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डीएम व डीआइजी को भी फर्जी जज बनकर भेजा था शिकायती ईमेल

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Dr. Tanveer Ahmad and Parshant Shukla
रुदौली (अयोध्या) 
 फर्जी जज बनकर अफसरों को गुमराह करने वाले तौसीफउल हक आला अफसरों पर भी खूब रौब गांठता था। वह जालसाजी का शातिर मास्टर माइंड है। कभी जज बनना तो कभी जज का व्यक्तिक सहायक बनकर अफसरों से रुपये ऐंठना उसका पेशा बन चुका था। तौसीफउल हक अब तक तीन बार जेल जा चुका है। जेल से छूटते ही वह फिर से फर्जी जज बनकर नए शिकार की तलाश करने लगता। राजधानी के थाना चिनहट अतंर्गत तिवारी गंज, उत्तरधौना निवासी तौसीफउल हक ने अयोध्या के जिलाधिकारी व पुलिस उपमहानिरीक्षक को एक कार चालक की लापरवाही से ओवरटेक करके अभद्रता करने के बावत हाईकोर्ट के जज का व्यक्तिक सहायक बनकर ई-मेल भेजा था। फिर नाम बदला और स्वयं फर्जी न्यायाधीश बन गया। वाहन स्वामी शाद शेख अहमद निवासी मलिकजादा को व्हाट्सप मैसेज व फोन काल से ब्लैकमेल करके रुपये व कार की मांग करने लगा। रुपये लेने वह लखनऊ से रुदौली आया और पुलिस के हत्थे चढ़ गया। गिरफ्तारी के बाद भी वह सीओ व प्रभारी निरीक्षक को गुमराह करता रहा। सीओ डॉ. डीके यादव ने जब उससे पूछताछ की तो उच्च न्यायालय का अधिवक्ता बताकर रौब गांठना शुरू किया। जब पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ की तो वह टूट गया। सीओ के मुताबिक वर्ष 2017 में अपने को सरकारी लॉ अफसर के पद पर नियुक्त करने के लिए न्यायाधीश का सेक्रेटरी बनकर फोन किया था। इस प्रकरण में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा था। जून 2020 में फर्जी न्यायाधीश बनकर अपने दोस्त समरेंद्र राय उर्फ रिकू राय के मुकदमें में अंतिम रिपोर्ट लगाने के लिए सहायक पुलिस आयुक्त विभूति खंड लखनऊ पर दबाव बनाया था, जिसके बाद विभूति खंड पुलिस ने तौसीफउल हक व समरेंद्र राय को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। वर्ष 2018 में एक डॉक्टर से मारपीट की शिकायत पर जीआरपी देहरादून ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा था।

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