कोरोना वायरस से ठीक हुए मरीज़ों को सता रहा है ये डर - Ideal India News

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कोरोना वायरस से ठीक हुए मरीज़ों को सता रहा है ये डर

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35 वर्ष की मीराबाई निकोलसन-मैकेलर एक महीने पहले ही ख़तरनाक कोरोना वायरस से संक्रमित हुई थीं। इस फिल्ममेकर को लगा था कि अब वह इस संक्रमण से उबर कर स्वस्थ हो रही हैं, लेकिन एक दिन अचानक सांस की समस्या और सीने में दर्द फिर लौट आया।   
दूसरी बार अस्पताल और कोविड-19 के टेस्ट में साफ हुआ कि उन्हें फिर कोरोना वायरस हो गया है। तीन दिन पहले की ही बात जब उन्हें अस्पताल ने स्वस्थ घोषित किया था और 72 घंटों के अंदर कोई लक्षण न दिखने के बाद घर के क्वारेंटीन को ख़त्म करने की इजाज़त दी थी।   अपनी सेहत से परेशान मीराबाई ने कहा कि वह हर वक्त यहीं सोचती रहती हैं कि ये सब कब ख़त्म होगा? क्या अब भी दूसरों को मुझसे संक्रमण का ख़तरा है? मुझे कैसा पता चलेगा कि ये वायरस मेरे शरीर से पूरी तरह निकल चुका है? 
दूसरी बार कोरोना वायरस का शिकार होने वाली सिर्फ मीराबाई ही नहीं हैं, ऐसे मरीज़ों की तादाद बढ़ती जा ही है। ऐसे कई मरीज़ हैं जिनमें स्वस्थ होने के बाद दोबारा लक्षण दिखने शुरू हो गए, टेस्ट पॉज़ीटिव आया या दूसरी बार संक्रमित हो गए। 
क्या है इसके पीछे वजह
स्वस्थ हो जाने के बाद कोरोना वायरस के लक्षण वापस आ जाने को मेडिकल फील्ड में 'फॉल्स डॉन' कहा जा रहा है। हेल्थ एक्सपर्ट्स इस घटना से हैरान हैं। इस पहेली का हल निकालने में कई चुनौतियां, एक प्रभावी वैक्सीन के विकास से लेकर कैसे सरकारें जल्द ही लॉकडाउन को सुरक्षित रूप से खोलेंगी और लोग नॉर्मन जीवन जी सकें। यहां तक कि वायरस के लौटने जैसी स्थिति से लोग तनाव में आ रहे हैं, जो इस वायरस को हराना और मुश्किल कर रहा है। इस वायरस से ठीक हुए अभी तक 10 लाख लोगों के दिलों में इसके लौटने का डर बैठा हुआ है। अभी तक रिसर्च में ये नहीं साबित हुआ है कि स्वस्थ हो जाने के बाद लक्षण क्यों लौट आते हैं। क्वीन्स मेडिकल रिसर्च में क्लीनिकल रेडियोलॉजी के हेड एडविन जे.आर वान बीक, के अनुसार एक संभावना यह है कि कोविड-19 की वजह से रक्त के थक्के बन जाते हैं जिनका इलाज अगर एंटीकोआगुलेंट दवाओं से न किया जाए तो ये संभावित ख़तरनाक जटिलताओं का कारण बन सकते हैं।

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