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*देवारा में आग का भीषण तांडव 70 घर जल कर हुए खाक

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*देवारा में आग का भीषण तांडव 70 घर जल कर हुए खाक, दो मासूम जिंदा जले, कई लोग झुलसे खुले आसमान के नीचे आए दर्जनों परिवार, एसडीएम, सीओ ने संभाली कमान*    

      रिपोर्टर  राम भवन यादव

 आजमगढ़ के महराजगंज क्षेत्र के
ग्राम पंचायत- नौबरार देवारा जदीद किता प्रथम के 7 पुरवों में आज दिन में आग धधकने से करीब 70 कच्चे घर जल गए। 









कई दर्जन परिवार बेघर हो गए और दो बच्चों के शव भी जली मंडई के मलबे से बरामद होने की सूचना से हड़कंप मच गया।आजमगढ़ के घाघरा नदी किनारे के देवारा क्षेत्र में आज भीषण हादसा हो गया। देवारा जदीद किता प्रथम गांव में आग ने जमकर तांडव मचाया। एक छोटी सी बस्ती से निकली आग ने आसपास के करीब 1 किलोमीटर के क्षेत्र के मकानों को अपनी जद में ले लिया। तेज गर्म हवा व घरों में रखे सिलेंडर और अन्य ज्वलनशील पदार्थों के चलते आग ने भी कुछ ही देर में विकराल रूप धारण कर लिया और देखते-देखते दर्जनों मकान और मंडई धू-धू कर जलने लगे। आग बेकाबू होते देख क्या बच्चे क्या बूढ़े सभी जैसे तैसे हालत में घर छोड़कर भागने लगे। पूरे क्षेत्र में घंटों हाहाकार की स्थिति रही। जब तक राहत कार्य शुरू हो पाता तब तक बहुत देर हो चुकी थी लोगों के घरों में रखे सभी सामान जलकर राख हो गए। पालतू पशुओं की मौत हो गई। इस दौरान आपाधापी में भागे लोगों की खोजबीन जब शुरू हुई तो राकेश राम के दो बच्चेेे गायब मिलेे। बाद में मासूम भाई बहन 5 वर्षीय मुस्कान और 3 वर्षीय अवनीश के शव पूरी तरह से जली हालत में उनके घर से मिके। बताया जा रहा है कि बच्चे जान बचाने के लिए कमरे में ही छुप गए थे। राहत कार्य देरी से शुरू होने को लेकर लोगों में भारी आक्रोश था। हालांकि सूचना के तत्काल बाद ही एसडीएम सगड़ी, सीओ सगड़ी, तहसीलदार सगड़ी, महाराजगंज कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंच गई थी लेकिन फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को पहुंचने में काफी दिक्कत का सामना करना पड़ा। लोगों की शिकायत है कि हर साल गर्मी के मौसम में कभी खेत में तो कभी मकानों में आग लगती रहती है और इसके लिए यहां महाराजगंज में फायर ब्रिगेड का स्टेशन बनाया गया था लेकिन आज घटना के समय कोई गाड़ी नहीं मौजूद होने के चलते जीयनपुर और अन्य क्षेत्रों से आए ब्रिगेड की गाड़ियों को बुलाना पड़ा जिससे काफी देर से राहत कार्य शुरू हो सका। यह पूरा इलाका आजमगढ़ के उत्तरी क्षेत्र में महिला गढ़वाल बांध से भी उत्तर घागरा के किनारे बसा हुआ है जिसके कारण यहां पर तत्काल पहुंचना भी प्रशासन के लिए हमेशा चुनौती से भरा रहा है।

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