आयुर्वेद, पंचगव्य, पंचकर्म, योग, प्राणायाम, पद्धति से कारगर सिद्ध हो रही है पोस्ट कोविड समस्याएं : गुरुकुलपति निरंजन वर्मा - Ideal India News

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आयुर्वेद, पंचगव्य, पंचकर्म, योग, प्राणायाम, पद्धति से कारगर सिद्ध हो रही है पोस्ट कोविड समस्याएं : गुरुकुलपति निरंजन वर्मा

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कमल कुमार कश्यप
 रांची झारखंड बिहार

 आयुर्वेद, पंचगव्य, पंचकर्म, योग, प्राणायाम, पद्धति से कारगर सिद्ध हो रही है पोस्ट कोविड समस्याएं  : 
गुरुकुलपति निरंजन वर्मा



कोरोना संक्रमण से उबरने वाले 80 फीसद मरीजों को विभिन्न प्रकार की परेशानी हो रही है| इसमे सांस लेने में दिक्कत, कमजोरी, सूखी खांसी, चक्कर आना, घबराहट, मुंह सूखना, भूख ना लगना, नींद ना आना, आंखों में लाली, गंध और स्वाद की कमी प्रमुख है ऐसे मरीजों के लिए आयुर्वेद पद्धति पंचगव्य पंचकर्म योग  काफी कारगर सिद्ध हो रही है|

 उक्त बातें पंचगव्य विद्या पीठम कांचीपुरम तमिलनाडु के गुरुकुलपति स्वामी निरंजन वर्मा ने बिहार और झारखंड दौरे के दौरान टेलीफोन वार्ता पर कहीं| गुरुकुल के गव्य सिद्ध आचार्य स्वामी निरंजन वर्मा बताते हैं कि कोरोना या किसी भी संक्रमण से क्षतिग्रस्त अंगों को आयुर्वेद और योग प्राणायाम पंचगव्य से ठीक किया जा सकता है| इनमें फेफड़े समेत अन्य प्रभावित अंग भी शामिल है| पोस्ट कोविड प्रभाव में फेफड़े, हृदय, आंख, नाक के अलावा सिरदर्द, ब्लड प्रेशर की समस्याएं होती है| उन्होंने बताया कि मरीजों के उपचार को शरीर शुद्धिकरण की प्रक्रिया अपनाई जाती है| इनमें पंचगव्य, पंचकर्म क्रिया  के अलावा पंचगव्य का भस्म, गोमूत्र अर्क, नाक नस्य औषधि जो देशी गाय के घी से गुरुकुल मे अनुभवी गब्यसिद्वो द्बारा  अद्भुत तरीके से तैयार की गई है|यह औषधि के अलावे भाप व जड़ी बूटियों का धूआ देने से इससे संतोषजनक लाभ प्राप्त हुए हैं| मोटे अनाज का पौष्टिक खानपान  व आचार व्यवहार के साथ-साथ योग व प्राणायाम करने से चमत्कारी लाभ होते हैं|
वही राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय पटना के प्राचार्य डॉ दिनेश्वर प्रसाद का कहना है कि कोरोना या किसी भी संक्रमण से क्षतिग्रस्त अंगों को आयुर्वेद और योग प्रणायाम से ठीक किया जा सकता है | इनमें पंचकर्म क्रिया कल्प के अलावा कायचिकित्सा की जाती है| आंख, नाक व कान का इलाज  शालाक्य  के तहत किया जाता है| फेफड़े और हृदय के संक्रमण के लिए हृदय के ऊपर  कटोरी नुमा आकृति बनाकर उसमें गर्म तेल डालकर सिकाई की जाती है| इसके अलावा दोनों अंगों के ऊपर कुछ लेप लगाकर छोड़ दिया जाता है| विशेषज्ञ उन्हें अपनी देखरेख में दवा देते हैं| इसके अलावा भ्रामरी, अनुलोम-विलोम जैसे व्यायाम कराए जाते हैं|

ब्लैक फंगस व आंखों की समस्याओं के लिए यदि आंखों की रोशनी कम होती है तो 70 फ़ीसदी तक लौट आने में कामयाब मिलती है| ब्लैक फंगस के रोगी भी यदि शुरुआत में आते हैं, उन्हें भी काफी लाभ होता है| इसके लिए क्रिया कल्प के साथ तर्पण व त्राटक विधि उपयोगी है, तर्पण विधि में आंखों के आसपास त्रिफला घृत डाला जाता है, रोशनी लौटाने में मदद मिलती है| वही त्राटक विधि के तहत घी के कई दीए जलाकर उन्हें अलग-अलग दिशाओं में रखा जाता है| इसके बाद रोगी को हर दिया नियमित अंतराल पर एकटक देखने को कहा जाता है| इससे आंखों की पुतली चारों ओर घूमती है, यह आंखों के लिए काफी लाभदायक होता है| नस्य क्रया से ब्लैक फंगस के शुरुआती लक्षण में लाभ देखा गया है| नाक में तेल व घी डालने के साथ कई बार भाप व जड़ी बूटियों का धूआ देने पर बंद नाक खोलने के साथ ही कई संक्रमण खत्म हो जाते हैं |वहीं शिरोधारा व शिरोबस्ती क्रिया के द्वारा माथे पर तेल घी की धारा डालने व दवाओं के लेप से सिर दर्द ब्लड प्रेशर व नींद ना आने की समस्या दूर होती है|



पंचगव्य घनवटी व अर्क तैयार करते हुए पंचगव्य गव्य सिद्ध प्रकाश कुमार पटना बिहार
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