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अब इन्वेंट इन इंडिया’ होना चाहिए

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#IIN

Sanjay Chaturvedi  and Shri Dhar Tiwari Vasai
 मुंबई
 देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक डॉ. रघुनाथ माशेलकर का कहना है कि भारत के लिए इस समय ‘मेक इन इंडिया’ की तर्ज पर ‘इन्वेंट इन इंडिया’ का नारा बुलंद करने का भी सही समय है। क्योंकि भारत में अच्छी गुणवत्ता के टिकाऊ और सस्ते उत्पाद तैयार करने की क्षमता है।
सीएसआईआर के महानिदेशक रह चुके रघुनाथ माशेलकर देश के कई वैज्ञानिक संस्थानों से जुड़े रहे हैं। आज प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत अभियान की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि अब चीन से लोगों का मन उचट चुका है। ऐसे में भारत को पूरी तरह से अपने उत्पाद तैयार करके घरेलू एवं विश्व बाजार में उपलब्ध कराने की पहल करनी चाहिए। माशेलकर के अनुसार इसके लिए हमें अपने शोध पर भी ध्यान देना होगा। 77 वर्षीय माशेलकर इन दिनों मैरिको इन्नोवेशन फाउंडेशन की गवर्निंग काउंसिल के चेयरमैन के रूप में कोविड-19 संकट के दौरान ऐसे उत्पादों की खोज में लगे हैं, जिनसे इस संकट का मुकाबला किया जा सके। फाउंडेशन के संस्थापक एवं मैरिको लि. के चेयरमैन हर्ष मारीवाला की ‘इन्नोवेट टु बीट कोविड’ परिकल्पना के तहत ‘भारत द्वारा भारत के लिए ’ अभियान शुरू किया गया है। इसमें मैरिको इन्नोवेशन फाउंडेशन की पहल पर पीपीई किट, मास्क, वेंटिलेटर एवं विसंक्रमण उपकरणों के निर्माण को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इसी कड़ी में कोरोना योद्धाओं के लिए भारतीय मौसम के अनुकूल कम से कम 12 घंटे पहनी जा सकनेवाली पीपीई किट क्रिया वर्ल्डवाइड ने तैयार की है। लॉग-9 मैटीरियल्स साइंटिफिक प्रा.लि. ने बहुउद्देश्यीय यूवी विसंक्रमण चैंबर तैयार किया है, जिसे कोरोना ओवन के नाम से जाना जाता है। इसी प्रकार सरल डिजाइन सोल्यूशन्स उच्च गुणवत्ता वाला त्रिस्तरीय सर्जिकल मास्क तैयार किया है। माशेलकर का मानना है कि ये उत्पाद इस संकट के दौर में न सिर्फ भारतीय समाज के लिए उपयोगी साबित होंगे, बल्कि अन्य जरूरतमंद देशों में भी अपनी जगह बनाएंगे। हल्दी एवं बासमती चावल पर अमरीकी पेटेंट को चुनौती देकर भारत के परंपरागत ज्ञान को पुनर्स्थापित करनेवाले डॉ. माशेलकर कहते हैं कि इस समय 200 से ज्यादा देश कोविड-19 रोग से लड़ रहे हैं। इन सबका दुश्मन एक है। लेकिन अब कोई भी इससे लड़ने के लिए चीनी उत्पाद नहीं इस्तेमाल करना चाहता। भारत के लिए यह स्थिति फायदेमंद हो सकती है। माशेलकर के अनुसार कोविड-19 की वैक्सीन या दवा तैयार होने में 12 से 18 महीने लग सकते हैं। इसलिए दुनिया भर के लोगों को कोरोना के साथ जीने के लिए नई-नई आदतें डालनी होंगी। नए-नए उपकरण उपयोग करने होंगे। हाथ धोने की आदत के साथ-साथ विसंक्रमण भी एक जरूरत बन जाएगा। इन सभी जरूरतों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों का शोध एवं उत्पादन करना जरूरी हो जाएगा।

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