सामंती मानसिकता पर प्रहार करते रहे प्रेमचंद ! ...... 84 वी पुण्यतिथि पर काव्य एवं विचार गोष्ठी - Ideal India News

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सामंती मानसिकता पर प्रहार करते रहे प्रेमचंद ! ...... 84 वी पुण्यतिथि पर काव्य एवं विचार गोष्ठी

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#IIN
PatSantosh Kumar  Nagar Sonbhadra

सामंती मानसिकता पर प्रहार करते रहे प्रेमचंद !
...... 84 वी पुण्यतिथि पर काव्य एवं विचार गोष्ठी ।
------- गीत , गजल , मुक्तक से चहका फोर यस पाठशाला का मालवीय सभागार ।





सोनभद्र । इस शताब्दी के महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद की कहानियां अपने समय और समाज के मर्मस्पर्शी कथा चित्र 
हैं । ये सच्ची और जीवंत तस्वीरें
मानवीय अस्मिता की रक्षा की
प्रबल पक्षधर हैं । 



हिन्दी- उर्दू कथा- साहित्य की कर्मभूमि बदलकर , यथार्थवादी कायाकल्प
करने वाले अमर कथाकार प्रेमचंद की रची रचनाएँ बदलते
जमाने में  परिवर्तित रूप में ही
सही प्रासंगिक हैं । कलम के सिपाही धनपत राय श्रीवास्तव
असहयोग आंदोलन में सक्रिय हो
कर सब- डिप्टी इंस्पेक्टर ऑफ स्कूल के पद को छोड़ कर सरस्वती प्रेस की स्थापना कर हंस पत्रिका की शुरुआत की । करीब दर्जन भर उपन्यास और लगभग सवा तीन सौ कहानियां रचकर प्रेमचंद 8 अक्टूबर , 1936 को
शरीर से तो विदा हो गए लेकिन अपनी रचनाओं से आज भी रचे
बसे हैं ।
      उपरोक्त विचार सोनसाहित्य
संगम की ओर से सहिजन खुर्द ग्राम पंचायत के राजस्व गांव मुसही स्थित डॉक्टर जय नारायण
तिवारी द्वारा स्थापित फोर यस पाठशाला के महामना मालवीय सभागार में गुरुवार को आयोजित
काव्य एवं विचार गोष्ठी में विद्वानों
ने कही ।
        आंचलिक कवि सम्मेलन
        ................................
 सोनांचल नव निर्माण समिति से सम्बद्ध सोनसाहित्य संगम की 
साहित्यिक यात्र का एक और कामयाब आयोजन दो नए साहित्यकार उत्कर्ष चुर्क और बीएचयू के छात्र संजीव कुमार
सिंह को जाने माने कवियों के साथ मंच साझा करने का अवसर
प्रदान कर अपने लक्ष्य को हासिल
किया । ऐतिहासिक आंचलिक
कवि सम्मेलन की रौनक रहे भारत के विभिन्न अखिलभारतीय
कवि सम्मेलनों में अपने नव गीतों
से मनमोहन वाले कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे सहायक जिला
वन अधिकारी मनमोहन मिश्र ।
अति विशिष्ट अतिथि सीमेंट निगम के चुर्क चुनार डाला फैक्ट्री
के पूर्व  लेखाधिकारी प्रख्यात साहित्यकार चंद्रकांत द्विवेदी ने
अपनी कालजयी रचनाओं में  
सीता- राम , राधा- कृष्ण से उपमा
देकर जिस श्रृंगार रस से पगी सौंदर्य बोध की रचनाओं को वात्सल्य रस से नहलाकर सुनाया
उससे नए कवियों को एक सीख भी मिली । विशिष्ट अतिथि अपने
जमाने के मकबूल शायर  एम ए सफक साहब ने उम्र की उतरनी में भी देश की धड़कन से आबद्ध
गजलों से महफ़िल को राष्ट्रीयता
के रंग में रङ्ग दिया था ।  इन दोनों
वयो वरिष्ठ साहित्यकारों को संस्था के निदेशक साहित्यकार पत्रकार मिथिलेश प्रसाद द्विवेदी
मधुर , संयोजक राकेश शरण मिश्र एडवोकेट और आयोजक
राजेश द्विवेदी राज ने माल्यार्पण
अंगवस्त्रम भेंट कर जब ' साहित्य
गौरव सम्मान ' प्रदान कर रहे थे उस समय सभागार में उपस्थित सभी साहित्यकारों की तालियों की गड़गड़ाहट से वातावरण
आह्लादित हो गया था । अखिल भारतीय मंचो के जाने माने कवि
