गिलोय, मुलैठी और अश्वगंधा हैं कोरोना के इलाज में लाभकारी , सरकार ने दी ट्रायल की अनुमति - Ideal India News

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गिलोय, मुलैठी और अश्वगंधा हैं कोरोना के इलाज में लाभकारी , सरकार ने दी ट्रायल की अनुमति

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नई दिल्ली
भारत के सदियों पुराने आयुर्वेद का डंका अब पूरी दुनिया में बजने लगा है। अगर सबकुछ सही रहा, तो जल्द ही भारतीय आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति से कोरोना का इलाज किया जा सकता है। हमारे देश में तीनों चिकित्सा पद्धतियों के माध्यम से कोरोना के इलाज की संभावना पर तेजी के साथ शोध चल रहा है।
भारत सरकार ने कोरोना की दवा के तौर पर अश्वगंधा, गिलोय और मुलैठी का क्लीनिकल ट्रायल की इजाजत दे दी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने बताया कि कोविड-19 की दवा तैयार करने के लिए भारत एक साथ तीनों चिकित्सा पद्धति में प्रयोग करने जा रहा है।
हम यहां बता रहे हैं तीनों औषधियों तत्वों के बारें में जिनपर क्लीनिकल ट्रायल किया जा रहा है।
1. अश्वगंधा
आय़ुष मंत्रालय ने अश्वगंधा का कोरोना की दवा के रूप में ट्रायल शुरू कर दिया है। अथर्ववेद में भी अश्वगंधा के बारे में बताया गया है। यह बैक्टीरिया के संक्रमण में लाभ देता है। इसके अलावा, घाव भरने में उपयोगी और प्रतिरक्षा प्रणाली बढ़ाने में मददगार होता है। यह मधुमेह में दवा के रूप में लाभदायक होता है। इससे थायराइड की समस्या भी समाप्त होती है। अश्वगंधा मांसपेशियों में शक्तिवर्धक ताकत बनाता है और सुधार भी करता है। अश्वगंधा में अवसाद में असरदायक और इसमें तनाव विरोधी गुण पाए जाते हैं।
2. यष्टिमधु (मुलेठी)
आयुष मंत्रालय मुलेठी को भी कोरोना के इलाज में प्रयोग कर रहा है। इसपर क्लीनिकल ट्रायल किया जा रहा है। मुलेठी का वानस्पतिक नाम ग्लयसयररहीज़ा ग्लबरा प्रपात है। यह अब तक गला खराब, पेट संबंधी समस्याओं आदि में इस्तेमाल किया जाता है।
गुडूची (गिलोय)
गिलोय का क्लीनिकल ट्रायल भी कोरोना के इलाज के लिए किया जा रहा है। इसका भी आयुर्वेद में काफी महत्व है। गिलोय का इस्तेमाल बुखार उतारने में किया जाता है। इसके अलावा यह सैकड़ों तरह की बीमारियों को दूर करता है जैसे एसिडिटी, कफ की बीमारी, डायबिटीज की बीमारी, ह्रदय संबंधी बीमारी, कैंसर, आंखों संबंधी रोग, कब्ज, टीबी, हिचकी, कान, बवासीर, पीलिया रोग, लीवर विकार, मूत्र रोग, गठिया, फाइलेरिया आदि बीमारियों में उपचार के लिए भारत में गिलोय का इस्तेमाल किया जाता है। 

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