पूर्ण क्षमता से नहीं चल सका सालिडवेस्ट मैनेजमेंट प्लांट, - Ideal India News

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पूर्ण क्षमता से नहीं चल सका सालिडवेस्ट मैनेजमेंट प्लांट,

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डा राजेश जैन जौनपुर
पूर्ण क्षमता से नहीं चल सका सालिडवेस्ट मैनेजमेंट प्लांट,



जौनपुर:- नगर पालिका परिषद जौनपुर की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक कुल्हनामऊ का सालिडवेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लंबे अरसे बाद बनकर तैयार हुआ। उद्घाटन भी कर दिया गया। इसके अभी कुछ ही महीने हुए, लेकिन इस पर समय-समय पर ग्रहण लगता जा रहा है। कभी आदमियों की कमी तो कभी तकनीकी गड़बड़ी के कारण प्लांट पूर्ण क्षमता से नहीं चल सका। अब पर्याप्त बिजली न मिलने से पूरी क्षमता से कूड़ा का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। बिजली विभाग के जिम्मेदार इस ओर सुधि नहीं ले रहे हैं। 
 नगर विकास मंत्री आशुतोष टंडन ने 17 मई 2021 को सालिडवेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का उद्घाटन किया था। लंबी जद्दोजहद के बाद प्लांट का निर्माण कार्य पूरा हुआ। रोजाना सौ टन कूड़ा निस्तारण के लिए मशीन को कम से कम 18 घंटे बिजली की आवश्यकता है, जिसके सापेक्ष महज चार से पांच घंटे ही आपूर्ति हो पा रही है। ऐसे में प्लांट की मशीनें नहीं चल पा रही हैं। नगर के समीप कुल्हनामऊ में 10.73 एकड़ भूमि पर इसका निर्माण कार्य सितंबर 2013 में शुरू हुआ। निर्माण 12.39 करोड़ की लागत से शुरू हुआ। इस समय कार्यदाई संस्था सीएंडडीएस की तरफ से निर्माण कार्य जारी है। इसमें पहली किश्त के रूप में 6.20 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। शुरुआत में वर्ष 2016 तक काफी विवाद रहा। इसमें कभी जमीन के विवाद को लेकर कोर्ट का अड़ंगा रहा तो कभी ग्रामीणों का विरोध झेलना पड़ा। कार्यदाई संस्था की तरफ से एटूजेड को ठेके पर काम दिया गया। पहले लेटलतीफी के कारण भी काम में और देरी हुई। हालांकि जैसे-तैसे निर्माण कार्य पूर्ण किया गया। दो दशक तक एटूजेड करेगा प्लांट का संचालन नगर पालिका क्षेत्र से निकलने वाले रोजाना 92 टन कूड़ों का निस्तारण कुल्हनामऊ स्थित सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट में किया जा रहा है। इसके लिए वर्तमान में ठेके पर काम करने वाली संस्था एटूजेड ही अगले 20 वर्षों तक पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के आधार पर कार्य करेगी। बोले जिम्मेदार.. रोजाना सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट पर 18 घंटे बिजली की आवश्यकता है, लेकिन चार-पांच घंटे से ज्यादा बिजली आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इससे प्लांट पर कूड़ा निस्तारण में शुरुआत से ही समस्या आ रही है। कूड़ा वैसे ही डंप होता जा रहा है। इसके लिए विद्युत विभाग से कई बार बात की गई, अभी तक समस्या का हल नहीं किया गया।


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