*बालिका की अस्पताल में लापरवाही से मौत* *परिजन बवाल मचाकर दिये धरना* *आयुष्मान कार्ड़ से नही किया इलाज - Ideal India News

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*बालिका की अस्पताल में लापरवाही से मौत* *परिजन बवाल मचाकर दिये धरना* *आयुष्मान कार्ड़ से नही किया इलाज

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Dharmendr Seth jaunpur
*बालिका की अस्पताल में लापरवाही से मौत*
*परिजन बवाल मचाकर दिये धरना*
*आयुष्मान कार्ड़ से नही किया इलाज*




जौनपुर। लाइन बाजार थाना क्षेत्र के सिटी स्टेशन रोड पर स्थित ईसा हास्पिटल में चार दिन से भर्ती बालिका की इलाज के दौरान मौत के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा  दिया। परिजन अस्पताल  पेट्रोल गिराकर आग लगाने जा रहे थे जिसे पुलिस ने विफल कर दिया। परिजन चिकित्सक पर लंबी रकम लेकर इलाज में लापरवाही करने का आरोप लगा रहे हैं। बताया गया है कि मडियाहूं कोतवाली क्षेत्र के रामनगर विधमवा गांव निवासी संजय उर्फ विमलेश कुमार तिवारी की 9 वर्षीया पुत्री कुमापरी गोल्डी तिवारी गाय के पट्टे में फंसकर सिर में गंभीर चोट लग गयी थी, 15 नवंबर दोपहर में घायल को उपचार के लिये इस निजी चिकित्सालय में लाया गया था। तब से इसका उपचार चल रहा था। परिजन का कथन है कि बुधवार रात्रि लगभग 11 बजे उक्त बालिका की मृत्यु हो गई थी लेकिन चिकित्सक उसे मृत घोषित न कर उसे वेंटीलेटर पर ले गये और गुरूवार सुबह 9 बजे उसके मौत होने की बात बतायी। बालिका की मौत की खबर सुनकर परिजन आक्रोशित हो उठे और अस्पताल के सामने धरने पर बैठ गये। परिजन चिकित्सक और ईशा हास्पिटल के विरूद्घ नारेबाजी भी करने लगे। परिजन का यह मानना है कि यदि उसकी हालत गंभीर थी तो चिकित्सक द्वारा उसे जवाब दे देना चाहिये ताकि वह कहीं और ले जाकर उसका इलाज करवाते। इलाज के दौरान चिकित्सक ने 50 हजार रूपये से अधिक रूपया ले लिया । 4 घंटे तक धरने पर जमे रहे परिजन चिकित्सक के खिलाफ एफआईआर और कार्यवाही की मांग कर रहे थे। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचे इंस्पेक्टर लाइन बाजार ने चिकित्सक के खिलाफ तहरीर लिया और लाश को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिये भेज दिया। इस संबंध में अस्पताल के न्यूरो सर्जन डा. राहुल श्रीवास्तव ने बताया कि बच्ची का इलाज बड़े ही मेहनत से किया जा रहा था और होने वाले खतरे के बारे में परिजन को पहले ही बताया जा चुका था, जिसके कारण उपचार किया जा रहा था।  इस अस्पताल में मनमानी का आरोप लगाया गया है कि  मृतका के परिजन द्वारा आयुष्मान कार्ड से इलाज करवाना चाहते थे लेकिन चिकित्सक द्वारा आयुष्मान कार्ड को स्वीकार नहीं किया गया और मनमानी रकम वसूली गयी और बालिका के मरने के बाद उसे बताया नहीं गया।

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