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अखिल भारतीय काव्य मंच की गोष्ठी में खूब बही देश प्रेम रस धारा

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Dr. Pramod Vachaspati
अखिल भारतीय  काव्य  मंच की गोष्ठी में खूब  बही देश प्रेम रस धारा
जौनपुर 


अखिल भारतीय काव्य मंच द्वारा आयोजित काव्य गोष्ठी बैजनाथ आईटीआई कॉलेज कन्हईपुर  के प्रांगण में संपन्न हुई जिसमें  भाग लेने वाले कवियों ने देश प्रेम से संबंधित रचनाएं पढ़कर लोगों को देश प्रेम  से भावविभोर कर दिया! 





 डॉक्टर संजय सिंह सागर की ये पंक्तियां सीमा के प्रहरियों को सादर समर्पित रहीं
 'बांधकर सबसे पहले कफन सर पर हम, 
सबसे पहले मरे थे वतन के लिए! 
 डॉक्टर नंदलाल समीर ने निम्न पंक्तियां पढ़कर लोगों में हिंदुस्तान की छवि को ऊंचा करने के साथ-साथ तिरंगे का मान बढ़ाने का प्रयास किया! 
"सर कटाने को देशहित अरमान रखते हैं 
झुके कभी न तिरंगा इसका ध्यान रखते हैं! 
आजाद भगत बिस्मिल की संताने हम, 
दिल की हर धड़कन में हिंदुस्तान रखते हैं !"







मशहूर शायर आशुतोष पाल ने सरहद की सीमा के रक्षकों के सम्मान में यह पंक्तियां पढ़ी! 
सरहदों के पास जो इंसान है  ,
मेरी नजरों में मेरा भगवान है! 

शायर मोनिस जौनपुरी  की इन पंक्तियों ने काफी तालियां बटोरी

"जो है मौकापरस्त मौके पर ,बहती गंगा में हाथ धो लेगा! 

कवित्री डॉक्टर सीमा सिंह की इन पंक्तियों की लोगों ने  मुक्त कंठ से सराहना किया !
"मैं स्वरा हूं मुझे मत बांधो, निशब्द की वेणी पर,! 
मुझ में  सरगम मुझ में गुंजन, मुझे वेद मंत्र बन कर बिखरने दो! "

कवि अमृत प्रकाश की ये कटाक्ष भरी पंक्तियां काफी प्रेरणादायक रही! 
"लखनऊ में मकान है तो क्या, यह जरूरी नहीं अदब भी हो!

वरिष्ठ शायर आशिक जौनपुरी की इन पंक्तियों को लोगों ने ताली बजाकर स्वागत किया! "अगर चे ये पत्थर तराशे न जाते ,
तो  बुत भी ये सुंदर कभी हम न पाते !"

डॉक्टर अंगद कुमार राही  की पंक्तियां बाल भ्रूण हत्या के प्रति इशारा करने के लिए काफी थी !
"मैं नन्हीं सी जान हूं मैं दुनिया से अनजान हूं! 
तू ममता की देवी तो मैं प्रकृति का वरदान हूं!!

गांव गिराव की भाषा में जब राजेश कुमार पांडे एडवोकेट ने काव्य पाठ किया   तो लोगों ने भाव विभोर होकर सराहा !
मेहरी के तन पे सोहै रेशमी चुनरिया! 
माई के मोहाल भई फटहीलुगरिया !!"

कवित्री कविता अंशुमान ने जब अपने कंठ से
" ऐ मेरे वतन के लोगों जरा आंख में भर लो पानी "
का गीत गाया तो सब लोग तारीफ करने से अपने को रोक नहीं पाए !साथ ही उनकी यह पंक्तियां भी काबिले तारीफ रहीं! 
"हर आहट गुमान  होता है जैसे तुम हो! 
और तुम हो कि ना जाने कहां गुम हो !!"
कार्यक्रम के प्रारंभ में वरिष्ठ कवित्री गीता श्रीवास्तव ने सरस्वती मां का वंदना किया तथा एक गजल के माध्यम से सब का दिल जीत लिया! 
"सितम तुम्हारा सितम नहीं है !
नजर में यह मोहतरम नहीं है!!

हिंदी उर्दू के मशहूर शायर डॉक्टर पी सी विश्वकर्मा ने जब यह पंक्तियां पड़ी तो लोग वाह-वाह करते रह गए !
"बज्म  से तूने तो निकाल दिया! 
 बेखुदी ने मुझे संभाल दिया !!
अपनी रुसवाईयों के सदके मैं, 
आसमां तक मुझे उछाल दिया !!
अखिल भारतीय काव्य मंच के अध्यक्ष एवं उस्ताद  शायर असीम मछली शहरी ने सामाजिक व्यवस्था पर तंज कसते हुए पंक्तियां पढी!
 "यही तो बात है वह दोस्तों में शामिल है , 
हमारी पीठ पर जो वार करना चाहता है!!

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ शायर
 इं आर पी सोनकर ने अपनी उत्कृष्ट प्रस्तुति के माध्यम से सबका मन मोह लिया! इस कार्यक्रम की अध्यक्षता आर पी सोनकर ने किया! मुख्य अतिथि के रुप में डॉक्टर पी सी विश्वकर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में फूलचंद भारती ने शोभा बढ़ाया! संस्था के अध्यक्ष असीम मछली शहरी ने सभी कवियों और शायरों को माल्यार्पण करके स्वागत किया तथा बैजनाथ आईटीआई कॉलेज के प्रबंधक विजय बहादुर सिंह को साधुवाद एवं धन्यवाद देते हुए उनके स्वस्थ जीवन की कामना किया! संपूर्ण कार्यक्रम का संचालन संस्था के संस्थापक डॉ प्रमोद वाचस्पति ने किया!

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