बढ़ती अपहरण एंव यौन शोषण सम्बन्धित घटनाए - Ideal India News

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बढ़ती अपहरण एंव यौन शोषण सम्बन्धित घटनाए

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जावेद आलम राजेश गुप्ता गुरैनी जौनपुर
बढ़ती अपहरण एंव यौन शोषण सम्बन्धित घटनाए    




                    आए दिन अपहरण की घटनाएं बढ़ती जा रही है यहाँ तक ही यह कार्य रूक नहीं रहा है छोटे छोटे बच्चों का अपहरण करके कभी फिरौती न मिलने के कारण हत्या कर दी जा रही है तो कभी हत्या करने के बाद भी फिरौती के मांग की जा रही है इस तरह की घटना सप्ताह पूर्व जौनपुर में घटित हुई थी इस पूरी घटना में पड़ोस में रहने वाले किशोर वय के लड़कों ने किया कयी वर्ष पूर्व वाराणसी में और मिर्जापुर के रहने वाले एक अभियंता के छोटे बच्चे को उन्हीं के ड्राइवर ने अपहरण करके निर्मम हत्या कर दिया था ऐसी अनेकों घटनाए आए दिन हो रही है जो रूकने का नाम नहीं ले रही है इस तरह कभी छोटी छोटी बच्चियों तो कभी स्कूल जाती बच्चियों तो वायस्क महिलाओं के साथ सामूहिक रूप से दुष्कर्म करने के बाद मार कर फेंक दिया जाता है  बदायूं की एक 50 वर्षीय महिला जो मंदिर में पूजा करने जाती है उसके साथ कुछ घटित होता है वह दिल दहला देने वाला है हाथरस की घटना को लोग अभी भूलें नहीं है पिछले सालों में जम्मू में एक नाबालिग लड़की के साथ भी दरिंदगी करके उसे मंदिर परिसर में फेंक दिया गया था कुछ महीनों पूर्व आंध्र प्रदेश में जो घटना हुई थी वह दिल दहला देने वाली थी पुलिस दरिंदगी करने वालों के साथ देश की जनता खुलकर स्वागत किया लेकिन कानून की दृष्टि से वह ठीक नहीं था लेकिन जनमानस में अब इसी तरह के न्याय की जरूरत पर विचार होने लगा है लेकिन कभी कभी पुलिस जो अपराधी नहीं है अपनी वाहवाही लूटने निरपराध लोगों को भी इनकांऊटर कर देती है अपना मत है कि इस तरह की बढ़ती घटनाओं के पीछे  नंबर 1- न्याय में देरी  2 बाद में चलकर गवाहों का गवाही देने से मुकर जाना 3- जब लोग छूट जाते हैं और बाहुबली बनकर राजनीतिक में पांव पसारने लगते हैं ये किशोर लोग इस चमक धमक से प्रभावित होकर पहले तो छोटे मोटी घटनाए करते हैं  और आगे चलकर संगठित गिरोह के चंगुल में फसकर  बड़ी बड़ी वारदाते करने लगते हैं सिलसिला चलने लगता है माँ बाप बेफिक्र रहते हैं कि मेरा बच्चा पढ़ने जाता है उसकी खोज खबर ही नहीं लेता धन की भूख यौन पिपासा भी इस तरह की घटनाओं के पीछे हाबी होती जा रही है अन्तिम बात यह कि विकृत मानसिकता जब हाबी हो जाती है तब ब्यक्ति पूर्णतः अन्धा हो जाता है उसे सही गलत की परवाह नहीं होती है इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए यह आवश्यक है कि कम से कम मंडल स्तर पर पूरे देश भर में केवल इसी तरह की घटनाओं सुनवाई के लिए त्वरित न्यायालयो का गठन होना चाहिए पाठ्यक्रमों मानवीय मूल्यों की शिक्षा की व्यवस्था हो  अभिवावक भी सदैव अपने बच्चों की निगरानी करते रहे तो ऐसी घटनाओं पर कुछ हद तक लगाम लगायी जा सकती है         

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