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पांच सौआदिवासी बेटियों कीअबुआ राज में लूटीअस्मत

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कमल कुमार कश्यप 
रांची झारखंड बिहार

 पांच सौआदिवासी बेटियों कीअबुआ राज में लूटीअस्मत


 कटघरे में विधि- व्यवस्था: कहीं ट्यूशन से लौटते हुए तो कहीं मेला देखकर घर आती बेटियों का दरिंदों ने अपहरण कर किया सामूहिक दुष्कर्म

 अबुआ राज यानी अपना राज आदिवासियों के बीच अबुआ राज आ गया का नारा देने वाले राज्य सरकार के शासन में विधि व्यवस्था वेपटरी हो चुकी है| भोले- भाले आदिवासी ही सबसे ज्यादा अपराध की घटनाओं का शिकार हो रहे हैं |राज्य में पिछले 11 महीने में 500 से अधिक आदिवासी बेटियों की अस्मत लूटी है |इनमें कई सामूहिक दुष्कर्म का शिकार हुई तो कई की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई| राज्यपाल के आदेश पर 1 साल के भीतर दुष्कर्म की शिकार बच्चियों महिलाओं की शैक्षणिक स्थिति जाति धर्म उम्र आदि के आधार पर गणना की गई तो यह चौंकाने वाले तथ्य सामने आया है| बेटियों की तार तार होती इज्जत ने प्रदेश में इस कदर दहशत कायम कर दिया कि रात तो रात दिन के उजाले में भी बिटिया घरों से निकलने से हिचक रही हैं| अब तो बच्चियों के परिजनों भी तब तक सशंकित रहते हैं जब तक काम और पढ़ाई आदि के सिलसिले में घरों से निकली बेटी सही सलामत वापस घर लौट जाए| गत वर्ष अक्टूबर महीने में साहिबगंज में एक 17 साल की नाबालिग आदिवासी लड़की के साथ छह युवकों ने सामूहिक दुष्कर्म किया था| दुमका में 12 साल की एक नाबालिग आदिवासी बच्ची के ट्यूशन लौटते वक्त दरिंदों ने अगवा किया और दुष्कर्म कर उसके बाद उसकी हत्या कर दी| दुमका में भी मेला देखकर लौट रही एक आदिवासी महिला से 17 युवकों ने सामूहिक दुष्कर्म किया था, इस घटना में शामिल सभी आरोपी शराब के नशे में थे आरोपियों ने आदिवासी महिला को उसके पति के सामने बंधक बनाकर सामूहिक दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया था| खूंटी के कर्रा  में भी एक नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म की घटना ने साबित कर दिया कि राज्य में कानून का राज खत्म हो चुका है| 4 दिन पूर्व ही रांची के मांडर  में एक नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आ चुका है| इस तरह की घटनाओं के निशाने पर कम पढ़ी-लिखी युवतियां महिलाएं हैंवानों के निशाने पर रहती हैं| राज्य में जनवरी से लेकर सितंबर महीने तक दुष्कर्म के मामलों में शैक्षणिक आधार पर भी ब्यौरा खंगाला गया तो इस दरमियान दुष्कर्म की शिकार 247 बच्चियां -महिलाएं  अशिक्षित थी| इसके अतिरिक्त दुष्कर्म की शिकार 494 महिलाएं- बच्चियां मैट्रिक से कम नीचे पढ़ी-लिखी मिली| जबकि 283 बच्चियां- महिलाएं मैट्रिक पास निकली है| हैवानियत का शिकार कम पढ़ी-लिखी महिलाएं- युवतियां- बच्चियां बनी है|

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