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अर्जुन का कार्पण्य दोष- डाँ.विजय कुमार पाठक

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 डाँ.विजय कुमार पाठक





      अर्जुन का कार्पण्य दोष..
 कार्पण्यदोष ग्रस्तअर्जुन को,
क्या,सचमुच करुणा ने घेरा था.?
या,दया आरही थी,
परिजनो पर,
जो,जान गवाँने आए थे,
झलक रहा था अभिमान
बात से,
परिणाम भी देख रहा था
चाह रहा था,
जिन्हे,
दिखाना अपना
भुजबल.
नही रहे ,
वे ही,तो,
क्यों करे,
समर आयोजन?
करुणा में कहाँ
वर्ण व्यवस्था .?
कहाँ, सम्बंध आतेहै.?
ह्रदय विकल होजाता
करुणा में,
अश्रुजल छा जाते हैं।
लेकिन ,
दया रहती
अर्थ पूर्ण
भाव अलग
आ जाते है.
करुणा थी
कृष्ण की आँखो में
जो,
पग
अश्रुजल से
धो डालें
भूल गए.
परात पानी की
खोज रहे थे,
पद के छाले..।
           
       डाँ.विजय कुमार पाठक
G,93,एल. आई.जी.ऋषिनगर
  उज्जैन (म.प्र.)
संपर्क.. 94071 69323

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