डीईओ सुर्यनारायण राम के कार्य शैली से नाराज जदयू कार्यकर्ता बैठेंगे धरना पर। - Ideal India News

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डीईओ सुर्यनारायण राम के कार्य शैली से नाराज जदयू कार्यकर्ता बैठेंगे धरना पर।

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डीईओ सुर्यनारायण राम के कार्य शैली से नाराज जदयू कार्यकर्ता बैठेंगे धरना पर। अनुमति के लिए प्रखंड अध्यक्ष नुआंव  ने एसडीओ को लिखा पत्र।

दीपक कुमार गुप्ता,ब्यूरो चीफ कैमूर।







भभुआ/नुआंव।  नियम कानून को ताक पर रख अपने मनमाफिक कार्यालय का संचालन करने वाले जिला शिक्षा पदाधिकारी एवं जदयू कार्यकर्ताओ में ठन गई है।इनके कार्यशैली से क्षुब्ध व परेशान जदयू कार्यकर्ता अब जिला मुख्यालय में चिन्हित धरना स्थल पर धरना पर बैठेंगे।इसके लिए नुआंव प्रखंड अध्यक्ष विश्वनाथ  गुप्ता ने भभुआ एसडीएम को पत्र लिख अनुमति की मांग की है।एव इसकी सूचना जिला अध्यक्ष को भी भेज दी है।हांलाकि कोरोना काल को देखते हुवे 5 सदस्यीय टीम ही धरना देगी।प्रखंड अध्यक्ष ने बताया कि डीईओ की मेहरबानी से  8 वर्ष से एक ही जगह पर बीआरसी में बीआरपी जमे हुवे है।जबकि बीआरसी में कार्यरत दोनो बीआरपी पर शिक्षको द्वारा भ्रस्टाचार का लगाए गए आरोप सिद्ध होने के बाद कार्रवाई हेतु बीईओ व बीडीओ ने डीईओ को कई बार पत्र लिख चुके है।ऐसे में अब आए दिन अपने कारनामों से चर्चा में रहने वाला शिक्षा विभाग एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।जदयू कार्यकर्ताओ की धरने की क्या है वजह।पूरे मामले पर गौर करे तो तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी अमोल मिश्रा ने सीआरसी गौरा प्रेमशंकर राय सीआरसी चण्डेश संजय कुमार राय व प्राथमिक बिधायलय गौरा के शिक्षक संजय कुमार सिंह व प्राथमिक विद्यालय महरो के शिक्षक मिथलेश प्रजापति के लिखित शिकायत पर अपने कार्यालय के पत्रांक 1306 दिनांक 3 दिसंबर 2019 को पत्र जारी कर सीआरसी में कार्यरत बीआरपी बलिंद्र सिंह व नरेंद्र चौबे दोनों प्रखंड शिक्षक को 2 दिन के अंदर बीआरसी से मूल विद्यालय में योगदान हेतु विरमित करने का आदेश बीईओ को दिया था। इसकी प्रतिलिपि जिला शिक्षा पदाधिकारी जिला कार्यक्रम पदाधिकारी सर्व शिक्षा अभियान एवं जिला पदाधिकारी कैमूर को भी भेजी थी। लेकिन 1 वर्ष से अधिक बीत जाने के बाद भी उक्त पत्र  बीआरसी कार्यालय के संचिका में धूल चाट रही हैं।जबकि वीडियो ने पत्र में स्पष्ट उल्लेख किया है कि बिहार सरकार शिक्षा विभाग मार्गदर्शिका 2013 के पृष्ठ 18 में बीआरपी का कार्यकाल 5 वर्ष तथा बिहार शिक्षा विभाग मार्गदर्शिका 2017 के कंडिका संख्या 2.2.1 मैं स्पस्ट निर्देशित किया गया है कि बीआरपी का कार्यकाल 3 वर्ष निर्धारित है।अर्थात  दोनों नियमावली के तहत बलिंद्र सिंह प्रखंड शिक्षक सह बीआरपी एवं नरेंद्र चौबे प्रखंड शिक्षक सह बीआरपी  की  निर्धारित अवधि पूरी हो चुकी है। एवं इनके विरुद्ध अधोहस्ताक्षरी के  कार्यालय एवं समाचार पत्रों में अक्सर शिकायत भी प्राप्त हो रही है।इधर डीएम नव दीप शुक्ला के निर्देश पर हरकत में आए तत्कालीन बीडीओ रमन सिन्हा ने एक बार फिर डीईओ सूर्यनारायण राम को पत्र भेज तथाकथित बीआरपीओ को मूल बिधायलय में विरमित करने का अनुशंषा की।उन्होंने इस बात पर भी हैरानी जताई है कि उक्त बीआरपीओ का भुगतान मेरे खाते से होता है।मेरे रोक के बावजूद फिर किस आधार व नियमावली के तहत  भुगतान किया जा रहा है।      इस संबंध में पूर्व डीपीओ सर्व शिक्षा अभियान रोहित चौरसिया ने बताया कि बीआरसी नुआंव से बीआरपी को मूल बिद्याय में भेजने हेतु कई बार संचिका डीईओ के पास मेरे द्वारा बढ़ाई गई थी।लेकिन हर बार दबाते रहे और जब नेताओ व डीएम का दबाव पड़ा तो संचिका पर टिप्पड़ी कर दिए कि 31 मार्च के बाद इस विषय को मेरे पास रखे।अब हम उस पद पर नही है।वही वर्तमान डीपीओ अक्षय कुमार पांडेय ने भी बताया कि डीईओ के पास फाइल बढ़ाई गई थी लेकिन बिना सीन किए डीईओ फाइल को लौटा दिए। वही डीईओ सूर्य नारायण राम ने बताया कि गठित समिति की मीटिंग बुलाना डीपीओ का कार्य है।ताकि कोई निर्णय लिया जा सके।वही प्रखंड अध्यक्ष ने डीईओ के भ्रस्टाचार में शामिल होने को ले धरना पर बैठने की बात कही है।

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