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कैमूर के पांच मेडिकल स्टूडेंट फंसे किर्गिस्तान में

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कंचन तिवारी
कैमूर भभुआ, बिहार

कैमूर के पांच मेडिकल स्टूडेंट फंसे किर्गिस्तान में





बिहार सरकार के दिलचस्पी नहीं लेने से नहीं मिल रही आने की अनुमति

अभिभावकों में दिख रही गहरी नराजगी

 कैमूर जिले के पांच मेडिकल स्टूडेंट रूस के किर्गिस्तान में फंसे हुए हैं। कोरोना काल में उनके जीवन और मौत वाली स्थिति वहां बनी हुई है। राज्य सरकार द्वारा विदेश में रहनेवाले बिहार के छात्र छात्राओं को ले आने की स्वीकृति नहीं दिए जाने से उनकी स्थिति वहां बिगड़ रही है। कोरोना संक्रमण के कारण कैमूर के फंसे सभी पांचो मेडिकल के छात्रों ने अपने पासपोर्ट व मेडिकल कॉलेज का आईडी भी सरकार के बेबसाइट पर डाला है। लेकिन उन्हें अनुमति नहीं मिलने से आने में परेशानी हो रही है। उनका सत्र पुरा होने के बाद भी कोरोना ने उनके पांव में बिड़िया लगा दिया है। ये सभी छात्र भारतीय दुतावास का लगातार चक्कर काट रहे हैं। छात्रों के परिजन उनके लिए बेचैन हैं। तो छात्र स्वदेश लौटने को ले परेशान हैं। बता दें कि रूस व किर्गिस्तान में भारत के काफी संख्या में छात्र छात्राएं मेडिकल शिक्षा के लिए जाते हैं। जहां से उन्हें कम खर्च में एमबीबीएस की पढ़ाई करने की तमन्ना पूरी हो जाती है। ये छात्र छात्राएं इस अवधि एक या दो बार किसी तरह घर आते हैं। अब जब उनका कोर्स पूरा हो गया तो वे घर आने के लिए चार माह से छटपटा रहे हैं। कोरोना महामारी के कारण रामगढ़ के आनंद कुमार मिश्र, दुर्गावती के मनीष पाण्डेय, बगाढ़ी के रंजीत कुमार, भगवानपुर के चंदन कुमार पाण्डेय, तथा मोहनियां की अर्चना कुमारी ने मेडिकल की पढाई के लिए किर्गिस्तान गये हुए हैं। जो लॉकडाउन के चलते नहीं आ पा रहे हैं। ऐसी स्थिति में उनके जीवन की गाड़ी का पहिया कहीं निकल न जाये इसका अंदेशा उनके परिजनों में घर कर गया है। ये सभी छात्र प्रधानमंत्री व राज्य के मुख्यमंत्री के पोर्टल सहित कई केंद्रीय मंत्री साइट पर ट्वीट कर विदेश में फंसे होने की बात से अवगत करा चुके हैं। हलांकि भारत सरकार वंदे भारत प्रोजेक्ट चला रही है। लेकिन उन्हें उसमें आने मंजूरी बिहार के चलते नहीं मिल सकी। इनलोगों ने बताया कि पासपोर्ट दिल्ली का रहता तो हमलोगों को टिकट मिल जाता। लेकिन बिहार का पासपोर्ट होने से यह स्थिति बनी हुई है। इनलोगों ने कहा कि राज्य सरकार की कोशिश होती तो इस प्रोजेक्ट के माध्यम से हमलोग कम पैसे में आ सकते हैं। लेकिन ऐसा नहीं हुआ तो हमलोगों को प्राइवेट जहाज से आने में दोगुना राशि खर्च करनी पड़ेगी।
फोटो है।

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