महामारी में लोगों के लिये प्रेरणास्रोत बनीं कोरोना योद्धा नीमा पन्त - Ideal India News

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महामारी में लोगों के लिये प्रेरणास्रोत बनीं कोरोना योद्धा नीमा पन्त

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महामारी में लोगों के लिये प्रेरणास्रोत बनीं कोरोना योद्धा नीमा पन्त
मिसेज यूनिवर्स एशिया जोन सहित तमाम प्रतियोगिताओं की विजेता हैं नीमा
डाक्टरेट की उपाधि से नवाजी गयीं नीमा २६ वर्षों से पीजीआई में हैं कार्यरत


मासूम पुत्री से दूर रहकर ६ महीने से कोरोना पीड़ितों की कर रहीं सेवा
‘अपने लिये जीये तो क्या जीये, तू जी ए दिल जमाने के लिये’ स्लोगन के माध्यम से दीं नसीहत


लखनऊ। विश्व के इतिहास की सबसे बड़ी महामारी के रूप में आये कोरोना वायरस को लेकर जहां हर आम व खास खौफजदा है जिसके चलते न कोई किसी के पास जा रहा है और न ही किसी की मदद के लिये आगे आ रहा है, वहीं इन सबसे अलग कुछ लोग अपना व अपने परिवार की परवाह किये बगैर कोरोना योद्धा के रूप में आगे आ गये हैं।


ऐसे योद्धा अपने मासूम बच्चों तक से पिछले ६ माह से अलग रहकर जानलेवा बीमारी कोरोना से जूझ रहे लोगों की सेवा कर रहे हैं। ऐसे योद्धाओं में एक नाम नीमा पन्त नामक आयरन लेडी की है जो संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (पीजीआई) लखनऊ में सीनियर नर्सिंग आफिसर के पद पर कार्यरत हैं।


