शतकीय गोष्ठी की ओर बढ़ते "काव्य सृजन परिवार"की ९८वीं मासिक काव्य गोष्ठी - Ideal India News

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शतकीय गोष्ठी की ओर बढ़ते "काव्य सृजन परिवार"की ९८वीं मासिक काव्य गोष्ठी

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Dr Pramod vachaspati jaunpur

💥शतकीय गोष्ठी की ओर बढ़ते "काव्य सृजन परिवार"की  ९८वीं मासिक काव्य गोष्ठी 💥

     रा.सा.सा.व सांस्कृतिक संस्था काव्यसृजन की मासिक काव्य गोष्ठी मुख्य अतिथि मोतीलाल जी बजाज के मुख्य आतिथ्य एवम  विशिष्ठ अतिथि डॉ प्रमोद वाचस्पति की गरिमामय उपस्थिति में रविवार को ऑनलाइन सम्पन्न हुईं




      डॉ श्रीहरि वाणी व हौंसिला प्रसाद अन्वेषी जी के मार्गदर्शन में पं. शिवप्रकाश जौनपुरी ने आयोजन का संचालन किया   इस आयोजन की अध्यक्षता पं.श्रीधर मिश्र जी ने की|
      कवि - साहित्यकारों के अतिरिक्त अच्छी - खासी संख्या में श्रोताओं ने भी लगभग साढ़े तीन घण्टे तक पूरे समय उपस्थित रहकर इस आनंदमयी संध्या का आनंद लिया,जिसमें प्रमुख रूप से छत्तूलाल खुन्टे,ललिता अग्रवाल,सुनील राना,मनोज मिस्त्री,नंदन मिश्र आदि थे|
     आयोजन की शुरुआत शारदा वंदना से हुई|इसके बाद रचनाकारों की विविध विधाओं और विषयों पर आधारित भाँति -  भाँति की रचनाओं द्वारा  रस वर्षा हुई|किसी ने मुक्तक,तो किसी ने गीत,किसी ने गजल तो किसी ने मुकरी,किसी ने कविता द्वारा सबका मनोरंजन किया|इस करोना के अवसाद को भूलकर अपनी रसमय वाणी से आनंदित करने वाले रचनाकार सर्वश्री सौरभ दत्‍ता "जयन्त", विनोद जी जैन , राजीव मिश्र नन्हे,एडवोकेट राजीव मिश्रा,अवधेश विश्वकर्मा "नमन", बीरेंद्र कुमार यादव, गोपाल गुप्ता दहली,डॉ प्रमोद वाचस्पति (सलिल जौनपुरी),सुमन तिवारी,मोतीलाल बजाज,पूजा नाखरे,संजय सिँह,हौसिला प्रसाद अन्वेषी,इंदु मिश्रा,मनीन्द्र सरकार,पवन कुमार मिश्रा,शारदा प्रसाद दुबे,शशिकला कालकर,श्रीकृष्ण कालकर,डॉ श्रीहरि वाणी,श्रीधर मिश्र,अरुण दीक्षित,,राजेश सिँह ,आनंद पाण्डेय केवल,प्रतिभा त्रिपाठी,आनन्द पाण्डेय "केवल" ,सुमन प्रभा, प्रा.अंजनी कुमार द्विवेदी,पं.शिवप्रकाश जौनपुरी,विनय शर्मा दीप आदि थे
   सभी रचनाकारों ने अपनी मौलिक - सृजित अपनी अपनी शैली.. बोली.. विधा की अनेक प्रकार की रचनाएँ पटल पर प्रस्तुत करते लगभग अठाइस - तीस रचनाकारों ने काव्य पाठ किया.. अनेक बन्धु श्रोता के रूप में उपस्थित रहे, कुल मिलाकर एक आनन्ददायक शाम का सभी ने आनन्द लिया,
        अपने अध्यक्षीय भाषण में पं.श्रीधर मिश्र जी ने सभी रचनॎकारों को साधुवाद देते हुए सब की प्रस्तुति पर संक्षिप्त प्रकाश डाला|अतिथियों ने आयोजन की व काव्यसृजन परिवार की मुक्तकंठ से सराहना की..और इसी तरह हिंदी की सेवा होती रहे इसपर भी बल दिया|
      अंत में संस्था के उपकोषाध्यक्ष सौरभ दत्ता "जयंत" जी ने सभी विभूतियों का आभार व्यक्त करते हुए निवेदन भी किया और कहा कि आप सबके ही सहयोग और  आशीष से हम और हमारी संस्था नित नये आयाम गढ़ रही है,इसी तरह सहयोग व स्नेह बनाये रखें..||

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