जानिए क्या है विवस्त सप्तमी का पर्व, इस दिन सूर्यदेव की पूजा क्यो करते है, - Ideal India News

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जानिए क्या है विवस्त सप्तमी का पर्व, इस दिन सूर्यदेव की पूजा क्यो करते है,

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जानिए क्या है विवस्त सप्तमी का पर्व, इस दिन सूर्यदेव की पूजा क्यो करते है,

Adarsh pandey


धर्म-कर्म:》》 सूर्य पूजा से मिलता है लाभ
सुबह उगते हुए सूर्य को प्रणाम करने या जल चढ़ाने से मन में आत्मविश्वास बढ़ता है एवं सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। सप्तमी तिथि पर सूर्य को जल चढ़ाने और पूजा करने से रोग दूर होती हैं। भविष्य पुराण में श्रीकृष्ण ने अपने पुत्र को सूर्य पूजा का महत्व बताया है। श्रीकृष्ण ने कहा है कि सूर्य ही एक प्रत्यक्ष देवता हैं। यानी ऐसे भगवान हैं जिन्हें रोज देखा जा सकता है।

सूर्य उपासना से निरोगी जीवन
सूर्य की रोगशमन शक्ति का उल्लेख वेद , पुराण एवं योगशास्त्र में वर्णित है। इनमें यह भी लिखा है कि आरोग्य सुख हेतु सूर्य की उपासना सर्वथा फलदायी है। सूर्य की रोशनी के बिना जगत में कुछ भी संभव नहीं है । पुराणों के अनुसार इस सप्तमी को जो भी सूर्य देव की उपासना तथा व्रत करते है,उनके सभी रोग ठीक हो जाते हैं ,आज भी सूर्य चिकित्सा का उपयोग आयुर्वेदिक और प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति में किया जाता है। शारीरिक कमजोरी, हड्डियों की कमज़ोरी या जोड़ों में दर्द जैसी परेशानियों में भगवान सूर्य की आराधना करने से रोग से मुक्ति मिलने की संभावना बनती है। सूर्य की ओर मुख करके सूर्य स्तुति करने से त्वचा रोग आदि नष्ट हो जाते हैं व नेत्रज्योति बढ़ती है,ऐसा धर्म ग्रंथों में उल्लेख मिलता है। श्रद्धा के साथ सूर्य पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं एवं इनकी पूजा से दिव्य ज्ञान की प्राप्ति होती है।

पूजा विधि
सुबह सूर्योदय से पहले उठकर  स्नान करें और उसके बाद तांबे के लोटे में जल भरें और उसमें लाल चन्दन,चावल, लाल फूल डालकर सूर्यदेव को अर्घ्य दें।जल चढ़ाते समय सूर्य के वरूण रूप को प्रणाम करते हुए ऊं रवये नम: मंत्र का जाप करें। इस जाप के साथ शक्ति, बुद्धि, स्वास्थ्य और सम्मान की कामना करनी चाहिए। इस प्रकार जल चढ़ाने के बाद धूप, दीप से सूर्य देव का पूजन करें। सूर्य से संबंधित चीजें जैसे तांबे का बर्तन, पीले या लाल कपड़े, गेहूं, गुड़, लाल चंदन का दान करें। श्रद्धानुसार इन में से किसी भी चीज का दान किया जा सकता है। इस दिन सूर्यदेव की पूजा के बाद एक समय फलाहार करें।

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