ना डराती है, ना रोमांचित करती है भूमि पेडनेकर की दुर्गामती - Ideal India News

Post Top Ad

ना डराती है, ना रोमांचित करती है भूमि पेडनेकर की दुर्गामती

Share This
#IIN


नई दिल्ली

 राजनीतिक भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग पर हिंदी सिनेमा में अनगिनत फ़िल्में आयी हैं। नेता अपनी सत्ता और सियासत को बचाने के लिए किस तरह सरकारी तंत्र का ग़लत इस्तेमाल करते हैं, यह भी हिंदी सिनेमा के दर्शक सैकड़ों दफ़ा पर्दे पर देख चुके हैं। शुक्रवार को अमेज़न प्राइम पर रिलीज़ हुई भूमि पेडनेकर की दुर्गामती इसी परम्परा की एक बेहद कमज़ोर कड़ी है, जिसका ट्रीटमेंट हॉरर-थ्रिलर की तरह रखा गया। हालांकि, दुर्गामती दोनों ही मोर्चों पर विफल रहती है।

दुर्गामती, तेलुगु-तमिल फ़िल्म भागमती का रीमेक है, जिसका निर्देशन जी अशोक ने किया, जिन्होंने ओरिजिनल फ़िल्म की बागडोर संभाली थी। दुर्गामती के सह निर्माताओं में अक्षय कुमार भी शामिल हैं, जो ख़ुद तमिल फ़िल्म कंचना 2 के रीमेक लक्ष्मी में लीड रोल निभा चुके हैं। दुर्गामती देखने के बाद एक सवाल ज़हन में कौंधता है, दक्षिण भारत में हिट फ़िल्म बनाने के बाद उन्हीं निर्दशकों को हिंदी में फ़िल्म बनाते वक़्त आख़िर क्या हो जाता है कि वो करिश्मा ग़ायब रहता है? जिन लोगों ने भागमती देखी है, वो इस सवाल को अधिक समझ पाएंगे।

दुर्गामती की कहानी अरशद वारसी के किरदार ईश्वर प्रसाद से शुरू होती है। ईश्वर प्रसाद एक साफ़-सुथरी छवि वाला बेहद ईमानदार नेता और जल संसाधन मंत्री है। ईश्वर प्रसाद के इलाक़े में मंदिरों से पुरानी मूर्तियां लगातार चोरी हो रही हैं, जिससे लोग नाराज़ हैं। एक सभा में ईश्वर प्रसाद वादा करता है कि अगर 15 दिनों के अंदर मूर्तियां बरामद नहीं हुईं तो वो राजनीति से संन्यास ले लेगा और अपने एक विश्वासपात्र को अपना उत्तराधिकारी भी घोषित कर देता है।

No comments:

Post a Comment

Post Bottom Ad