महादेव की पूजा में क्यों बेहद महत्वपूर्ण हैं बेलपत्र - Ideal India News

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महादेव की पूजा में क्यों बेहद महत्वपूर्ण हैं बेलपत्र

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महादेव के प्रिय महीने सावन में उनके भक्त शिव को खुश के लिए विधि विधान से पूजा अर्चना करते हैं. सावन में भगवान शिव की पूजा में तमाम सामग्रियों का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि यदि आपके पास पूजा सामग्री न हो तो आप महादेव को केवल तीन पत्तियों वाला बेलपत्र चढ़ाकर भी खुश कर सकते हैं.
सावन में भगवान को जलाभिषेक के वक्त बेलपत्र चढ़ाने का विषेष महत्व है. बेलपत्र को संस्कृत में विल्वपत्र कहा जाता है. यह भगवान शिव को बहुत प्रिय है. शास्त्रों के मुताबिक बेलपत्र की पूजा में बेलपत्र का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है.
मान्यता है कि शिव की पूजा में कुछ भी न हो तो बस एक बेलपत्र ही काफी है. लेकिन पूजा सामग्री में सुबकुछ हो लेकिन बेलपत्र ना हो तो पूजा अधूरी मानी जाती है. ऐसे में हर कोई यह जानना चाहता है कि आखिर शिव की पूजा में अर्पित किये जाने वाला बेलपत्र इतना महत्वपूर्ण क्यों है...
एक कथा के मुताबिक समुद्र मंथन के दौरान भगवान शिव ने जब विष पान किया था जो उनके गले में जलन हो रही थी. बिल्वपत्र में विष निवारक गुण होते हैं इसलिए उन्हें बेलपत्र चढ़ाया गया, ताकि जहर का असर कम हो. मान्यता है कि तभी से भोलेनाथ को बेलपत्र चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई. वहीं अन्य कथा के मुताबिक बेलपत्र की तीन पत्तियां भगवान शिव के तीन नेत्रों का प्रतीक हैं. यानि की शिव का ही रूप माना जाता है इसलिए बेलपत्र को अत्यंत पवित्र माना जाता है.
सावन के महीने में सोमवार का खास महत्व माना जाता है. सोमवार के दिन ब्रह्म मुहूर्त से ही भक्त शिव मंदिरों में पहुंच जाते हैं. ऐसे में पूरे सावन महीने में महिलाओं से लेकर पुरुष तक हर कोई भगवान शिव की आराधना में लीन रहते हैं.अक्सर कुंवारी लड़कियां ये व्रत अपना मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए करती हैं. वहीं सुहागिन महिलाएं अपने पति की सफलता और लंबी आयु के लिए सावन सोमवारी का पालन करती हैं. कहा जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से धन, विद्या, ज्ञान और परिवार में सुख शांति मिलती है.

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