*गर्भ में मारी गयी अजन्मी बेटियों को धर्म की नगरी काशी में मोक्ष का अधिकार मिला - Ideal India News

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*गर्भ में मारी गयी अजन्मी बेटियों को धर्म की नगरी काशी में मोक्ष का अधिकार मिला

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Dr U S Bhagat Varanasi
*गर्भ में मारी गयी अजन्मी बेटियों को धर्म की नगरी काशी में मोक्ष का अधिकार मिला* वाराणसी के दशाश्वमेध घाट पर आगमन सामाजिक संस्था द्वारा 5 हजार अजन्मी बेटियों के मोक्ष की कामना से वैदिक रीति रिवाज के साथ श्राद्ध किया गया। आचार्य पण्डित दिनेश शंकर दुबे के आचार्यत्व में पांच ब्राह्मणों द्वारा ये अनुष्ठान कराया गया । संस्था अब तक कुल 31 हजार 5 सौ बेटियों को मोक्ष का अधिकार दिलाया है।


बताते चले कि ये वो अभागी और अजन्मी बेटियां है जिन्हे उन्ही के माता पिता ने जन्म से पहले ही कोख में मार दिया। इन्ही अभागी बेटियों को संस्था के इस अनूठे आयोजन 'आखरी प्रणाम' के जरिये मोक्ष का अधिकार मिला। संस्था के सदस्यों के साथ ही घाट पर उपस्थित लोगों ने भी इन बेटियों को पुष्पांजलि अर्पित की।
    संस्था के संस्थापक सचिव डॉ संतोष ओझा ने बताया कि आगमन लगातार छः वर्षो से उन अजन्मी बेटियों की आत्मा की शांति के लिए श्राध्द का आयोजन करते आ रहे हैं। संस्था का साफ मानना है कि गर्भपात महज एक ऑपरेशन नही बल्कि हत्या है। ऐसे में कोख में मारी गई उन बेटियों को भी मोक्ष मिले और समाज से ये कुरीति दूर हो इसके लिए हम लोग ये आयोजन करते हैं।

  श्राद्धकर्म में आचार्य दिनेश शंकर दुबे के साथ  रोहित पांडेय , बजरंगी पांडे, सीताराम और किशन महराज ने किया ।  संस्था की ओर से महिला विंग की अध्यक्ष  रचना श्रीवास्तव जादूगर जितेंद्र,किरण,राहुल गुप्ता,हरिकृष्ण प्रेमी,दीपिका,साधना कुमार,टिंकू ,मनीष शंकर दुबे,राजीव रंजन मिश्र,सूरज,मौर्या,धमेंद्र प्रजापति शामिल रहे ।

आगमन - परिचय -
      आगमन सामाजिक संस्था सन् 2001 से "बेटी बचाओं - बेटी बढ़ाओ " अभियान के तहत अनेकानेक कार्यक्रम आयोजित करती आ रही है । सृष्टि को ईश्वर द्वारा दी हुई नायाब तोहफा " बेटी " को व्यतिगत स्वार्थ और अदूरदर्शिता की वजह से जन्म लेने से पूर्व ही गर्भ म1ें ही सदा सदा के लिए सुला दिया जाता है जो एक महापाप है। शिव की नगरी काशी में भी लिंग अनुपात में बड़ा अन्तर दिखता है जिसमें समानता लाने के लिए संस्था लगातार विभिन्न माध्यमो से जिनमें नुक्क्ड़ नाटक, रैली, वाद विवाद प्रतियोगिता ,चित्र कला प्रतियोगिता, पम्प्लेट्स, पोस्टर, स्टिकर एवं विभिन्न साहित्य के माध्यम के साथ ही सोशल साइट्स के मदद से भी जन - जन को जागरूक करने का प्रयास करती है। आगमन संस्था मूलतः व्यतिगत सहयोग से संचालित होती है।

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