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NASA ने अंतरिक्ष में खोजा अनोखा कोरोना

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अमेरिकी की अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने अंतरिक्ष में एक ऐसा कोरोना  खोज निकाला है, जो वायरस नहीं है. ये कोरोना ब्लैकहोल के आसपास चमकता दिखाई देता है. इसे देखकर NASA के वैज्ञानिक भी हैरान हैं, क्योंकि वैज्ञानिकों के मुताबिक, ये कोरोना गायब होकर वापस आ जाता है.
बता दें कि ब्लैकहोल चमकते नहीं हैं, बल्कि उनके आसपास चमकने वाले पिंड की वजह से ही उनके बारे में जानकारी मिलती है. ब्लैक होल इतना ताकतवर होता है कि उनके गुरुत्व के बचकर प्रकाश भी नहीं निकल सकता. हालांकि इस बार वैज्ञानिकों ने एक ब्लैक होल के पास अनोखी चमक देखी है. आश्चर्य की बात है कि यह गायब होकर वापस आ जाती है.
नासा के वैज्ञानिकों का कहना है कि इस ब्लैक होल के चारों तरफ गहरे नारंगी रंग के गर्म गैस की लेयर बनी हुई है. इस ब्लैक होल से एक्स-रे निकल रही है. यह धरती से 30 करोड़ प्रकाश वर्ष दूर है, इसके बाद भी इसका एक्स-रे ग्लो दूरबीन के माध्यम से धरती से देखा जा सकता है.
वैज्ञानिकों ने जानकारी दी कि ये ब्लैक होल 1ES 1927+654 नामक गैलेक्सी में मौजूद है. इसके बाहर चक्कर लगा रहा कोरोना हर 40 दिन में खत्म होता है और फिर वापस आ जाता है. चिली के सैंटियागो स्थित डिएगो पोर्टेल्स यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर का कहना है कि इस ब्लैक होल का कोरोना काफी अजीब व्यवहार कर रहा है, जिसे समझना वैज्ञानिकों के लिए काफी मुश्किल है.
नासा के वैज्ञानिकों का कहना है कि इसी ब्लैक होल के चारों तरफ सफेद-नीले रंग का कोरोना घूम रहा है. यह ब्लैक होल से 100 गुना ज्यादा चमकदार तथा गर्म है. यह कोरोना गायब होकर वापस आ जा रहा है. कोरोना वाला इलाका बहुत ही गर्म इलेक्ट्रॉन से मिलकर बना है. इसे ब्लैकहोल के मैग्नेटिक फील्ड से शक्ति मिलती है.
वैज्ञानिकों ने बताया कि यह एक सिंक्रोटॉन की तरह होता है. यह इलेक्ट्रोन का त्वरण इतना बढ़ा देता है कि उस उच्च ऊर्जा से एक्स रे की वेवलेंथ चमक निकलने लगती है. बता दें कि ब्लैकहोल अंतरिक्ष का ऐसा हिस्सा है, जहां पर भौतिक विज्ञान का किसी भी प्रकार का नियम काम नहीं करता. कुछ भी इसके गुरुत्वाकर्षण से बच नहीं सकता. प्रकाश भी यहां प्रवेश करने के बाद बाहर नहीं निकल पाता.

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