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गुप्त नवरात्र में संतोषी माता का पूजन लाभदायक : श्री जगतगुरु

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गुप्त नवरात्र में संतोषी माता का पूजन लाभदायक : श्री जगतगुरु

आपके जीवन की सारी समस्याएं दूर हो सकती हैं



 पुराणों में भी लिखा है कि गुप्त नवरात्रि का पूजन देवी मां सहर्ष स्वीकार करती हैं।
 नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की जाती है। इस साल गुप्त नवरात्रि पिछले रविवार 11 जुलाई, 2021 से शुरू हुआ है। वर्ष में कुल मिलाकर चार नवरात्रि आती हैं। मुख्य रूप से चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रों के बारे में सभी जानते हैं। लेकिन इनके अलावा दो और भी नवरात्रि हैं जिनमें विशेष कामनाओं की सिद्धि की जाती है। माघ गुप्त नवरात्रि और आषाढ़ गुप्त नवरात्रि। यह है आषाढ़ गुप्त नवरात्रि।
 हरियाणा के सोनीपत तालुका के कुंडली में स्थित श्री श्री संतोषी बाबा आश्रम के श्री श्री संतोषी बाबा उर्फ ​​श्री जगतगुरु कहते हैं, “महामारी संकट के दौरान लोगों को भय और तनाव को दूर करने के लिए इस गुप्त नवरात्रि में संतोषी माता की पूजा करें। पुराणों में भी लिखा है की गुप्त नवरात्रि का पूजन देवी मां सहर्ष स्वीकार करती हैं। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से आषाढ़ की गुप्त नवरात्रि शुरू होती है। इस बार आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि 11 जुलाई 2021 दिन रविवार से शुरू होकर 18 जुलाई 2021 दिन रविवार को समाप्त होगी।
 श्री जगतगुरु देवी संतोषी माता (मां दुर्गा) के अनन्य भक्त हैं। वह इस गुप्त नवरात्रि का महत्व बताते हैं। चूंकि गुप्त नवरात्रि है तो इस दौरान मां दुर्गा की पूजा गुप्त तरीके से की जाती है। इसमें विशेष तरह की इच्छापूर्ति तथा सिद्धि प्राप्त करने के लिए पूजा और अनुष्ठान किया जाता है। माना जाता है कि इस दौरान मां की पूजा करने से आपके जीवन के सभी संकटों का नाश होता है। इसमें विशेष तरह की इच्छापूर्ति तथा सिद्धि प्राप्त करने के लिए पूजा और अनुष्ठान किया जाता है।“
 सृष्टि के आरंभ से ही शक्ति आराधना का क्रम प्रारंभ हो गया या यूं कहें की शक्ति की आराधना से ही यह सृष्टि प्रारंभ हुई। भारतीय संस्कृति में चित्त की शुद्धि एवं भावों की शुद्धि के साथ स्वास्थ्य ठीक - ठीक रखने के लिए तिथि, त्यौहार एवं पर्वों का विधान है। इस कारण नवरात्रि उपासना का विशेष महत्व है। इसमें पूजा आराधना, दर्शन आदि से चित्त एवं भावों की शुद्धि की जाती है तथा व्रत से शरीर का शोधन किया जाता है। अन्नमय कोश से साधना की आनंदमय कोश तक की यात्रा को निर्विघ्न संपन्न करने में भी नवरात्रि उपासना अपना विशेष महत्व रखती है। शक्ति आराधना की परंपरा में आद्यशक्ति भगवती दुर्गा के प्राकृतिक कठिन रहस्य को समझाया गया है। मंत्र, तंत्र और यंत्र तीनों विधियां हैं शक्ति उपासना में।
 श्री जगतगुरु आगे कहते हैं, “गुप्त नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा पूजा-अर्चना तथा अराधना करते समय विशेष बातों का ध्यान रखा चाहिए। सुबह और शाम  नियमित रूप से मां दुर्गा की पूजा करें और किसी को बिना बताए गुप्त रूप से मां की पूजा की जानी चाहिए। गुप्त नवरात्रों में गुप्त रूप से मां दुर्गा और उनके रूपों की पूजा की जाती है।
 गुप्त नवरात्रि के पहले दिन मां काली की पूजा होती है। इसके अलावा, तारा देवी, त्रिपुरा सुंदरी, भुवनेश्वरी, मां चित्र मस्ता और मां त्रिपुर भैरवी की पूजा की जाती है। मां के अलग-अलग रूप हैं जैसे मां धूमावती, मां बगलामुखी, मां मातंगी और मां कमला देवी की पूजा अंतिम नवरात्रि के दिन की जाती है।
 शास्त्रों में कहा है कि लौकिक एवं अलौकिक दोनों सुख प्राप्त होते हैं शक्ति की आराधना से 'कलौ‌ चंडी विनायकौ' अर्थात कलयुग में चंडी एवं गणपति की उपासना सभी प्रकार का फल देने वाली है। कुछ वर्षों से प्रायः यह देखने में आ रहा है कि लोग नवरात्रि उपासना को केवल नौ रूपों की उपासना मान बैठे हैं, लेकिन भगवती आदिशक्ति दुर्गा अपनी समग्र शक्तियों को नौ रूपों के में लिए हुए पृथ्वी पर प्रत्यक्ष फलदाई होकर उतर आती है।
 दुर्गा सप्तशती तथा मार्कंडेय पुराण में माँ दुर्गा के प्रथम, मध्यम और उत्तर तीन चरित्र कहे गए हैं। नवरात्रि उपासना नव दुर्गा के प्रत्यक्ष दर्शन हैं इसलिए महर्षि मार्कंडेय इन्हें नव मूर्तियों के रूप में नव शक्तियां बताकर आराधना करने को कहते हैं, शक्ति उपासना एवं सनातन वैदिक धर्म में आस्था इन  नवरात्रों में मां को प्रसन्न करने के लिए विशेष आराधना करते हैं।
आषाढ़ मास के गुप्त नवरात्रि के लिए घट स्थापना का शुभ समय था रविवार 11 जुलाई 2021, सुबह 5:31 से 7:47 (कुल अवधि 02 घंटे 16 मिनट)

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