*सहायक संभागीय परिवहन कार्यालय जौनपुर मे फिटनेस बनाने मे धांधली का खुलासा* - Ideal India News

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*सहायक संभागीय परिवहन कार्यालय जौनपुर मे फिटनेस बनाने मे धांधली का खुलासा*

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Santosh Agarhari and Vijay Agarwal  


*ट्रक अन्य ज़िले मे जौनपुर मे हो गया फिटनेस और मिल गई एन.ओ.सी* 
*शिराज-ए-हिन्द न्यूज़ ग्रुप का फिटनेस बनाने मे धांधली का दूसरा खुलासा* 
जौनपुर 
सहायक संभागीय परिवहन कार्यालय (ए.आर.टी.ओ ऑफिस) कर्मचारियों और दलालों की मिली भगत से फिटनेस के नाम पर मोटी रकम लेकर सिर्फ खाना पूर्ति कर गाड़ियों के चेचिस नंबर को फार्म पर उतारने के बाद बिना गाड़ी चेक किये, बिना देखें फिटनेस को सही बता कर सम्बन्धित बाबू व दलाल के द्वारा एन.ओ.सी दे दी जाती है चाहे कामर्शियल गाड़ी ऑफिस में आये या किसी अन्य ज़िले मे हो डॉक्यूमेंट सही हो या न हो, गांधी जी की फ़ोटो देखते ही सम्बन्धित बाबू की कलम एन.ओ.सी बनाने के लिए अपने आप चलने लगती है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ए.आर.टी.ओ ऑफिस जौनपुर मे भ्रष्टाचार इस तरह कायम है कि फिटनेस के नाम पर गाड़ियों का आना कम होता है जो गाड़ियां जनपद में होती हैं उन गाड़ियों का सिर्फ चेचिस नंबर लेकर उनको एनओसी दे दी जाती है जिसकी एक रकम तय है 500 से 1000 और जो गाड़ी किसी अन्य जिले में रहती है उसका चेचिस नंबर गाड़ी मालिक द्वारा पहले ही उतारकर दलाल को फॉर्म भर कर दे दिया जाता है और उसको दलाल के द्वारा 2000 से 3000 रूपये लेकर एन.ओ.सी वाहन मालिक को दे दी जाती है। जबकि शासनादेश यह है की जब तक गाड़ी ऑफिस में ना आए और संबंधित बाबू के द्वारा गाड़ी की जांच पुरी तरह से न कर जाए तो उसे एन.ओ.सी नहीं दी जा सकती लेकिन जनपद जौनपुर में दलालों का वर्चस्व इतना कायम है कि गाड़ी जनपद में हो या ना हो एन.ओ.सी वाहन मालिक को प्रोवाइड करा दिया करते हैं। जबकि शासनादेश के अनुसार हर कमर्शियल गाड़ियों के हर एक पार्ट्स जैसे कि इंडिकेटर, इंजन ऑयल, तेल पाइपलाइन जांच, टायर अगर घिसे हैं तो वह भी खतरनाक माने जाते हैं टायर घिसे होने पर अगर ब्रेक लगाए जाएंगे तो वह खतरनाक साबित होंगे इसके अलावा एयर प्रेशर, डैश बोर्ड पर लगे इंडिकेटर, हेड लाइटें इंडिकेटर, सीट बेल्ट, प्रदूषण प्रमाण ,बजर, फर्स्ट एड एवं वाहनों के सभी कागजों की जांच बारकोड से की जानी चाहिए तब मानक पूरा होता है और वाहन मालिक को एन.ओ.सी दी जा सकती है। लेकिन सूत्रों के द्वारा बताया गया है कि इसके बावजूद भी कमर्शियल गाड़ियां जौनपुर में ना होते हुए भी संबंधित बाबू द्वारा  उस गाड़ी का फिटनेस सिर्फ चेचिस नंबर पर ही करा कर अपनी सीट पर बैठ कर दलाल के माध्यम से वाहन मालिक को एनओसी प्रदान कर दिया करते हैं शायद ए.आर.टी.ओ ऑफिस के फिटनेस संबंधित बाबू को यह नहीं पता की गाड़ी में लगे सभी पार्ट्स का क्या हाल है जिसका परिणाम यह होता है कि गाड़ी में लगे पार्ट्स खराब होने से एक्सीडेंट का खतरा पैदा हो जाता है जिसका जिम्मेदार किसे माना जाए संबंधित बाबू दलाल या फिर संबंधित विभाग के मुखिया को जिसकी नाक के नीचे भ्रष्टाचार का यह खेल* *ए.आर.टी.ओ ऑफिस जौनपुर में खुलेआम खेला जा रहा है अब इसे रोक पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन लगता है यह इसलिए कहा जा रहा है कि जिसे गांधीजी की शक्ल से मोहब्बत हो गई है वह और किसी से मोहब्बत नहीं कर सकता तो इस विभाग में सभी कर्मचारियों को गांधी जी से नहीं बल्कि गांधी जी की फोटो लगे कागज से मोहब्बत है किसी की जिंदगी या मौत से नहीं।*
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*तीसरे अंक मे होगा बिना परीक्षा के बने लर्निग लाइसेंस का खुलासा*

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