किसानों के लिए वरदान साबित हो रही हैं तेल की बढ़ी हुई कीमतें - Ideal India News

Post Top Ad

किसानों के लिए वरदान साबित हो रही हैं तेल की बढ़ी हुई कीमतें

Share This
#IIN

किसानों के लिए वरदान साबित हो रही हैं तेल की बढ़ी हुई कीमतें


Adarsh pandey


कृषि:- घरेलू रिफाइनिंग उद्योग खत्म हो जाएगा और इसका किसानों पर गंभीर असर पड़ेगा. विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने 8 जनवरी, 2020 से आरबीडी पामोलिन और आरबीडी पाम तेल के आयात को ‘प्रतिबंधित सूची’ के तहत रखा था.

खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री पीयूष गोयल को लिखे पत्र में, एसईए अध्यक्ष अतुल चतुर्वेदी ने कहा “आरबीडी पामोलिन और आरबीडी पाम तेल के आयात को स्वतंत्र रूप से अनुमति देने से गंभीर परिणाम होंगे. घरेलू रिफाइनरी और किसान दोनों पर इसका गहरा प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि इससे घरेलू तिलग हन की कीमतें प्रभावित होगी. रिफाइंड तेल का आयात निश्चित रूप से उद्योको दिवालियेपन के कगार पर पहुंचा देगा. वर्ष नवंबर-अक्टूबर 2018-19 के दौरान आरबीडी पामोलिन का आयात 27.3 लाख टन से गिरकर 2019-20 की इसी अवधि में 4.21 लाख टन हो गया. वर्ष 2020-21 के नवंबर-मई के दौरान मुश्किल से 21,000 टन तेल भारत में आया.

पिछले डेढ़ साल में रिफाइंड पाम तेल को प्रतिबंधित सूची में रखने के फैसले से उद्योग में अधिक निवेशकों को प्रोत्साहन मिला है. उन्होंने कहा कि आयात को स्वतंत्र रूप से अनुमति देने का सरकार का हालिया फैसला निवेशकों को गलत संकेत देगा

कैसे प्रभावित होंगे घरेलू उद्योग

यह इंडोनेशियाई रिफाइनर को अतिरिक्त लाभ देता है, जो सीपीओ से भी कम कीमत पर आरबीडी पामोलिन और आरबीडी पाम तेल बेचते हैं. इससे घरेलू रिफाइनरियां गंभीर रूप से प्रभावित होंगी. मलेशिया में सीपीओ पर निर्यात शुल्क 90 डॉलर प्रति टन है, जबकि रिफाइंड पाम तेल पर निर्यात शुल्क शून्य है.

उन्होंने कहा कि डीजीएफटी अधिसूचना शून्य शुल्क पर SAFTA समझौते के तहत नेपाल और बांग्लादेश से परिष्कृत तेलों के आयात के लिए दरवाजा खोल देगी. इसकी वजह से बाजार में तबाही मच जाएगी. क्योंकि घरेलू उत्पादक शून्य शुल्क पर आयातित इन तेलों के साथ प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम नहीं होंगे.

किसानों के लिए वरदान साबित हुई कीमतें

उन्होंने कहा कि इससे निश्चित रूप से आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार और भारत में खाद्य तेलों की कीमतों में नरमी आएगी और यह स्पष्ट है कि पिछले दो महीनों में अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय दोनों कीमतों में पहले ही 25 प्रतिशत की गिरावट आई है.

अतुल चतुर्वेदी ने कहा कि तेल की बढ़ती कीमतें एक तरह से वरदान रही हैं. इसकी वजह से निश्चित रूप से किसान तिलहन की खेती के तरफ आकर्षित होंगे. 






No comments:

Post a Comment

Post Bottom Ad