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कोरोना का नया स्ट्रेन बच्चों के लिए भी ख़तरनाक साबित हो सकता है

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DR RJ GUPTA

 एक तरह जहां इंग्लैंड में कोरोना वायरस की वैक्सीन लगाने का पहला चरण शुरू हो चुका है, वहीं दूसरी तरफ देश के कई शहरों में कोविड-19 का एक नया स्ट्रेन सामने आया है। हालांकि, ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि कोरोना वायरस ने म्यूटेट किया हो, लेकिन वायरस के नए स्ट्रेन ने मेडिकल एक्सपर्ट्स की चिंता ज़रूर बढ़ा दी है। ऐसा माना जा रहा है कि कोरोना का ये नया वैरिएशन पहले से 70 प्रतिशत ज़्यादा संक्रामक है, हालांकि ये स्ट्रेन अभी तक ज़्यादा ख़तरनाक साबित नहीं हुआ है।  

शोधकर्ता और मेडिकल एक्सपर्ट्स कोरोना के म्यूटेशन के पीछे के कारण को समझने की कोशिश में लगे हैं। साथ ही ऐसी भी रिपोर्ट्स आई हैं कि ये नया वैरिएंट बच्चों के लिए बड़ा ख़तरा साबित हो सकता है। अभी तक कोरोना वायरस बच्चों के लिए घातक साबित नहीं हुआ था।

पिछले साल के दौरान, वैश्विक रूप से कोविड के कई उपभेदों यानी स्ट्रेन की पहचान की गई है। वायरस का वर्तमान म्यूटेशन, जो अब ब्रिटेन का सबसे आम वायरस संस्करण है, में वायरस के स्पाइक प्रोटीन में परिवर्तन हैं, जो शरीर पर एक हमले को शुरू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कई केस स्टडीज़ ने सुझाव दिया है कि सबसे बड़ा अंतर इस बात से पड़ सकता है कि म्यूटेशन सिस्टम इम्युनिटी गार्नरिंग सेल्स के साथ कैसे इंटरैक्ट करता है- जो प्रथम-स्तर की सुरक्षा प्रदान करते हैं।

शोधकर्ताओं का कहना है कि नया B.1.1.7 उत्परिवर्तन में ORF8 जीन का एक छोटा संस्करण है, जो एंटीजेनेसिटी को बदल सकते हैं, यानी प्रणाली में प्रतिरक्षा एंटीबॉडी द्वारा मान्यता के लिए महत्वपूर्ण है, और पिछले उपभेदों की तुलना में तेजी से और अधिक शक्तिशाली रूप से प्रतिरक्षा प्रणाली पर हमला करने में सक्षम हो सकता है। शायद यह भी एक कारण हो सकता है कि इसे सुपर संक्रामक स्ट्रेन कहा जा रहा है।

कोरोना का नया स्ट्रेन बच्चों पर कैसे करता है असर?

न्यू एंड इमर्जिंग श्वसन वायरस थ्रेट सलाहकार समूह (NERVTAG) की एक प्रोफेसर और वीरोलॉजी की विशेषज्ञ, वेंडी बार्कले के अनुसार, उत्परिवर्तन (Mutation) के कारण अब वायरस के लिए मानव कोशिकाओं में प्रवेश करना आसान हो गया है और अब इसलिए वयस्कों की तरह बच्चों के संक्रमित होने की संभावना भी अधिक हो गई है। बार्कले का कहना है कि नए म्यूटेशन की वजह से वयस्कों के साथ अब बच्चों के संक्रमित होने के मामले भी बढ़ेंगे।

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