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मच्छर जनित रोगों के प्रति लापरवाही पड़ सकती है जान पर भारी-डा ए के सिंह

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अजय कुमार मिश्रा आजमगढ़
मच्छर जनित रोगों के प्रति लापरवाही पड़ सकती है जान पर भारी
लोगों को किया आगाह, लक्षण दिखें तो दिखाएं कुशल चिकित्सक को – डॉ एके सिंह
कोरोना के साथ-साथ डेंगू, मलेरिया आदि से भी करें बचाव, रहे सतर्क
घरों के आसपास न होने दें जलभराव, नष्ट करें जलभराव वाले श्रोतों को


आजमगढ़, 30 अगस्त 2020 ।
कोरोना काल में कोविड-19 संक्रमण के बढ़ते खतरे से साथ ही साथ मच्छरों से होने वाली बीमारियों डेंगू, मलेरियाम, मस्तिष्क ज्वर से बचाव के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता है, क्योंकि इससे रोग-प्रतिरोधक क्षमता में कमी आती है और गंभीर स्थिति होने पर जान तक जा सकती है।
  वेक्टर बार्न डिजीज के नोडल अधिकारी एवं अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (एसीएमओ) डॉ एके सिंह ने बताया कि डेंगू, मलेरिया, मस्तिष्क ज्वर और फाइलेरिया सभी मच्छरों के काटने से होने वाली बीमारियां हैं। डेंगू का मच्छर दिन में काटता है और काटने के कुछ दिन बाद बुखार आता है। जोड़ों और आंखों के पीछे में दर्द रहता है। मुंह, नाक और मल के रास्ते खून जाने लगता है। इनमें से जरा सी लापरवाही भारी पड़ जाती है और डेंगू से जान तक चली जाती है। वहीं मस्तिष्क ज्वर से भी जान जाने का डर तो रहता ही है। कभी-कभी पीड़ित अपंग भी हो जाता है और बिना चेतना के उल्टा-सीधा बोलता है। ऐसे लक्षण दिखें तो तुरंत नजदीक के सरकारी अस्पताल अथवा जिला चिकित्सालय में कुशल चिकित्सक की देखरेख में इलाज कराना चाहिए। उन्होने बताया कि जिलाधिकारी राजेश कुमार ने स्वास्थ्यकर्मियों को मच्छर जनित रोगों के प्रति जागरूकता अभियान चलाने को लेकर निर्देशित किया गया था जिसके क्रम में विभाग पूरी मुस्तैदी और सक्रियता से कार्य केआर रहा है।
 डॉ एके सिंह ने बताया कि यह सभी मच्छर से पैदा होने वाली बीमारियां हैं, इसलिए अपने घर के आसपास पानी इकट्ठा न होने दें। जलभराव वाले श्रोतों जैसे गड्ढों, टूटी-फूटी प्लास्टिक की डिब्बियों, बोतलों, गमलों तथा कूलर आदि में पानी न जमा होने दें। मलेरिया और फाइलेरिया के मच्छर गंदे पानी में पैदा होते हैं जबकि डेंगू और मस्तिष्क ज्वर के मच्छर साफ पानी में पैदा होते हैं।
 जिला मलेरिया अधिकारी (डीएमओ) राम नरायन ने बताया कि शासन की ओर से दिये गए निर्देश के क्रम में प्रत्येक शनिवार और रविवार को साफ-सफाई कराई जाती है जिससे मच्छरों से होने वाली बीमारियां कम हो गई हैं। मच्छर जनित रोगों से बचाव के लिए जिला एवं ब्लाक स्तर पर विभागीय एवं अंतर विभागीय अधिकारियों की ओर से साफ-सफाई कराई गई। जल भराव वाले श्रोतों को नष्ट किया गया। सर्वे कराकर घरों के अंदर और बाहर एकत्रित पानी नष्ट किया गया। स्वास्थ्य विभाग और प्रधान के समन्वय से कीटनाशक दवा का छिड़काव किया गया। फागिंग कार्य कराया गया। साथ ही प्रचार सामग्री बांटकर लोगों को जागरूक किया गया और अब भी किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि डेंगू और मस्तिष्क ज्वर के रोगी मिलने पर जनपद स्तर से रोगी के घर के आसपास के 50 घरों में फागिंग और दवा का छिड़काव कराया जाता है। गांव में आशा कार्यकर्ता और प्रधान के सहयोग से सफाई और कीटनाशक दवा का छिड़काव कराया जा रहा है।

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