ईश्वर विरागी के गीत , संस्था के उपनिदेशक कवि सुशील राही के
व्यंग , दिवाकर द्विवेदी मेघ विजयगढ़ी का कटाक्ष , अमरनाथ
अजेय जी का मुक्तक , वाराणसी से पधारे रामनरेश पाल के गीत ,
शिवनरायन शिव की ग़ज़ल , विजयविनित का यथार्थ जनवादी
रचना , सरोज सिंह की वाणी वंदना ,  सुनील  चौचक का हास्य , दिलीप सिंह दीपक की कविता से आंचलिक कवि सम्मेलन देर शाम तक चलता रहा
और काव्य प्रेमी डटे रहे । निदेशक श्री द्विवेदी मधुर गोरखपुरी और संयोजक कवि
राकेश शरण मिश्र की रचनाएं
भी लोगो को प्रभावित की ।
       सोन गौरव सम्मान
      ..........................
 सँस्कृति साहित्य के संवर्धन में जुटी साहित्यिक संस्था सोनसाहित्य संगम की ओर से हिन्दी साहित्य के विकास में योगदान देने वाले  वरिष्ठ ग़ज़लकार शिवनरायन शिव , रॉबर्ट्सगंज , रामनरेश पाल वाराणसी ,  दिवाकर द्विवेदी मेघ
विजय गढ़ी और सरोज कुमार सिंह रॉबर्ट्सगंज को सोन गौरव
सम्मान से सम्मानित किया गया ।
ईश्वर विरागी को प्रशस्तिपत्र प्रदान
किया गया ।
        ऐसे हुआ कार्यक्रम
       ..........................
 माँ सरस्वती , भारत रत्न महामना मदन मोहन मालवीय और मुंशी प्रेमचंद के चित्र पर
माल्यार्पण कर दीप प्रज्वलित किया गया । वाणी वंदना के बाद
आयोजक  राहुल प्रियंका गांधी सेना के प्रदेश महासचिव , आई एफ , डब्लू जे के पार्षद कवि व
राजनीतिज्ञ राजेश कुमार द्विवेदी
राज ने शब्द प्रसून से स्वागत करते हुए विषय प्रवर्तन किए ।
मीडिया फोरम ऑफ इंडिया (ट्रस्ट ) के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष मिथिलेश प्रसाद द्विवेदी
की अध्यक्षता में मुख्य अतिथि
गीतकार मनमोहन मिश्र सहायक
जिला वन अधिकारी मुख्य अतिथि थे । अतिविशिष्ट अतिथि
चंद्रकांत द्विवेदी पूर्व लेखाधिकारी
सीमेंट निगम डाला चुर्क चुनार और विशिष्ट अतिथि एम ए सफक , ईश्वर विरागी , सुशील राही और शिवनरायन शिव थे ।
मुख्य वक्ता विंन्ध्य सँस्कृति शोध समिति  उत्तर प्रदेश ट्रस्ट के निदेशक पत्रकार साहित्यकार दीपक कुमार केसरवानी ने विस्तार से प्रेमचंद के कृत्तित्व
व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला ।
संयोजक राकेश शरण मिश्र ने
आभार व्यक्त करते हुए अपनी
रचना से आयोजन में चार चांद
लगा दिए । संचालन शिक्षक और पत्रकार भोलानाथ मिश्र ने 
किया । इस अवसर पर स्नातक
निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी से विधान
परिषद सदस्य पद के लिए किश्मत आजम रहे इंजीनियर अनिल मिश्र , उत्कर्ष द्विवेदी , फोर यस पाठशाला से जुड़े लोग ,
डाला के मनोज तिवारी समेत रेणुकूट और दक्षिणाचल के कई
पत्रकार , साहित्यकार ,और कवि
सभागार में साक्षी रहे ।


इनसेट 


अपने अध्यक्षीय उदबोधन में
मिथिलेश द्विवेदी ने ' शतरंज के खिलाड़ी ' कहानी का उल्लेख करते हुए कहा , '  प्रेमचंद ने आदमी की इस मानसिकता पर
तीखा प्रहार किया है कि दुनियाँ
में आग लगती रहे , उन्हें सिर्फ अपने मज़े से मतलब है । इस कहानी के मिर्जा जी और मीर
साहिब शतरंज खेलते रहे , आखिर अंग्रेज फ़ौज ने लखनऊ पर कब्जा कर लिया और दोनों खेल खेल में लड़ पड़े , फिर एक
दूसरे की मौत के घाट उतार 
दिए । वाजिदअली शाह का समय
था , लखनऊ विलासिता के रङ्ग में डूबा हुआ था । श्री द्विवेदी ने कहा
बदली हुई स्थिति में परिस्थितियां
कमोबेश वैसी की वैसी ही जान पड़ती हैं ।

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