*पत्रकार पुत्र पर हुए जानलेवा हमले में एक सप्ताह बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी में पुलिस नाकाम* - Ideal India News

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*पत्रकार पुत्र पर हुए जानलेवा हमले में एक सप्ताह बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी में पुलिस नाकाम*

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शासन सत्ता के दबाव में पुलिस हुई शिथिल, हाथ पर हाथ धरे बैठी है पुलिस।

आक्रोशित पत्रकारों ने राज्यपाल, मुख्यमंत्री, अपर मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, मंडल आयुक्त समेत तमाम अधिकारियों से लगाई न्याय की गुहार।

जौनपुर 
 इलेक्ट्रॉनिक मीडिया संघ के पूर्व अध्यक्ष आजतक चैनल के जिला प्रतिनिधि पत्रकार राजकुमार सिंह के पुत्र प्रियांजुल सिंह पर हुए जानलेवा हमले में एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली है। सत्ता दल के दबाव में पुलिस ने शिथिलता अख्तियार कर लिया है जिससे एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी आरोपित अपराधी बेखौफ घूम रहे हैं और अब अपराधी पत्रकार एंव पत्रकार के परिजनों पर मुकदमा वापस लेने के लिए दबाव बनाकर एससी-एसटी के फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी दे रहे हैं।

जिससे आक्रोशित होकर जौनपुर के पत्रकारों ने राज्यपाल, मुख्यमंत्री, अपर मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, मंडल आयुक्त वाराणसी, अपर पुलिस महानिदेशक वाराणसी, पुलिस महानिरीक्षक वाराणसी एंव पुलिस अधीक्षक जौनपुर को शिकायती पत्र भेजकर अपराधियों पर गैंगस्टर एक्ट में कार्रवाई करते हुए गिरफ्तारी एंव पत्रकार व उनके परिजनों की सुरक्षा की गुहार लगाई है। पत्रकारों ने शासन प्रशासन को आगाह किया है कि होली तक अपराधियों की गिरफ्तारी नहीं हुई तो बड़े आन्दोलन के लिए बाध्य होंगे।

मालूम हो कि बीते 19 मार्च को दिन में करीब 11 बजे मामूली विवाद को लेकर न्यू भगौती कालोनी निवासी प्रियन्जुल सिंह पुत्र पत्रकार राजकुमार सिंह की टीबी हास्पिटल के पास आराध्या फर्नीचर हाऊस पर ध्रुव कुमार सिंह उर्फ गुड्डा और उसके भाई श्रवण सिंह उर्फ शालू 8-10 अज्ञात लोगों के साथ धावा बोलकर लाठी, डण्डा और लोहे की राड से जानलेवा हमला कर दिया फिर दुकान में रखे फर्नीचर को तोड़ डाला। मनबढ़ बदमाश जाते समय कैश बाक्श में रखा 43 हजार रूपये नगदी भी लूटकर फरार हो गये। दिन दहाड़े हुई इस वारदात से पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल कायम हो गया है। सूचना मिलते ही लाइन बाजार थाने की पुलिस मौके पर पहुंच कर लहूलुहान व्यापारी को जिला अस्पताल ले गयी। दवा इलाज के बाद पीड़ित की तहरीर पर पुलिस ने ध्रुव कुमार सिंह उर्फ गुड्डा और उसके भाई श्रवण सिंह उर्फ शालू समेत आठ अज्ञात लोगों के खिलाफ भादवि की धारा 147, 148, 307, 395, 427, 452 एंव 7 सीएलए एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करके आरोपियों की तलाश में जुट गयी थी लेकिन घटना के एक सप्ताह बाद भी पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार नहीं कर पाई जो पुलिस की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़ा कर रही है।

घटना के 7 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस ने अभी तक नामजद अभियुक्तों को गिरफ्तार नहीं किया। इस संदर्भ में जनपद के सभी पत्रकारों ने बीते दिवस जिलाधिकारी से मिलकर अभियुक्तों की गिरफ्तारी एवं विधिक कार्यवाही का आग्रह किया था। जिस पर डीएम ने दो से तीन दिन में गिरफ्तार करने का आश्वासन दिया था इसके बाद भी अभियुक्तों पर पुलिस मेहरबान है। अब हमलावर दबंग बदमाश मुकदमा वापस लेने का दबाव बनाने के लिए पत्रकार व उनके परिवार के खिलाफ एससी-एसटी का फर्जी मुकदमा गढ़ने की साजिश रच रहे हैं। पुलिस संरक्षण में हमलावर खुलेआम घूम रहे हैं और पत्रकार व उनके परिवार को जान से मारने की धमकी दे रहे हैं।

हमलावर इसके पूर्व भी कई घटनाओं को अंजाम दे चुके हैं। समस्त पत्रकार साथी ने जिला प्रशासन को यह भी आगाह किया है कि होली पर्व तक यदि अभियुक्तों पर गैगेस्टर एक्ट में कार्यवाही व गिरफ्तारी नहीं हुई तो हम पत्रकार गण को मजबूर हो कर संघर्ष का रास्ता अख्तियार कर लेंगे जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी।

इस दौरान मुख्य रूप से शशिराज सिन्हा, राकेश पाण्डेय, शम्भू सिंह, राजेश श्रीवास्तव, रामजी जायसवाल, अनिल दुबे, यशवंत गुप्ता, मोहम्मद अब्बास, बृजेश यदुवंशी, विश्व प्रकाश श्रीवास्तव, दीपक सिंह, अजीत सिंह, अजीत बादल, विनोद विश्वकर्मा, सुशील स्वामी, इशू सिंह, राजन मिश्रा, राज सैनी, मोहन लाल, विद्याधर राय, वीरेंद्र पाण्डेय, सुधाकर शुक्ला, दीपक मिश्रा, इशरत हुसैन, संतोष श्रीवास्तव, अलोक सिंह, आदित्य सिंह, मनीष श्रीवास्तव, संजय शुक्ला, जुबैर अहमद, वीरेंद्र गुप्ता, तामीर हुसैन, अखिलेश श्रीवास्तव, नीरज सिंह, दिवाकर दुबे, छोटेलाल सिंह, मसूद अहमद समेत भारी संख्या में पत्रकार मौजूद रहे।

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