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स्व. डा.तारक नाथ जी की 29 वीं पुण्यतिथि पर आयोजित काव्य गोष्ठी में बही काव्य धारा

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Dr. Pramod Vachaspati


स्व. डा.तारक नाथ जी की  29 वीं पुण्यतिथि पर  आयोजित काव्य गोष्ठी में बही काव्य धारा








जौनपुर, सुप्रसिद्ध चिकित्सक एवं  महान समाजसेवी स्वर्गीय डॉक्टर तारक नाथ जी की 29 वीं पुण्यतिथि  अखिल भारतीय काव्य मंच के मुख्य कार्यालय पर जनपद के प्रमुख विद्वान ़कवियों शायरों की उपस्थिति  में संपन्न हुआ! कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्वांचल विश्वविद्यालय के विधि विभाग के पूर्व डीन डॉ पी सी विश्वकर्मा ने दीप प्रज्वलित करते हुए तथा   स्व.डॉक्टर तारक नाथ जी के चित्र पर माल्यार्पण करते हुए कहा कि स्वर्गीय डॉक्टर साहब एक कुशल चिकित्सक ,महान समाजसेवी  थे !उनका जीवन सादगी भरा था!  वह मृदुभाषी और हंसमुख स्वभाव के व्यक्ति थे! कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पंडित शेषमणि पांडे ने श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए अपनी भावनाओं को व्यक्त किया! इस अवसर पर स्थानीय कवि एवं  शायरों ने बारी बारी से श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए काव्य पाठ किया!










अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ कवि डॉक्टर पी सी विश्वकर्मा ने जब निम्न पंक्तिया पढी तो लोगों ने मुक्त कंठ से सराहा-
" मेरी पलकों पे सितारे ही भले लगते हैं 
तुम कहां मेरे लिए चांद उठा ले आए!! "

मुख्य अतिथि वरिष्ठ कवि पंडित शेषमणि पांडे की रचना को लोगों ने बहुत पसंद किया

" यह भी दीवानापन कम तो नहीं दीवाने का  

  किसी का दर्द हो दिल बेकरार अपना है"

आशुतोष पाल"शोहरत जौनपुरी "की रचना ने काफी तालियां बटोरी

" मैं जो खामोश हूं गनीमत है
 वरना मुंह में जबान है प्यारे!! "

"प्यार" शब्द को अध्यात्म से जोड़ते हुए वरिष्ठ कवि फूलचंद भारती ने अपनी भावनाओं को कविता के माध्यम से कुछ इस तरह से व्यक्त किया! 
प्यार के रास्ते कुछ कठिन है मगर, 
 लोग आए यहां प्यार करते गए!

















समझदारी के फलसफा को  कवि राजेश पांडे ने जब अपनी रचना के माध्यम से व्यक्त किया तो लोग वाहवाही करते रह गए!
 
"समझता है समझ क्या है, समझदारी समझता है"!!

डॉक्टर संजय सिंह" सागर "ने अपने इन पंक्तियों से सबका मन मोह लिया 
आज दरो दीवार में महक सी क्यों है 
लगता है मेरे घर तुम आयी  हो

कवि अमृत प्रकाश  की ये पंक्तियां दिल को  छू लेने वाली थी 
जो बोल दे हर बात उनको क्या पता
 खामोश रहने का मजा ही कुछ और है!!

"तल्ख मेहनाज पुरी" ने अपने रचना के माध्यम से एक बार सबको सोचने पर मजबूर कर दिया!
 
रात को रात कहोगे तो बुरा मानेंगे
 हक की गर बात करोगे तो बुरा मानेंगे

संचालन कर रहे अखिल भारतीय काव्य मंच के संस्थापक डॉ प्रमोद वाचस्पति ने जब माता-पिता के ऊपर अपनी रचनाएं पढ़ी तो सब लोग भाव विभोर हो गए! 


मां की दुआएं हरगिज खाली नहीं जाती, 
 भर जाती इतनी झोली  संभाली नहीं जाती ! 
 मां अपने चार बेटों को पाल लेती है 
बेटों से वही एक मां पाली नहीं जाती!!

काव्य गोष्ठी को ऊंचाइयों पर पहुंचाने के लिए वरिष्ठ रचनाकार रामजीत  मिश्रा, अहमद अजीज,  कारी जिया,   डॉक्टर अंगद कुमार राही,नंदलाल समीर ,मोनिस जौनपुरी आदि ने काव्य पाठ किया! वरिष्ठ एवं उस्ताद शायर, अध्यक्ष अखिल भारतीय काव्य मंच ,असीम मछली शहरी ने सभी आए हुए अतिथियों कवियों एवं शायरों का आभार व्यक्त करते हुए माल्यार्पण करके स्वागत किया! कार्यक्रम का संचालन आयोजक डा प्रमोद वाचस्पति ने किया!

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