*इस साहसिक महिला ने कोरोना से खुद लड़ी , पति और बेटे को भी खिच लायी मौत के मुँह से* - Ideal India News

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*इस साहसिक महिला ने कोरोना से खुद लड़ी , पति और बेटे को भी खिच लायी मौत के मुँह से*

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अन्जू पाठक जौनपुर
*इस साहसिक महिला ने कोरोना से खुद लड़ी , पति और बेटे को भी खिच लायी मौत के मुँह से*


*जौनपुर*/ 7 दिन से लगातार तेज बुखार में पडी थी ,न हिला जा रहा था ,न चला। 
सासू माँ पहले ही बिमार थी । अब मेरे पति को भी बुखार ने पकड़ लिया था।उस दिन सासू माँ ने साँस फूलने की बात की हास्पिटल जाने पर आक्सीजन लेवल  कम होने की बात पता चली  और आक्सीजन न मिलने के कारण वो चली गयी। 

मेरा और इनका ज्वर काफी तेज था।अब कोरोना का डर हम लोगो के मन मे बैठ गया था । दूसरे दिन क्रियाक्रम के बाद मुझे बहुत घबडाहट शुरु हुई । और हमने कोरोना टेस्ट कराया । मै मेरे पति और मेरा बेटा संक्रमित पाये गये। मेरे पैरो तले जमीन खिसक गयी । एक डर जो इस बिमारी को लेकर था जाग गया ।मेरा बी पी बढा और मै बेहोश हो गयी ।
सुबह जब कुछ सुधार हुआ तो मैने अपने बेटे और पति को देखा ।
एक तरफ घर के दूसरी ओर मेरी बेटी थी। मुझे इनके लिए जीना था और जीतना था कोरोना से। 

सबसे पहले मैने हम तीनो का बिस्तर एक बडे हवादार कमरे मे लगाया । और सबके पानी आदि की अलग व्यवस्था की । बेटे को बोला तुम्हे टिटनेस है और कुछ नही १४ दिन रहना है फिर ठीक हो जाएगा। पति को भी समझाया कि सब सही होगा। बस लापरवाही नही करनी ।सबसे ज्यादा मै बिमार थी ।पर ये सास की मृत्यु से घबराये थे,फिर मेरी हालत देख कर और डरे थे। 

मैने सबसे पहले हर नकारात्मक काल रिसीव करनी बंद कर दी । और हर समूह देखना बंद कर दिया केवल सकारात्मक विचारो को देखा । तीनो का बिस्तर समान्तर मे लगाया  जिससे इन दोनो को भी देख सकूँ । सुबह उठ कर १५मिनट योगा और ब्रीथिंग एक्सरसाईज किया। सुबह सर्वप्रथम गर्म पानी ,काढा ,भींगा चना दाल का पानी ,फिर हल्का नाश्ता इन दोनो को खिलाते हुए खुद भी गर्म ही खाती । दिन मे २/३बार गरारा और भाप भी दिलाती ।थोडा टहलाती और स्वयं भी टहलती ।मुझे पता था अगर मै सकारात्मक सोच नही रख सकी तो ये लोग भी नही रह पायेगे।
हर एक घंटे पर फल या कुछ हल्का खाती रहती । आक्सीमीटर से आक्सीजन लेवल का नाप लगातार लेती ।
गिलोय कालीमिर्च, सेंधानमक ,हम तीनो के पास था और हम तीनो अपना समान ही छू रहे थे। सबसे अहम था मन का जीतना ,कभी कभी बहुत टेशन होती कि कहीं कुछ हो न पर फिर खुद ही समझाती कि जब तक जान है लड़ना है और जीतना है । 

आज हम लोग जीत चुके है। पर आज भी सारी दिनचर्या उससमय के जैसी ही है।
जब बेटा ठीक हुआ और जाना कि उसे कोरोना हुआ था ।तो बोला"तुम बोली टिटनेस हुआ था । कोरोना मे तो कोई ठीक नही होता ।" 
और मैने हँसकर कहा "तुमतो ठीक हो गये।बस डर को कभी हावी मत होने देना। "

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