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बॉम्बे हाईकोर्ट-पैंट की जिप खोलकर हाथ पकड़ना यौन शोषण नहीं

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Mayank Jha and Anil Gupta

मुंबई

मुंबई उच्च न्यायालय (नागपुर पीठ) की न्यायमूर्ति पुष्पा गनेडीवाला ने वीरवार को एक फैसला सुनाते हुए कहा कि पॉक्सो एक्ट के तहत बच्ची का हाथ पकड़कर पैंट की जिप खोलना यौन शोषण के दायरे में नहीं आता। ये आईपीसी की धारा 354ए (आई) के तहत यौन उत्पीड़न के दायरे में आता है। मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ की न्यायमूर्ति पुष्पा गनेडीवाला ने एक 50 वर्षीय व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बात कही। सत्र न्यायालय ने उस व्यक्ति को 12 साल से कम उम्र की बच्ची के साथ छेड़छाड़ का दोषी मानते हुए उसे पांच वर्ष की सजा सुनाई थी व उसके अपराध को यौन शोषण के गंभीर मामले की श्रेणी में रखा था।

यह शिकायत उक्त लड़की की मां ने दर्ज कराते हुए कहा था कि व्यक्ति ने अपनी पैंट की जिप खोलकर लड़की का हाथ पकड़ रखा था। पिछले सप्ताह 19 जनवरी को न्यायमूर्ति पुष्पा गनेडीवाला ने ही यौन शोषण के एक और मामले में फैसला सुनाते हुए कहा था कि किसी गतिविधि को यौन शोषण की श्रेणी में तभी माना जाएगा, जब त्वचा से त्वचा का संपर्क हुआ हो। सिर्फ जबरन छूना यौन शोषण की श्रेणी में नहीं आता। उनके उस फैसले की चौतरफा आलोचना शुरू होने के बाद बुधवार को सर्वोच्च न्यायालय ने उनके इस फैसले के अमल पर रोक लगा दी थी। अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने सर्वोच्च न्यायालय में कहा था कि मुंबई उच्च न्यायालय का यह फैसला उचित नहीं है।

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