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अत्याचार के विरोध की सीख मिलती है भगवान परशुराम के जीवन से : कुन्दन

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संजय पान्डेय मनोज पान्डेय आजमगढ़

अत्याचार के विरोध की सीख मिलती है भगवान परशुराम के जीवन से : कुन्दन











आजमगढ़। अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण महासभा के तत्वावधान में भगवान परशुराम की जयंती कोलघाट स्थित कुन्दन आवास पर कोरोना संक्रमण के चलते सोशल डिस्टेसिंग का पालन कर मनाई गई।  
जयंती को सम्बोधित करते हुए महासभा के प्रदेश संरक्षक पंडित सुभाष चन्द्र तिवारी कुन्दन ने कहा कि भगवान परशुराम के जीवन से अन्याय व अत्याचार के विरोध की सीख मिलती है। भगवान परशुराम के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उन्होने बताया कि भगवान विष्णु के छठें अवतार परशुराम जी ने त्रेतायुग में विधर्मी सहस्रार्जुन एवं अनेक अत्याचारी शासकों का नाश करके पृथ्वी पर धर्म की स्थापना की। उन्होने अनेक समाज उद्धारक कार्य किये। देश में गांवों की स्थापना उन्हीं के प्रेरणा से हुई है। समुद्र को अपने परशु से पीछे कर केरल से लेकर कोंकड़ तक का भूभाग उन्हीं के द्वारा बनाया गया। वह आज भी अमर होकर तपस्यारत् है। 
आइडियल जर्नलिस्ट एसोसिएशन के प्रांतीय संरक्षक संजय कुमार पांडेय ने बताया कि महर्षि जमदग्नि एवं रेणुका के पुत्र भगवान परशुराम ने स्नातन हिन्दू धर्म को बचाने में अत्यन्त महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके जन्म के समय अधिकांश शासक अत्याचारी हो गये थे। तब ब्राह्मण कर्म करते हुए उन्होने शस्त्र उठाया। इस तरह से उन्होने धार्मिक व सज्जन पुरूषों को भी अन्याय के प्रतिकार का संदेश दिया। 
प्रारम्भ में आचार्य पंडित कमलेश्वर पाठक ने वैदिक रीति से भगवान परशुराम के चित्र का पूजन किया।
इस मौके पर उपस्थित लोगों में मंडल अध्यक्ष पंडित सौरभ उपाध्याय, महंत संजय पुजारी, शिवगोविन्द उपाध्याय, पंडित मधुसूदन पाठक, विक्रांत उपाध्याय, सत्यम पाठक, मोहन दूबे, रजनीकांत तिवारी आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

भवदीय

पंडित सुभाष चन्द्र तिवारी कुन्दन
प्रदेश संरक्षक
अखिलभारतवर्षीय ब्राह्मण महासभा
मो0नं0 7275044217

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