लोकनायक जयप्रकाश नारायण "जेपी" के जयंती के अवसर पर उन्हें याद किया गया - Ideal India News

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लोकनायक जयप्रकाश नारायण "जेपी" के जयंती के अवसर पर उन्हें याद किया गया

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कमल कुमार कश्यप
 रांची झारखंड

जेपी बाबू विदेशी सत्ता से देशी सत्ता, देशी सत्ता  से व्यवस्था, व्यवस्था से व्यक्ति में परिवर्तन, परिवर्तन से नैतिकता के पक्षधर थे-- धर्मेंद्र तिवारी



भारतीय जनता मोर्चा के रांची स्थित केंद्रीय कार्यालय में लोकनायक जयप्रकाश नारायण "जेपी" के जयंती के अवसर पर उन्हें याद किया गया और उनके चित्र पर पर श्रद्धा सुमन अर्पित किया गया।

 भारतीय जनता मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष श्री धर्मेंद्र तिवारी ने कहां की जेपी ने भारतीय राजनीति को ही नहीं बल्कि आम जनजीवन को एक नई दिशा दी, जैसे- भौतिकवाद से अध्यात्म, राजनीति से सामाजिक कार्य तथा जबरन सामाजिक सुधार से व्यक्तिगत दिमागों में परिवर्तन। जेपीजी का जीवन राष्ट्रीय चेतना तथा संघर्ष यात्रा रहा। वे विदेशी सत्ता से देशी सत्ता, देशी सत्ता से व्यवस्था, व्यवस्था से व्यक्ति में परिवर्तन और व्यक्ति में परिवर्तन से नैतिकता के पक्षधर थे। वे समूचे भारत में ग्राम स्वराज्य का सपना देखते थे और उसे आकार देने के लिए अथक प्रयत्न भी किए। उनका संपूर्ण जीवन भारतीय समाज की समस्याओं के समाधानों के लिए प्रकट हुआ।

जेपी सदैव ही राजनीतिक सत्ता से दूर रहना चाहते थे। सार्वजनिक जीवन में जिन मूल्यों की स्थापना वे करना चाहते थे, वे मूल्य बहुत हद तक देश की राजनीतिक पार्टियों को स्वीकार्य नहीं थे। क्योंकि ये मूल्य राजनीति के तत्कालीन ढांचे को चुनौती देने के साथ-साथ स्वार्थ एवं पदलोलुपता की स्थितियों को समाप्त करने के पक्षधर थे, राष्ट्रीयता की भावना एवं नैतिकता की स्थापना उनका लक्ष्य था, राजनीति को वे सेवा का माध्यम बनाना चाहते थे। मैं यह बात बड़ी दृढ़ता से कह सकता हूं की भारतीय जनता मोर्चा जेपी के वि दलचारों को आदर्श मानकर उत्पन्न एक राजनीतिक पार्टी बनी है। जिसका उद्देश्य सत्ता पाना नहीं बल्कि सत्ता के नशे में मदहोश होने वाले राजनेताओं को उनका कर्तव्य याद दिलाना और कर्तव्य याद ना आए तो “ सिंहासन खाली करो कि जनता आती है” ही हमारा जवाब रहेगा।

जे पी के जीवन की विशेषताएं और उनके व्यक्तित्व के आदर्शों को आज के संघर्ष भरे कोविड-19 के काल में हमें अपने जीवन में शामिल करने की आवश्यकता है।जालियांवाला बाग नरसंहार के विरोध में ब्रिटिश शैली के स्कूलों से पढ़ाई छोड़कर बिहार विद्यापीठ से उच्च शिक्षा पूरी की। कोविड-19 का वायरस चाइना की देन है और जो कोई मौका नहीं छोड़ता भारत को आँख दिखाने का इस ड्रैगन का आँख निकालने का समय आ गया है। अगर हम जे पी के आदर्शो पर चलें और भारतीय निर्मित वस्तुओं का सिर्फ उपभोग करें तो इससे चीन क्या ऐसी जितने भी विदेशी ताकतें जो भारत का हित नहीं चाहती है को हम भारतीय अपने काबिलियत से जवाब दे पाएंगे बल्कि साथ ही साथ हमारे देश को भी और मजबूत कर पाएंगे। 

इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से अंशु ल शरण, सुधाकर चौबे, प्रतीक शर्मा, राजेश, अशोक ठाकुर, , श्याम बिहारी, राजीव रंजन सिंह, बबलू सिंह, उदय कुमार दुबे आदि

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