दुर्भाग्यपूर्ण! भारत की संस्कृत को भारत मे ही स्थान नही - Ideal India News

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दुर्भाग्यपूर्ण! भारत की संस्कृत को भारत मे ही स्थान नही

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आतपी मिश्रा
प्रयागराज


भारत देश मे जन्मे बराहमिहिर महर्षि कणाद आदि लोग थे जिन्हीने विज्ञान ही नही अपितु ज्योतिष से भी भारत तथा विश्व को मुखातिब कराया और उनके शिक्षा का जो मूल स्वरूप था वो संस्कृत थी! संस्कृत के बारे में नाशा में भी अध्ययन किया और उसने बताया ये पूर्ण रूप से वैज्ञानिक भाषा है ,परन्तु भारत की संस्कृत को भारत मे ही स्थान नही और ऐसा तब हो रहा जब हिन्दू छबि की सरकार केंद्र में हो इस सरकार ने संस्कृत के अच्छे ससंस्थान खुलवाए पर बस दिखावे के लिए सरकार को ये नही पता यदि भाषा बोलचाल के प्रयोग में न हो तो मृत हो जाती है फिर उसे जीवित होने में अथक प्रयाश करना होता है संस्कृत के केंद खुलवाकर संस्कृत को जीवित नही कर सकते संस्कृत को आम बोलचाल की भाषा मे लाना है तथा लोगो को उसके प्रति सजक करना है ये काम बहुत आसान है पर इस काम को बहुत कठिन मानकर सरकार बिना मतलब के कदम उठाती है और लाखों करोङो खर्च करके फिर शांत हो जाती है ये पैसे खर्च नही बल्कि भाषा के सूदखोरों में जाति है सरकार संस्कृत को लेकर बहुत कदम उठा सकती जिसमे नाट्य मंचन गांव गाँव जाकर संस्कृत का  प्रचार करे और लोगो से रूबरू कराए पर सरकार कभी भी नही चाहती कि संस्कृत फिर से जीवित हो ।

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