‘यह क्या कि चले और आ गयी मंजिल, मजा तो तब है कि पांव थकें, फिर भी चलें’ स्लोगन को अपने जीवन का सार बनाने वाली नीमा पन्त ने अपने कैरियर की शुरूआत कालेज और नर्सिंग कानपुर से की जिसके पहले प्राइमरी शिक्षा सरस्वती ज्ञान मन्दिर कानपुर से किया। इसके बाद एमजी गर्ल्स कालेज से इण्टर करने के बाद उनका चयन बीएससी नर्सिंग ऑनर्स के लिये हो गया।
‘अपने लिये जीये तो क्या जीये, तू जी ए दिल जमाने के लिये’ स्लोगन को लोगों से अपने जीवन में उतारने की नसीहत देने वाली नीमा पन्त पिछले २६ वर्षों से पीजीआई में मरीजों की सेवा कर रही हैं। पिछले ६ महीने से कोरोना से जूझ रहे लोगों की सेवा करने वाली नीमा जी का मानना है कि वर्तमान की विश्वस्तरीय समस्या को देखते हुये ऐसा लगता है कि ईश्वर ने शायद इसी के लिये मुझ जैसे लोगों को धरती पर भेजा है। पिछले ६ महीने से अपनी १२ वर्षीय पुत्री से अलग रहने वाली नीमा जी का मानना है कि आज हम मां-बेटी एक-दूसरे से मिलने के लिये भले ही तड़प रहे हैं लेकिन हमारी यह तड़प किसी के लिये मरहम का काम कर रही है।
बता दें कि अपनी ममत्व को अपने कलेजे में छिपाने वाली नीमा पन्त मिसेज नार्थ इण्डिया, मिसेज प्लानेट दिवा, मिसेज यूनिवर्स एशिया जोन सहित तमाम नामचीन खिताब से नवाजी जा चुकी हैं जिसके चलते उन्हें ग्लोबल जस्टिस वर्ल्ड, विश्व संवाद परिषद, दि वर्ल्ड पीपुल्स फोरम सहित तमाम संस्थानों का ब्राण्ड एम्बेसडर बनाया गया है। वहीं डायनेमिक पीस रेस्क्यू मिशन इण्टरनेशनल सहित तमाम विश्वस्तरीय संस्थानों ने उन्हें डाक्टरेट जैसी विशेष उपाधि से भी विभूषित किया है।
लगभग २१ वर्षों से थिएटर की शक्ल न देखने वाली आयरन लेडी नीमा जी अपने जीवन का रोल मॉडल अपनी माता श्री को मानती हैं। हालांकि आर्मी में आफिसर रहे उनके पिता भी उनके आदर्श हैं। इसके अलावा फलोरेस कैटिगिल, मदर टेरेसा को मैरी कोम के रूप में इसलिये आदर्श मानती हैं, क्योंकि इन लोगों ने जिसमें भी खुशी मिली, उसी में रहकर समाज के लिये कुछ अलग हटकर कीं। अपने भाई के अलावा ससुराल के सभी लोगों से मिले प्यार को साझा करते हुये नीमा जी का मानना है कि उनके जीवन में सबसे अधिक सहयोग उनके पति डा. सुदीप कुमार जो पीजीआई में प्रोफेसर कार्डियोलॉजिस्ट हैं, से मिला जो हर कदम पर उनके साथ खड़े रहे जिससे उनका हौंसला निरन्तर बढ़ता है।
अल्मोड़ा में जन्मीं नीमा जी दिल्ली में वर्ष २०१९ में आयोजित प्रतियोगिता मिसेज यूनिवर्स चुनी गयीं। इसके अलावा इसी वर्ष लखनऊ में आयोजित प्रतियोगिता में मिसेज नार्थ इण्डिया की विनर बनीं। कालेज ऑफ नर्सिंग से बैचलर ऑफ साइंस ऑनर्स करने के बाद नीमा ने कोलकाता के बीएम बिड़ला हार्ट रिसर्च इन्स्टीट्यूट से कार्डियक नर्सिंग में १८ महीने का कोर्स किया। वर्ष १९९५ में पीजीआई लखनऊ में नर्सिंग अधिकारी के रूप आकर उन्होंने कार्डियोलॉजी आईसीयू में काम किया जहां वर्ष १९९६ में वह डा. सुदीप कुमार की जीवनसाथी बन गयीं।
इस बाबत एक भेंट के दौरान नीमा पन्त ने बताया कि आजकल कोरोना वायरस जैसी महामारी के कारण हमारी ड्यूटी और कार्यशैली में कई बदलाव किये गये हैं। ड्यूटी के दौरान जो पीपीई किट हम पहनते हैं, उसको ८ घण्टे तक पहनना पड़ता है। इस दौरान हम अपनी व्यक्तिगत आवश्यकताओं को भी पूरा नहीं कर पाते हैं। इस दौरान तमाम दिक्कतें भी उत्पन्न होती है, फिर भी हम पूरी मुस्तैदी से अपने कर्तव्य का पालन करते हैं। हमारी ड्यूटी लगातार १५ दिन की होती है। इस दौरान हम अपनी व्यक्तिगत जीवन की सामान्य दिनचर्या से पूरी तरह से कटे रहते हैं। हम अपने परिवार, विशेषकर छोटे बच्चों से पूरी तरह से अलग रहते हैं।
फिलहाल मुझे हमेशा इस बात का एहसास रहता है कि इस अभूतपूर्व संकट में मेरा पहला कर्तव्य मेरे मरीज हैं जिनकी सेवा ही मेरा परम कर्तव्य व धर्म है। मैं और मेरी पूरी टीम पूरी तन्मयता से अपने मरीजों की हर प्रकार से सेवा करते हैं। इस दौरान मैं मरीजों को लगातार हिम्मत बंधाते हुये उनका मनोबल बढ़ाती रहती हूं। मेरी हमेशा यही कोशिश रहती है कि मेरे मरीज यहां से स्वस्थ होकर अपने परिवार में जायं।
अन्त में आने वाली पीढ़ी के लिये संदेश देते हुये उन्होंने कहा कि बहुत अच्छी बात है ब्यूटी पैजेंट व मॉडल बनना परन्तु अगर आप समाज के लिये कुछ करते है और अपना शिक्षा नहीं रोकते हैं तो आपकी खूबसूरती कई गुना बढ़ जायेगी। साथ ही आने वाली पीढी के लिये उन्होंने संदेश दिया कि वह अपने घर-परिवार के साथ समाज व देश के लिये जरुर कुछ करें, ताकि मनुष्य के रुप में धरती पर आना उनका सार्थक हो जाय।

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