जय जवान, जय किसान, का नारा देकर शास्त्री जी ने एक धागे में पूरे देश को पिरोया--- धर्मेंद्र तिवारी - Ideal India News

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जय जवान, जय किसान, का नारा देकर शास्त्री जी ने एक धागे में पूरे देश को पिरोया--- धर्मेंद्र तिवारी

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कमल कुमार कश्यप 
रांची झारखंड
 जय जवान, जय किसान, का नारा देकर शास्त्री जी ने एक धागे में पूरे देश को पिरोया--- धर्मेंद्र तिवारी





बापू की 151वीं जयंती, मोहराबादी पर भारतीय जनता मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष धर्मेंद्र तिवारी ने दी श्रद्धांजलि

श्री तिवारी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की आज 151वीं जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित कर कहा कि भारतीय इतिहास में गाँधी जी का नाम सबसे प्रेरणादायक महापुरूषों में शुमार है। उन्होंने देश को आजादी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। ऐसे में पूरा देश उनके जन्मदिवस पर उन्हें नमन करता है और देशवासी उनके सत्य और अहिंसा के पग पर चलने का दोबारा संकल्प लेता है। 

सत्य, अहिंसा और प्रेम का उनका संदेश समाज में समरसता और सौहार्द का संचार करके समस्त विश्व के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है। वे संपूर्ण मानवता के प्रेरणा-स्रोत बने हुए हैं। देशवासियों को राष्ट्रपिता के सत्य और अहिंसा के पग पर चलने का संकल्प दिलाते हुए धर्मेन्द्र तिवारी ने कहा, 'आइए, गांधी जयंती के पुनीत अवसर पर हम सब पुन: यह संकल्प लें कि हम सत्य और अहिंसा के मार्ग का अनुसरण करते हुए, राष्ट्र के कल्याण और प्रगति के लिए सदैव समर्पित रहेंगे और एक स्वच्छ, समृद्ध, सशक्त व समावेशी भारत का निर्माण करके गांधी जी के सपनों को साकार करेंगे। मोहराबादी स्थित  
गांधी जी को श्रद्धांजलि अर्पित करने में भारतीय जनता मोर्चा के बिमलेश कुमार सिंह, नरेश तिवारी, सुधाकर चौबे, अशोक ठाकुर, राहुल रंजीत एवं प्रतीक शर्मा मुख्य रूप से उपस्थित थे। दूसरी ओर देश के ओजस्वी प्रधानमंत्री रहे लाल बहादुर शास्त्री जी का भी आज जयंती इस अवसर पर लाल बहादुर शास्त्री के प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर याद किया गया । श्री तिवारी ने कहा उन्होंने देश को निडर बनाया और आत्मनिर्भर भी जय जवान जय किसान का नारा देकर एक धागे में पूरे देश को पिरोया सब साथ मिलकर जाति धर्म भूल कर देश हित में देश सेवा में सभी लगे शास्त्री जी ने एक नई दिशा देश को दी युवाओं को और वैज्ञानिकों को आत्मनिर्भर बनने के लिए उन्होंने बहुत सारे छोटे-छोटे कार्य प्रारंभ किए आज ऐसे देश भक्तों को हम सभी नमन करते हैं कम अंतराल में ही उन्होंने देश को नई सीख देकर चले गए। 
ऐसा व्यक्तित्व था हमारे लाल बहादुर शास्त्री जी का की जिनकी एक आवाज पर लाखों भारतीयों ने छोड़ दिया था एक वक्त का खाना।

एक वाकया और है जब 26 सितंबर, 1965 का है। भारत-पाकिस्तान युद्ध खत्म हुए अभी चार दिन ही हुए थे। जब प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने दिल्ली के रामलीला मैदान में हजारों लोगों के सामने बोलना शुरू किया तो वो कुछ ज्यादा ही अच्छे मूड में थे। तालियों की गड़गड़ाहट के बीच शास्त्री जी ने ऐलान किया, "सदर अयूब ने कहा था कि वो दिल्ली तक चहलकदमी करते हुए पहुंच जाएंगे। वो इतने बड़े आदमी हैं। लहीम शहीम हैं। मैंने सोचा कि उन्हें दिल्ली तक चलने की तकलीफ क्यों दी जाए। हम ही लाहौर की तरफ बढ़ कर उनका इस्तकबाल करें।" ये वही शास्त्री साहब है। जिनके पाँच फीट दो इंच के कद और आवाज का अयूब ने एक साल पहले मजाक उड़ाया था। 

आज देश के युवाओं को गाँधी एवं शास्त्री जी के व्यक्तित्व को अपने मे उतारना चाहिए।

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