स्वर्णरेखा नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए इसे पांच भाग में बांटने की जरूरत : सरजू राय - Ideal India News

Post Top Ad

स्वर्णरेखा नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए इसे पांच भाग में बांटने की जरूरत : सरजू राय

Share This
#IIN

डा कमल कुमार कश्यप

राँची/दिनांक 22.03.2021



स्वयंसेवी संस्था ‘युगान्तर भारती’, नेचर फाउण्डेशन, जल जागरूकता अभियान, सिविल सोसाईटी और दामोदर बचाओ आंदोलन के संयुक्त तत्वाधान में ‘विश्व जल दिवस’ के अवसर पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन आज पुराना विधानसभा स्थित सभागार में किया गया। उक्त संगोष्ठी का विषय ‘राँची शहर के जल स्रोतों का संरक्षण’ था। संगोष्ठी का उद्घाटन दामोदर बचाओ आंदोलन के अध्यक्ष, श्री सरयू राय एवं अन्य अतिथियों ने संयुक्त रूप से किया।
इस संगोष्ठी के अध्यक्ष, श्री सरयू राय ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि प्रत्येक वर्ष हमलोग विश्व जल दिवस के अवसर देश के प्रख्यात पर्यावरणविद और पानी बचाने में अपनी महती भूमिका निभाने वाले गणमान्य व्यक्तियों को आमंत्रित करते थे। परंतु इस वर्ष हमने सोचा कि स्थानीय नागरिकों के साथ इस कार्यक्रम का आयोजन किया जाय। राँची के विभिन्न जलाशयों, डैमों के पानी को कैसे प्रदूषण मुक्त रखा जाय, उनकी मार्ग की अवरूद्धता कैसे समाप्त की जाय, इन सब विषय पर हमें मंथन करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि 2004 के आसपास राँची शहर में 45-50 से अधिक तालाब थे जो अब लुप्त हो चुके है। हरमू नदी में 100 करोड़ खर्च करने के बावजूद भी यह पहले से बदतर हालत में पहुंच चुका है, नाला बन चुका है। इसे ढंकने की नौबत आ चुकी है। राँची के नदियों, जलाशयों को बचाने, उन्हें प्रदूषण मुक्त करने के लिये राँची के स्थानीय नागरिकों, सिविल सोसाईटी को आगे आना होगा। स्वर्णरेखा नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिये इसे पाँच भाग में बाँटना होगा। राईस मिलों का गन्दा पानी स्वर्णरेखा में जाने से बचाना होगा, औद्योगिक कचरों का अपशिष्ट नदियों में जाने से रोकना होगा, तभी स्वर्णरेखा नदी प्रदूषण मुक्त हो सकेगा।
श्री राय ने बताया कि जिस स्थान पर नया विधान सभा बना है उस स्थान से हटिया डैम में नाला के रूप में पानी का निरंतर प्रवाह होता था, जो विधानसभा बनने के कारण अब वह नाला अवरूद्ध हो गया है। नये विधानसभा परिसर से बाहर देखने पर ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे यह कुएँ के भीतर बनाया गया है। नये विधानसभा के निर्माण से क्या कुप्रभाव आसपास के पर्यावरण, पारिस्थितिकी पर पड़ रहा है, इस विषय पर शोधार्थी को शोध करने की जरूरत है। आम आदमी को जल बचाने का संदेश देने से ज्यादा जरूरी है, समाज के शक्तिशाली लोगों, आईएएस, आईपीएस और आईआईटी जैसे मेधावी बुद्धिजीवी वर्ग को इस पर ज्यादा ध्यान देने की आवश्यकता है, इन्हें ही जल की कमी की भयावहता का आईना दिखाना जरूरी है। पहाड़ी मंदिर को एक आदमी के जिद के कारण क्षत-विक्षत कर दिया गया है। पहाड़ी मंदिर के उद्धार के लिये राँची के लोगों को एकसाथ आगे आना होगा। इसे अपने पुराने स्वरूप में वापस लाने की आवश्यकता है।
समारोह के विशिष्ट अतिथि श्री धर्मेंद्र तिवारी ने कहा कि राँची के निवासी मुख्य रूप से पेयजल के लिये डैमों एवं भूगर्भ के जल पर आश्रित है। डैम का पानी पीने योग्य नहीं है। अतिक्रमण के कारण डैमो में आनेवाली पानी के शिराओं को बंद कर दिया गया हैं जिसके कारण समुचित मात्रा में पानी डैम तक नहीं पहुंच पा रही है, वर्षा जल बर्बाद हो रहा है, और गर्मी में लोगों को पानी के संकट का सामना करना पड़ता है। अगर यही हाल रहा तो राँची के आसपास लगे उद्योग पानी के आभाव में बंद हो जायेंगे साथ ही लोगों को शुद्ध पेयजल नहीं मिल पायेगा। 


समारोह में वरिष्ठ कलाकार रामानुज शेखर को कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए समानित किया गया। 

स्वागत भाषण युगांतर भारती के सचिव श्री आशीष शीतल ने किया, विषय प्रवेश, युगांतर भारती के कार्यकारी अध्यक्ष, श्री अंशुल शरण ने किया, धन्यवाद ज्ञापन श्री रवि प्रकाश एवं मंच संचालन दामोदर बचाओ आंदोलन के संयोजक श्री प्रवीण सिंह ने किया।


 स्वर्णरेखा नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए इसे पांच भाग में  बांटने की जरूरत : सरजू राय

100 करोड़ खर्च करने के बावजूद भी हरमू नदी बद् से बद्तर स्थिति में

 रांची शहर में 50 से अधिक तालाब जो अब लुप्त हो चुके

 जल बचाने का संदेश देने से ज्यादा जरूरी है समाज के शक्तिशाली मेधावी बुद्धिजीवी वर्ग को इस पर ज्यादा ध्यान देने की 



यही हाल रहा तो रांची के आसपास लगे उद्योग पानी के अभाव में बंद हो जाएंगे साथ ही लोगों को शुद्ध पेयजल नहीं मिल पाएगा जो चिंतनीय है! 

No comments:

Post a Comment

Post Bottom Ad