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किसान अगर इस तरह करें धान की बिजाई तो पानी की खपत व लागत होगी कम।

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किसान अगर इस तरह करें धान की बिजाई तो पानी की खपत व लागत होगी कम।

करनाल, हरियाणा (रजत शर्मा)।



 उप-कृषि निदेशक डा0 आदित्य डबास ने कहा कि धान की बिजाई का समय आ रहा है और इस धान के सीजन में किसान पारम्परिक विधि से धान की पौध तैयार करके 15 जून से धान की रोपाई अपने-अपने खेतों में करते है। इस विधि में खेत में पानी भरकर रोपाई की जाती है व रोपाई के बाद में भी पानी खड़ा रखना पडता है। इस समय तापमान अधिक होने के कारण पानी का वाष्पिकरण होने से पानी की खपत बहुत अधिक मात्रा में करता है और इसमें श्रम का प्रदान भी अधिक होता है।

उन्होंने कहा कि किसान भू-जल, लेबर व समय की बचत करने के लिए धान की सीधी बिजाई डीएसआर मशीन द्वारा कर सकते है। इस विधि से पहले खेत में लेजर लेवलर द्वारा समतल किया जाना जरूरी है और इसके बाद तर-बतर अवस्था में धान की सीधी बिजाई की जा सकती है। उन्होंने इस विधि के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि इस विधि से बिजाई करने में 15 से 20 प्रतिशत तक पानी की बचत होती है। इस मशीन द्वारा किसान रेतली जमीनों में बिजाइ न करें व केवल उन्हीं खेतों में बिजाई करे जिसमें किसान पहले से ही धान की फसल ले रहे है। 

जहां एक ओर धान की सीधी बिजाई वाली विधि से पैदावार, रोपाई करके लगाई गई धान की फसल के बराबर होती है वहीं दूसरी ओर फसल 7 से 10 दिन पहले पक कर तैयार हो जाती है। जिस कारण धान की पराली सम्भालने व गेहूं अथवा सब्जियों की बिजाई करने के लिए अधिक समय मिल जाता है। उन्होंने कहा कि जो किसान धान की खेती को छोडकर मक्का की खेती करना चाहते है व मेज पलान्टर के द्वारा मेढो पर मक्का की बिजाई भी कर सकते है। जिससे पानी की अत्याधिक बचत होती है।

 इन दोनों कृषि यंत्रों को खरीदने पर कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा समय-समय पर अनुदान उपलब्ध करवाया जाता है। इसके अतिरिक्त विभाग के पास डीएसआर मिशन होती है, वह किसानों को पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर बुक की जाती है। उन्होंने कहा कि मक्का बिजाई मशीन फ्री में उपलब्ध करवाई जाएगी तथा इसके लिए किसान अपना आधार कार्ड कार्यालय में जमा करवाकर मशीनों का लाभ उठा सकते है।

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