई थी। इस तरह से पहली और दूसरी लहर में अब तक 22,555 रोगियों का पता चल चुका है जबकि दोनों लहर में 233 रोगियों की मौत हुई है। इस समय पॉजिटिविटी का रेट शून्य प्रतिशत है। जिले में कुल सक्रिय रोगी 10 हैं। कोविड का कोई भी रोगी जिले के अस्पतालों में भर्ती नहीं है।

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