एलोपैथ के अलावा कोरोना से बचाव में होम्योपैथ, एवं आयुर्वेद ज्यादा कारगर है। - Ideal India News

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एलोपैथ के अलावा कोरोना से बचाव में होम्योपैथ, एवं आयुर्वेद ज्यादा कारगर है।

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PatDrSKGuta Satramganj Gzp:



 सेवराई। करोना के संक्रमण के बचाव के लिए देश प्रदेश में कोविशील्ड और को‌वैक्सीन का डोज लगाया जा रहा है। भले ही एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति इसका श्रेय ले रही है लेकिन हकीकत में दोनों वैक्सीन होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति से बनी है देश की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति होम्योपैथिक और आयुर्वेदिक पर ध्यान दिया गया होता तो शायद इतनी मौतें नहीं होती। भदौरा स्थित वाराणसी क्लिनिक एंड रिसर्च सेंटर के प्रबंधक डॉ. संजय कुमार गुप्ता ने कहा कि जो भी वैक्सीन बनी है और लोगों को लगाई जा रही है होम्योपैथिक के सिद्धांत पर बनी है।

सवाल:- क्या एलोपैथ के अलावा होम्योपैथ और आयुर्वेद से कोरोना से बचाव सम्भव है?

जवाब:-  जी बिल्कुल, भारतीय आयुर्वेद बहुत ही पुरानी पद्धति है। इसमें असाध्य से असाध्य रोगों से निजात दिलाने में मदद मिलती है। एलोपैथ के अलावा कोरोना से बचाव में होम्योपैथ, एवं आयुर्वेद ज्यादा कारगर है।



सवाल- कोरोना पॉजिटिव व्यक्ति को क्या करना चाहिए ?
जवाब:- सबसे पहले तो खुद को होम आइसोलेट करते हुए सामाजिक दूरी नियमो का पालन करते हुए नियमित व्यायाम और खान पान पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

सवाल:- होम्योपैथ में कोरोना से इलाज के लिए कोई दवा है?
जवाब:- होम्योपैथ में कई ऐसी दवाएं है जो कोरोना के शुरुआती लक्षण मिलने पर अगर इस्तेमाल की जाए तो इसे जड़ से खत्म करती है। बल्कि लोगो को लगाया जाना वाला टिका कोविशिल्ड व कोवैक्सिन भी होम्योपैथ पद्धति के द्वारा ही बनाया गया है।

सवाल:- कोरोना के लक्षण क्या है?
जवाब :-  कोरोना संक्रमित व्यक्ति को गला सुखना, बदन में दर्द, और सांस फूलना आदि लक्षण मिलने पर उन्हें तुरंत खुद को होम आइसोलेट करते हुए चिकित्सीय परामर्श लेना चाहिए। और कोरोना टेस्ट कराते हुए उचित एहतियात बरतने चाहिए।

डॉ गुप्ता ने क्षेत्रीय लोगों से अपील करते हुए समाज के बुद्धिजीवी वर्ग वैक्सीन लगवाने के लिए गांव वासियों को प्रोत्साहित करें उन्हें बताएं की वैक्सीन लगवाने से कोई नुकसान नहीं होने वाला है 
कोरोना का स्थाई बचाव वैक्सीन ही है
 

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