मातृभाषा हिंदी को हर क्षेत्र में मिले सर्वोच्च स्थान : प्रतिभा सिंह - Ideal India News

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मातृभाषा हिंदी को हर क्षेत्र में मिले सर्वोच्च स्थान : प्रतिभा सिंह

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Dr.U.S. Bhagat
वाराणसी 
भारतीय भाषा हिंदी की जागरूकता के लिए एक टीम लखनऊ से वाराणसी काशी के कचहरी परिसर में प्रचार प्रसार करने हेतु अधिवक्ताओं के मध्य जाकर उन्होंने हिंदी भाषा को देश में प्रमुख बनाने के लिए जन आंदोलन का आग्रह किया । जिसके बाद वरिष्ठ अधिवक्ता उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के पूर्व चेयरमैन व सदस्य  हरिशंकर सिंह  ने प्रतिभा सिंह महिला प्रमुख उत्तर प्रदेश,संयोजिका न्यायाग्रह यात्रा और श्री हरि गोविंद उपाध्याय राष्ट्रीय मंत्री जी का माल्यार्पण कर स्वागत किया । अधिवक्ता हरिशंकर सिंह जी ने कहा कि जिस प्रकार भारत में हर एक क्षेत्र में अंग्रेजी भाषाओं का समावेश किया गया है उसी प्रकार हिंदी भाषा को भी सभी जगह समावेश कर देश में सर्वोच्च स्थान मिलना चाहिए आगे महिला प्रमुख उत्तर प्रदेश संयोजिका न्यायाग्रह यात्रा की प्रतिभा सिंह ने कहा कि 14 सितंबर 1949 को देश की जन भाषा हिंदी को प्रथम बार देश की राजभाषा के रूप में संवैधानिक मान्यता दी गई । स्वतंत्रता के बाद देश में राज्यों का गठन किया गया। वह भी भाषा के आधार पर हुआ। 14 प्रमुख भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान दिया गया, जो आज बढ़कर 22 हो गई है,परंतु यह तो सरकारी कामकाज के लिए चुनी गई न स्कूलों और विद्यालयों में शिक्षा के उद्देश्य के लिए और ना ही न्यायालयों में न्याय की भाषा के रूप में स्वीकार किया गया। चार राज्यों को छोड़कर अन्य किसी भी राज्य की राजभाषा को वहां के उच्च न्यायालय में मान्यता नहीं है। अथार्थ वास्तविक लोकतंत्र अगोचर है। 26 जनवरी 1965 के बाद भी अंग्रेजी के प्रयोग पहले की तरह किए जाते रहने की छूट दी गई। इसलिए अनुच्छेद 348 के तहत उच्चतम एवं उच्च न्यायालय के कामकाज की भाषा पहले की तरह अंग्रेजी ही है। देश के 4 राज्यों राजस्थान उत्तर प्रदेश मध्य प्रदेश एवं बिहार के उच्च न्यायालयों में हिंदी में न्यायिक कार्रवाई की जा रही है, लेकिन मात्र 2% संविधान के अनुसार राज्यपाल महोदय माननीय राष्ट्रपति की अनुमति से इसको लागू कर सकते हैं। देश में जिस प्रकार की शिक्षा एवं न्यायिक पद्धति है न्याय व्यवस्था है एवं प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रत्येक जगह अंग्रेजी की प्राथमिकता व मान्यता प्रदान की गई है।उसमें भारतीय भाषा की कोई जगह नहीं है। राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री ने भारतीय भाषा में संसद से लेकर विश्व पटल पर ओजस्वी स्मरणीय भाषण दिए, लेकिन इस भाषा को संविधान में सम्मान देने में हमसे भूल हुई है। जब तक शासन प्रशासन उच्च शिक्षा एवं प्रतियोगी परीक्षाओं में अंग्रेजी का लोक समाप्त नहीं किया जाएगा तब तक भारतीय भाषाओं को स्थापित करना असंभव है। भारतीय भाषाओं की ऐसी बुरी स्थिति देखकर और भारतीय भाषाओं को सम्मानित स्थान दिलाने के लिए देशभर में भारतीय भाषाओं के प्रतिस्थापन हेतु एक बड़ा आंदोलन व अभियान चलाने की आवश्यकता है।  यह भाषा हमें अपनी मिट्टी मानवता एवं नैतिकता के सरोकारों से जोड़ता है। इसी के आगे उन्होंने कहा कि भारतीय भाषा आंदोलन महिला शाखा के नेतृत्व में वीरांगना न्याय ग्रह यात्रा 15 जून को भगवान शिव की नगरी काशी से प्रयागराज कानपुर झांसी होते हुए 18 जून 2021 को ग्वालियर मध्य प्रदेश में संपन्न होगी। इस मौके पर बनारस कचहरी के अधिवक्ता हरिशंकर सिंह बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश पूर्व चेयरमैन व सदस्य,दुर्गा प्रसाद प्रदेश मंत्री अधिवक्ता परिषद व पूर्व सेंट्रल बार वाराणसी, अवनिश त्रिपाठी,अधिवक्ता विद्या भूषण सिंह, संजय सिंह दाढ़ी पूर्व महामंत्री सेंट्रल बार एसोसिएशन, अंकुर पटेल, नीरज पांडे, उमेश तिवारी मिथिलेश मिश्रा आदि अधिवक्ता उपस्थित रहे।

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