कोविड महामारी के प्रकोप को रोकने में संजीवनी परियोजना बनी मिसाल। - Ideal India News

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कोविड महामारी के प्रकोप को रोकने में संजीवनी परियोजना बनी मिसाल।

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करनाल, हरियाणा (रजत शर्मा)। उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने कहा कि कोविड महामारी के प्रकोप को रोकने में संजीवनी परियोजना मिसाल बनी है। जिला प्रशासन की अनूठी पहल से कोविड मरीजों का रिकवरी रेट करीब 98 प्रतिशत हो गया है। प्रशासन द्वारा 6 कम्पोनेंट के माध्यम से अधिकांश कोविड मरीज अपने घर पर ही स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाकर कोविड को हराने में कामयाब रहे हैं। यूं कहिए कि करनाल जिला ने स्वस्थ करनाल-बनेगा मिशाल की थीम को चरितार्थ किया है।

बता दें कि कोविड को हराने के लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल की प्रेरणा से करनाल जिले में कोविड मरीजों को विभिन्न माध्यमों के द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ दिया जा रहा है। इन सुविधाओं को और आगे बढ़ाते हुए जिला प्रशासन ने संजीवनी परियोजना की शुरूआत की थी, जिसे जिला प्रशासन ने डिलोयट इंडिया के सहयोग से आगे बढ़ाया है। इस परियोजना में 6 बिंदुओं पर काम किया गया है। इनमें टेली कन्सलटेशन, होम केयर किट, फील्ड अस्पताल, लैब टैस्ट फॉर होम आईसोलेटिड पेशेंट, एएलएस एम्बुलैंस, इंटिग्रेटिड कमांड एंड कंट्रोल सैंटर शामिल हैं।

प्रशासन द्वारा टेली कन्सलटेशन के लिए केसीजीएमसी के 200 एमबीबीए छात्रों को प्रशिक्षण के उपरांत होम आईसोलेशन में रह रहे कोविड मरीजों के स्वास्थ्य की देखभाल का जिम्मा दिया गया। एक छात्र द्वारा 25 मरीजों की दिन में दो बार फोन करके स्वास्थ्य की जानकारी ली गई। संजीवनी परियोजना के तहत ग्रामीण क्षेत्र में होम आईसोलेट रह रहे कोरोना के मरीजों के स्वास्थ्य के लिए किटें तैयार की गई थी। 

इन किट में एक ऑक्सीमीटर, डिजिटल थर्मामीटर, स्टीमर, थ्री लेयर मास्क, आयुष क्वाथ, गिलोय घनवटी, अणु तेल, ओआरएस तथा कोरोना बीमारी से संबंधित जानकारी से भरपूर बुकलेट सहित एलोपैथी व आयुर्वेदिक दवाइयां के साथ कुल 15 आईटमें शामिल हैं। परिणामस्वरूप यह सभी किटें होम आईसोलेट हो रहे मरीजों को वितरित की गई।
संजीवनी परियोजना के तहत 9 फील्ड अस्पताल बनाए गए।

 जिला स्तर पर हीना बैंक्वेट हॉल में 100 बैड का अस्पताल बनाया गया, फील्ड की 8 सीएचसी में 116 बैड की सुविधा दी गई और सभी बैडों पर ऑक्सीजन सप्लाई कन्सनट्रेटर के माध्यम से दी गई, जिससे केसीजीएमसी में मरीजों का दबाव कम हुआ और मरीजों को उनके घर द्वार पर ही ईलाज संभव हो सका। परियोजना के तहत होम आईसोलेटिड मरीजों का हिन्दुस्ताल वैलनेस लैब द्वारा 2500 टैस्ट प्रतिमाह करवाए गए जिनमें मरीज का सीबीसी, ब्लड शुगर, सीआरपी टैस्ट शामिल रहा। 


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