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मझवार, तुरैहा, गोंड, खरवार, बेलदार के साथ भाजपा सरकार कर रही है सामाजिक अन्याय

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मझवार, तुरैहा, गोंड, खरवार, बेलदार के साथ भाजपा सरकार कर रही है सामाजिक अन्याय

हरिओम सिंह स्वराज लखनऊ

आरक्षण की मांग को लेकर ३१अगस्त से एन एफ ए एवं वीआईपी करेगा धरना- प्रदर्शन



लखनऊ। राष्ट्रीय निषाद संघ के राष्ट्रीय सचिव चौधरी लौटन राम निषाद ने केन्द्र व प्रदेश सरकार पर मझवार, तुरैहा, गोंड, खरवार, बेलदार, पासी तड़माली के साथ नाइंसाफी का आरोप लगाते हुए कहा है कि भाजपा सरकार में इन जातियों का बड़े पैमाने पर शोषण व उत्पीड़न किया जा रहा है। संवैधानिक अधिकारों से वंचित किया जा रहा है।उन्होंने कहा है कि जब चमार की सभी पर्यायवाची जातियों, उपजातियों-मोची, कुरील, दबकर, दोहरे, दोहरा, चमकाता, कबीररपंथी, भगत,रविदासिया, रैदासी,शिवदसिया, नीम, पीपैल, कर्दम, धुसिया, झुसिया, उतरहा, दखिनहा, जाटवी,जटीवा,भगत,अहिरवार,शंखवार,रैदासी आदि को चमार या जाटव के नाम से प्रमाण-पत्र जारी किया जाता है तो मझवार की पर्यायवाची मानी गयी जातियों को मझवार का जाति प्रमाण-पत्र क्यों नहीं? उन्होंने इसे संविधान के अनुच्छेद-14 का उल्लंघन बताया है।
   निषाद ने मझवार,बेलदार,तुरैहा, गोंड़,शिल्पकार, पासी तड़माली को परिभाषित करने की माँग करते हुए उन्होंने कहा है कि केंद्र व उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 17  अतिपिछड़ी निषाद, मछुआ,मल्लाह,केवट,बिन्द, धीवर, तुराहा,गोड़िया, रैकवार,मांझी,कहार, राजभर,कुम्हार जातियों को अनुसूचित जाति का आरक्षण देने सम्बन्धी प्रस्ताव को वापस लेने के विरुद्ध राष्ट्रीय निषाद संघ 31 अगस्त को जीपीओ पार्क लखनऊ में धरना प्रदर्शन करेगा।इसके बाद सभी जिला मुख्यालयों पर विकासशील इंसान पार्टी द्वारा धरना प्रदर्शन किया जाएगा।
         निषाद ने बताया कि आरक्षण नीति लागू होने से पूर्व मझवार व मांझी को परस्पर पर्यायवाची माना गया है। मध्य प्रदेश ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट छिंदवाड़ा के अनुसार मांझी, मझिया व मझवार को एक माना गया है। इन्हें बोटमैन, फेरीमैन व फिशरमैन मान्य किया गया है। मांझी का आमजन भी अर्थ मल्लाह, केवट, नाविक, मछुआ से लगाते हैं। सेन्सस ऑफ इण्डिया-1961 फॉर यूपी मैनुअल पार्ट-1 के अनुसार उत्तर प्रदेश की अनुसूचित जाति मझवार की पर्यायवाची/वंशानुगत जाति मल्लाह, मांझी, केवट, राजगौड़, गोड़ मझवार, मुजाबिर को माना गया है। इसी सेन्सस के क्रमांक-24 पर अंकित जाटव, चमार,धूसिया, झूसिया की पर्यायवाची जाटवी, जटीवा, दबकर, रैगर, मोची, कुरील, भगत, रैदासी, रविदसिया, शिवदसिया, नीम, पिपैल, कर्दम, दोहरा, दोहर, दोहरे, चमकाता, उतरहा, दखिनहा, अहिरवार, कबीरपंथी आदि का उल्लेख है।
इन पर्यायवाची उपजातियों को राजस्व अधिकारियों द्वारा निर्बाध रूप से चमार या जाटव का प्रमाण-पत्र निर्गत किया जाता है। लेकिन जब कोई मझवार,तुरैहा, गोंड़, खरवार, बेलदार, तड़माली, शिल्पकार का जाति प्रमाणपत्र मांगता है, तो मल्लाह, केवट, माँझी, बिन्द, गोड़िया, धीवर,धीमर, कहार, कमकर,राजभर,कुम्हार आदि कहकर आवेदन निरस्त कर दिया जाता है।    
      निषाद ने कहा कि दूबे, द्विवेदी, चौबे, चतुर्वेदी, पाण्डेय, मिश्रा, शुक्ला, उपाध्याय, तिवारी, त्रिपाठी, त्रिवेणी, पाठक, ओझा, झा, अग्निहोत्री,चटर्जी, बनर्जी, मुखर्जी, चट्टोपाध्याय, मुखोपाध्याय, बंद्योपाध्याय, कुलकर्णी, जोशी आदि को ब्राम्हण ही कहा जाता है। आमजन इन्हें ब्राह्मण ही कहेगा, बतायेगा न कि चमार, जाटव, खटिक, निषाद, पासी,यादव या बाल्मिकी आदि। उन्होंने कहा कि आम जन मल्लाह, मांझी, केवट, निषाद, मछुआ आदि को निःसंदेह एक मानतें हैं। भारत की जनगणना के अनुसार उत्तर प्रदेश की डिप्रेस्ड क्लास की जातियों की 1931 की रिपोर्ट में मझवार (मांझी) का उल्लेख है। 1901 में भी धीवर, केवट, मांझी को मझवार की समाविष्ट जाति माना गया है।
      उन्होंने केन्द्र सरकार से मझवार, तुरैहा, गोंड़, शिल्पकार, पासी तड़माली,बेलदार की पर्यायवाची जातियों को सामाजिक न्याय दिलाने के लिए बिल पेश किये जाने की मांग किया है।निषाद ने कहा कि हम नए सिरे से अनुसूचित जाति में शामिल करने की नहीं,बल्कि राष्ट्रपति की प्रथम अधिसूचना जो 10 अगस्त,1950 को जारी की गई,उसमे सूचीबद्ध मझवार,तुरैहा, गोंड को परिभाषित करने की मांग कर रहा हूं।
      निषाद ने कहा कि देश की राजधानी दिल्ली का मल्लाह,ओडिशा का कैवर्ता, जल केऊट, धीवरा,डेवर व पश्चिम बंगाल का मल्लाह,केवट, बिंद, चाई, तियार, झालो मालो, जलिया, कैवर्ता, जल केवट आदि अनुसूचित जाति में हैं तो उत्तर प्रदेश,बिहार,झारखंड का मल्लाह,केवट, बिंद,धीवर आदि क्यों नहीं।उन्होंने कहा_कहा गया भाजपा का वादा,दृष्टि पत्र, फिशरमेन विजन डॉक्यूमेंट व मछुआरा दृष्टि पत्र का संकल्प?
      *चौधरी लौटनराम निषाद*

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