राष्ट्र रत्न अटल बिहारी बाजपेई एवं महामना मदन मोहन मालवीय की जयंती संयुक्त रूप से मनाई गई - Ideal India News

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राष्ट्र रत्न अटल बिहारी बाजपेई एवं महामना मदन मोहन मालवीय की जयंती संयुक्त रूप से मनाई गई

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कमल  कुमार कश्यप रांची
दिनांक: 25 दिसम्बर, 2020
भारतीय जनता मोर्चा के केन्द्रीय अध्यक्ष, श्री धर्मेन्द्र तिवारी ने आज भारत के पूर्व प्रधानमंत्री, ‘भारत रत्न’ श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के शुभ अवसर पर झारखण्ड विधान सभा परिसर, राँची अवस्थित श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रतिमा पर माल्र्यापण एवं श्रद्धासुमन अर्पित किया साथ ही भारतीय संस्कृति के परिचायक, बनारस हिन्दु विश्वविद्यालय के संस्थापक, विराट व्यक्त्वि के धनी, महामना पं. मदनमोहन मालवीय की जंयती पर उन्होंने नामकुम सिदौरल अवस्थित पार्टी कार्यालय में श्री मालवीय जी की तस्वीर पर माल्र्यापण कर श्रद्धासुमन अर्पित किया। 




उन्होंने कहा कि हमारा यह प्यारा राज्य झारखण्ड आज 20 वर्षों का हो चुका है, यह श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की ही देन है, उन्हीं के सार्थक प्रयासों के कारण ही बिहार से पृथक होकर झारखण्ड राज्य का निर्माण हुआ है।
श्री तिवारी ने कहा कि राष्ट्रधर्म, राजधर्म और उनसब से बढ़कर व्यवाहारिक धर्म की परिभाषा गढ़ने वाले, अटल जी केवल एक नेता के रूप में ही परिभाषित नहीं है, बल्कि एक कवि, लेखक, जुझारू पत्रकार, अपने उसूल के पक्के और अत्यंत ऊँचे चरित्र वाले निजी गरिमा से ओत-प्रोत संवेदनशील व्यक्ति के रूप में भी परिभाषित है। श्री तिवारी ने कहा कि अटली जी मेरे आदर्श रहे है। स्कूली शिक्षा के समय से ही मैं उनकी कविताएं पढ़ता था। उनकी एक कविता के दो पंक्तियाँ इस तरह है ‘होकर स्वतंत्र मैंने कब चाहा था, कर लूँ जग को गुलाम। मैंने तो सदा सीखा है करना अपने मन को गुलाम’ यह पंक्ति मुझे बेहद पंसद है।
श्री तिवारी ने कहा कि अटल जी आधुनिक भारतीय राजनीति के पुरोधा थे। सन् 1951 में डाॅ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी द्वारा स्थापित जनसंघ में एक साधारण कार्यकत्र्ता की तरह शामिल हुए और अपनी विशिष्ट भाषण शैली, विनम्रता के धनी, विराट व्यक्तित्व, कुशाग्र बुद्धि के बल पर संसदीय गरिमा का निर्वहन करते हुए दो बार भारत के प्रधानमंत्री बनकर देश को गौरान्वित किया। इन्होंने विज्ञान की महता को समझते हुए भारत को परमाणु शक्ति से सम्पन्न राष्ट्र बनाया। इन्होंने लाल बहादुर शास्त्री के जग प्रसिद्ध नारा ‘जय जवान, जय किसान’ को और प्रभावशाली बनाते हुए उसमें ‘जय विज्ञान’ भी जोड़ा। वाजपेयी जी के चुंबकीय व्यक्त्वि, राजनीतिक कौशल और कुशल नेतृत्व गुणों आदि का अद्भुत करिश्मा था कि पहली बार 24 दलों का गठबंधन सरकार उनके नेतृत्व में पूरे पाँच वर्ष तक शासन कर सकी। उन्होंने कहा कि राजनीतिक पटल पर कई नेतागण आते जाते रहे है, कई का उद्भव भी होगा, परन्तु भारतीय राजनीति में अटल नाम की सार्वभौमिकता एवं शाश्वतता ध्रुवतारा की तरह हमेशा कायम रहेगा। हमें नेताद्वय के जीवन से प्रेरणा लेते हुए उनके दिखलाये मार्ग पर चलना चाहिए। श्री तिवारी के साथ नेताद्वयगण को माल्र्यापण एवं श्रद्धासुमन अर्पित करनेवालों में मुख्य रूप से डाॅ. ओम प्रकाश पाण्डेय, श्री अशोक कुमार सिन्हा, श्री राजीव रंजन सिंह, श्री अशोक ठाकुर सहित भारतीय जनता मोर्चा के अनेक पदाधिकारी एवं वरिष्ठ कार्यकर्ता मौजूद थे।

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