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हाइपरटेंशन के मरीजों को कोरोना के संक्रमण का जोखिम अधिक

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DR RJ GUPTA

कल विश्व हाइपरटेंशन दिवस है। यह हर साल 17 मार्च को मनाया जाता है। इसे पहली बार साल 2005 में 14 मई को मनाया गया था। इसके बाद साल 2006 से यह हर साल 17 मई को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत विश्व हाइपरटेंशन लीग ने की है। इसे मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को उच्च रक्त चाप के बारे में जागरूक और नियंत्रित करने के लिए प्रोत्साहित करना है। हाइपरटेंशन को साइलेंट किलर भी कहा जाता है। विशेषज्ञों की मानें तो इस बीमारी में दिल की धमनियों में रक्त संचरण बड़ी तेजी से होने लगता है। इस वजह से व्यक्ति को थकान, सीने में दर्द, सिर में तेज दर्द और सांस लेने मे तकलीफ आदि की समस्या होती है।

सामान्यतः 130/80 mmHg से ऊपर के रक्तचाप को हाइपरटेंशन कहा जाता है। इसका इलाज संभव है। अगर इलाज में लापरवाही बरतते हैं, तो यह खतरनाक साबित हो सकता है। खासकर कोरोना काल में उच्च रक्तचाप के मरीजों को संक्रमण का खतरा अधिक है। इसके लिए हाइपरटेंशन के मरीजों को अपनी सेहत का विशेष ख्याल रखना चाहिए। रिसर्च गेट पर छपी एक लेख में कई शोधों का जिक्र किया गया है। इन शोधों से पता चलता है कि हाइपरटेंशन के मरीजों का कोरोना वायरस से अधिक खतरा है।

हाइपरटेंशन यानी हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने के लिए रोजाना सर्वांगासन, सुखासन, पश्चिमोत्तानासन और विपरीत करनी योगासन करें। इससे हाइपरटेंशन में बहुत आराम मिल सकता है। इसके अलावा, खानपान और दिनचर्या में भी सुधार करें। डाइट में विटामिन-सी युक्त फलों और सब्जियों को जरूर शामिल करें।

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