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नशा मुक्त समाज का निर्माण हो:- वैद्य अश्वनी श्रीवास्तव

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अखिलेश मिश्रा बागी मिर्जापुर

नशा मुक्त समाज का निर्माण हो:- वैद्य अश्वनी श्रीवास्तव 



मीरजापुर लालडिग्गी के निवासी बैद्य अश्विनी श्रीवास्तव ने कहा कि प्रकृति की शरण में जाकर असाध्य रोगों को भी हराया जा सकता है। बदलते परिवेश में अनेक शारीरिक विकार हमारे शरीर मे आ गए है । भारतीय परंपरा में सबसे बड़ा सुख निरोगी काया को बताया गया है । इसे पाने के लिए प्रकृति की शरण में जाना आवश्यक है ।




आयुर्वेदाचार्य अश्वनी ने कहा कि हमारे शरीर के विकास में खान पान के बाद वात, कफ और पित्त का अहम योगदान होता है । इनके असंतुलन से सबसे पहले हमारे भूख पर असर पड़ता है । इसमें नशा भी एक अहम कारक है । उन्होंने कहा कि नशे से किसी भी व्यक्ति को मात्र कुछ सौ रुपए खर्च करके नशे की गिरफ्त से मुक्त कराया जा सकता है । नशा से मुक्ति के साथ ही अच्छी सेहत के लिए पेट का दुरुस्त रहना भी जरूरी है । पाचन शक्ति सही होने पर व्यक्ति की सेहत अच्छी होने के साथ ही कार्य क्षमता में भी वृद्धि हो जाती है । लम्बाई के अनुसार वजन का होना आवश्यक होता है । वजन को बढाना या घटाना अपने हांथ में है । इसका असर आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के सहारे मात्र कुछ दिन में ही महसूस किया जा सकता है । प्राचीन पद्धति के सहारे खुद दवा बनाकर मरीजों का इलाज करने वाले वैद्य ने बताया कि असाध्य रोग की श्रेणी में शामिल कैंसर का इलाज प्राचीन आयुर्वेद में वर्णित है । इसकी दवाओं का असर केवल 21 दिन के बाद ही नजर आने लगता है । प्रकृति के सानिध्य में रहकर धन रूपी स्वास्थ्य को पाने का सबसे सरल उपाय है । जिसे भारतीय ऋषि मुनि ने वर्षो शोध के बाद लिखा है । रोगों से लड़ने के लिए अपनी क्षमता को विकसित करने के बाद तमाम रोग पास तक नहीं आते । जिसे हमारी शरीर में विद्यमान शक्तियां नष्ट कर हमें निरोगी बनाकर परम सुख प्रदान करती है । सुबह और सायंकाल बहुत दूर दूर से आने वाले मरीजों के असाध्य रोगों का इलाज सेवा भाव से करने वाले वैद्य श्रीवास्तव ने बताया कि व्यक्ति में धैर्य और लगन हो तो वह स्वास्थ्य रूपी धन को ब्यक्ति  प्राप्त कर सकता हैं ।

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