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होम आइसोलेशन में रहकर 90 वर्षीय हीरावती ने दी कोरोना को मात

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डा प्रमोद वाचस्पति जौनपुर



होम आइसोलेशन में रहकर 90 वर्षीय हीरावती ने दी कोरोना को मात
अल्जाइमर व वृद्धावस्था की बीमारियों से ग्रसित होने के बाद भी परिवार वालों की समुचित देखभाल से जीतीं जंग 
जौनपुर, 12 मई 2021 



आखिर माँ तो माँ ही होती है, बच्चों के कष्ट के सामने वह अपने दुःख-दर्द की कोई अहमियत नहीं देती है। बेटा-बेटी चाहे जितनी भी उम्र के हो जाएँ लेकिन माँ की निगाह में वह हमेशा बच्चे ही होते हैं, लेकिन समस्या तब आती है जब मां खुद अल्जाइमर जैसी बीमारी से ग्रसित हों तथा उन्हें खुद यह सुध न रहती हो कि उन्हें हुआ क्या है? ऐसी ही एक माँ हैं जिन्होने 90 वर्ष की उम्र में परिवार वालों की समुचित देखभाल से कोरोना को मात दी और अब वह पूरी तरह से स्वस्थ हैं। 
90 वर्षीय पूर्व ग्राम प्रधान हीरावती मिश्रा ग्राम पंचायत चुरावनपुर की रहने वाली हैं। इस उम्र में कोरोना के लक्षण के बाद हुई जांच में वह 16 अप्रैल को पॉज़िटिव निकलीं । बेटा और दो बहू भी साथ में पॉजिटिव हो गए । ऐसे में कोरोना से परिवार में सुरक्षित बचे छोटे बेटे डॉ मनोज मिश्र और पौत्री प्रियेषा ने इसे एक चुनौती के रूप में लिया और तय कर लिया कि सभी को पूरी तरह से हिम्मत बंधाकर रखना है और कोरोना से सुरक्षित बचाना है। समुचित देखभाल का नतीजा रहा कि इस संकट की घड़ी में भी बगैर अस्पताल गए सभी लोग होम आइसोलेशन में ही स्वस्थ हो गए । 
    डॉ मनोज मिश्र बताते हैं कि कोरोना के लक्षण आने के तीसरे दिन से ही माता जी की हालत ज्यादा ख़राब होने लगी थी, दो कदम चलना भी मुश्किल लग रहा था और गले में संक्रमण इतना हो गया था कि दवा खाने में भी दिक्कत महसूस हो रही थी। ऐसे में परिवार ने कोरोना जांच रिपोर्ट आने का इन्तजार किये बगैर ही चिकित्सक के परामर्श से एलोपैथिक दवाओं के साथ घरेलू उपचार शुरू कर दिया । रिपोर्ट आने के बाद दवा शुरू करते तो शायद मुश्किल और बढ़ सकती थी। स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोरोना की निर्धारित दवाओं के नियमित सेवन के साथ ही आयुर्वेदिक औषधि में काली मिर्च, मुलेठी, सोंठ और पीपर चूर्ण के मिश्रण ने बड़ी राहत दी। छाती में पांचवें दिन संक्रमण ज्यादा बढ़ने पर पारिवारिक चिकित्सक द्वारा बताए गए स्टेरॉयड का इस्तेमाल गेम चेंजर बन कर उभरा । दवाओं के नियमित सेवन के साथ ही भाप लेना, गुनगुना पानी पीने और सकारात्मक बने रहने से घर पर ही रहकर ही सब लोग ठीक हो गए। माता जी खुद से दवा भी नहीं खा सकतीं थीं तो ऐसे में उनके साथ बैठकर दवा खिलाना, खाना खिलाना और गुनगुना पानी पिलाना, बड़ा ही चुनौती भरा था लेकिन हम लोगों ने हार नहीं मानी और उस सेवा का परिणाम रहा कि वह कोरोना को मात देने में सफल रहीं ।  
कोरोना से ज्यादा ताकतवर मानो अपने को : 
कोरोना उपचाराधीनों की देखभाल कर चुके डॉ मनोज मिश्र का कहना है कि कोरोना से लड़ने का एक ही तरीका है कि खुद को उससे अधिक ताकतवर महसूस करो और मन में एक पल के लिए भी नकारात्मक विचार न आने दो। उन्होने सभी से यही अपील की है कि यह वक्त बड़ा मुश्किल भरा जरूर है लेकिन जरूरी सावधानी, सतर्कता और प्रोटोकॉल का पालन करके हम सभी उससे सकुशल उबर सकते हैं। इसलिए बहुत आवश्यक हो तभी बाहर निकलें और जब काम से बाहर निकलें तो डबल मास्क से नाक और मुंह अच्छी तरह से ढका होना चाहिए, बाहर जिससे भी मिलें उससे उचित दूरी बनाकर रखें और अपने हाथों को बार-बार साबुन-पानी से धुलते रहें।  इसके अलावा कोविड से बचने के लिए समय पर टीका अवश्य लगवाएं ।   
उन्होंने कहा कि परिवार के चार सदस्य एक साथ कोरोना पाजिटिव हों तो ऐसे समय मे व्यक्ति की क्या मनोदशा होगी, आप सहज अंदाजा लगा सकते हैं। बुजुर्ग माताजी, बड़े भाई, भाभी और पत्नी एक साथ एक - एक दिन के अंतराल पर कोरोना पॉजिटिव हो गए। कोरोना से सुरक्षित बचा था मैं, भतीजी और बेटा। मेरे सामने सभी के इलाज की चुनौती के साथ यह डर भी था कि कहीं मैं, भतीजी और बेटा भी संक्रमण की चपेट में न आ जाएँ। राहत की बात यह रही कि त्वरित उपचार और सक्रिय देखभाल से होम आइसोलेशन में ही सब लोग ठीक हो गए। अस्पताल जाने की नौबत नहीं आई। वह बताते हैं कि हम सभी कोरोना से इस दौरान सुरक्षित रहे, क्योंकि देखभाल के दौरान हम सभी ने कोरोना प्रोटोकाल का अक्षरशः पालन किया । उन्होने बताया कि पिछले साल अक्टूबर में हम तीनों लोग कोरोना पॉज़िटिव हो चुके थे, हो सकता है इसलिए भी हम सभी संक्रमण से सुरक्षित रहे हों।

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